बीमार ससुर को अपने कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाती बहादुर बहू ने दी बुजुर्गों की सेवा की मिशाल -जानिए खबर

देहरादून। जहां आज लोग अपने बुजुर्गों की अनदेखी कर उनसे दूरी बना रहे है वहीं एक बहु ने अपने बीमार ससुर को अपने कंधों पर उठाकर अस्पताल पहंुचाया है। इस बहु की बहादुरी देखकर कई लोगों ने सलाम किया है।

लोगों का कहना है कि ऐसी बहु ही बेटियां है उन बहुओं के लिए नसीहत है जो अपने सास ससुर को वृद्ध आश्रम में छोड़ देती है।

वहीं प्रदीप भट्ट प्रदेश अध्यक्ष जिला पंचायत सदस्य संगठन उत्तराखंड ने इस बहन के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगा है इस बहन को ईश्वर सारी खुशियां दे जोर और महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है। प्रदीप भट्ट ने कहा कि – ‘‘कोटि कोटि धन्यवाद व आशिष इस बेटी को एवम उसके संस्कारो को, लेकिन फोटो में पीछे एम्बुलेंस खड़ी है साथ में बहुत सारी गाड़िया भी खड़ी है शायद हम सबका भी कुछ कर्तव्य बनता है उसे मदद करने हेतु!

प्रदीप भट्ट जी को इस पोस्ट प्रशंसनीय प्रस्तुति के लिये बधाई, साधुवाद, शुभकामनायें ।जन जागृति होगी ऐसी आशा है। पुनः शुभकामनायें ।

वहीं आर डी भट्ट ने भी इस बहन के लिए तारीफों के पुल बांधे है जैसे- आधुनिक काल में ऐसी संस्कार वाली कोई महिला ढूंढ कर भी नहीं मिलेगी। सलाम है ऐसी गुड़वान बहन को। बुजुर्गो की सेवा से अक्षय पुण्य अर्जित होता है।

वहीं रमेश पहाड़ी कहते है कि – अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के लिए सर्वाधिक उपयुक्त चित्र और सर्वोत्तम भूमिका में बहू! प्रशंसनीय, वन्दनीय।

साथ ही सुरेन्द्र आर्य ने भी बहन की खुब तारीफ की है – उन्होंने कहा कि ऐसी संस्कारित बहु को सत सत नमन।
ऐसी बहु को मंदिर मस्जिद जाने व श्राद्ध तर्पण ,बरसी करने की जरूरत नहीं है, जीवित बुजुर्गों की श्रद्धा पूर्वक सेवा ही श्राद्ध है।

पाठक प्रीतम सिंह नेगी ने भी अपने दो शब्द बहन के लिए – ये बात हम मे और हमारे संस्कारो मे होनी चाहिए. की माता पिता का हमारे जीवन मे कितना योग दान रहा. बचपन मे माँ बाप प्यारे बुढ़ापे मे न्यारे क्यों हो जाते.

पाठक विभूतिनाथ झा ने भी बहन की प्रशंसा की है जैसे – सादर अभिनन्दन! बधाई हो। मानवता, नैतिकता का प्रत्यक्ष रूप! सभी महिलाओं को श्वसुर- सास एवं सभी पुरूषों को श्वसुर सास होते है, सभी को वृद्धावस्था का सामना करना परता है, ऐसी स्थिति में पति- पत्नी दोनो को नैतिक कर्तव्य बनता है पिता- माता के साथ श्वसुर- सास दोनो का यथासंभव ख्याल रखें।
प्रेरणाप्रदक पोस्ट है पोस्ट प्रस्तुत करने हेतु आपको भी बहुत बहुत साधुवाद।

‘मातृ देवो भव’ ‘पितृ देवो भव’

वहीं सतेन्द्र सिंह ने भी कहा कि – यही सबसे बड़ा धर्म है। जरूरत के मुताबिक इस बहन ने अपने कर्तव्य का निर्वहन कर समाज को एक नई पहल का संदेश दिया है, अगर मन में सच्ची आस्था हो तो विपरीत परसस्थितियों में भी सब कुछ सम्भव किया जा सकता है।

बहन की ये फोटो उसका दर्द भी बयाँ कर रही है कि इतने मुश्किल समय मे भी सरकारी तंत्र का उस बहन को कोई सहयोग नहीं है। बहन के जज्बे को सलाम लेकिन बहुत दुःख भी है कि पीछे एम्बुलेंस खड़ी होने के बाद भी बहन को अपने ससुर को कन्धों पर ले जाना पड़ रहा है। दुखद

वहीं अनेकों लोगों ने अपने बुजुर्गा की इस सेवा को सहारा है। जो भी इस बहन को देख रहा है उसकी के मुहं से ईश्वर से कुछ न कुछ आशीर्वाद या खुशी मांग रहा है। सभी पाठक ईश्वर से यही प्रार्थना करते है जल्द से जल्द वे ठीक हों।

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