भगवद् भक्ति ही मनुष्य जीवन का सार हैः रविन्द्र बडोनी

सुशील, ब्यूरोचीफ

देहरादून। मनुष्य जीवन का सार भगवद् भक्ति है और भक्ति का मूल आधार सत्संग है। सत्संग ही वह पाठशाला है जो निरकांर प्रभु परमात्मा के प्रति मानव को सर्वोच्च चेतना प्रदान करती है। उक्त आशय के प्रवचन सन्त निरंकारी सत्संग भवन, रेस्ट कैम्प में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूज्य भाईसाहब रविन्द्र बडोनी जी ने आयी हुई साध संगत को सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन सन्देश देते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने आगे कहा कि बिनु सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिनु सुलभ न सोई। जब सत्गुरु की अपार कृपा होती है तो मनुष्य को सत्संग प्राप्त होता है और सत्संग से ही मनुष्य की चेतना जागती है जिससे मनुष्य जीवन एवं मनुष्य शरीर की महत्ता समझ में आती है। इसीलिए तो मनुष्य शरीर पाने के लिए को देवी-देवता भी तरसते रहे।

उन्होंने कहा कि सत्संग जीवन को देखने का सही दृष्टिकोण प्रदान करता है। सत्संग के बिना इन्सान केवल जगत को देखता है। लेकिन सत्संग के प्रभाव से वह जगत के साथ-साथ जगत के स्वामी को भी देखता है। सत्संग ही मानव जीवन को सिद्धि व सर्वोत्तम गति प्रदान करता है।

सत्संग समापन से पूर्व अनेकों प्रभु-प्रेमियों, भाई-बहनों एवं नन्हे-मुन्ने बच्चों ने गीतों एवं प्रवचनों के माध्यम से निरंकारी माता सुदीक्षा जी महाराज की कृपाओं का व्याख्यान कर संगत को निहाल किया। मंच का संचालन पूज्य भाईसाहब दयानन्द नौटियाल जी ने किया।

Sushil Kumar Josh

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