ईश्वर के दर्शन बिना कर्म संभव; “क्रिया साध्य नहीं है कृपा साध्य है ब्रह्म की प्राप्ति; सदगुरु की कृपा से…

सत्गुरु की असीम कृपा से निरंकार प्रभु के दर्शन हुए, इस निरंकार प्रभु तत्व की जानकारी प्राप्त हुई। अब जिज्ञासा होती है कि अपना स्वरूप कैसा होगा, जिससे हम प्रभु के निराकार स्वरूप को अपने स्वरूप में एकमिक कर सकें।

महापुरुषो, आओ जाने कि मेरा ये शरीर प्रकृति का अंश है जो कि प्रकृति का अंश है, जो कि जड़ है, परिवर्तन शील है और इसमें ब्याप्त चेतन सत्ता ओत-प्रोत है, ये परमात्मस्वरूप है, परमात्मा का अंश है ,”ईश्वर अंश जीव अविनाशी” । ये चेतना जो कि ईश्वरीय अंश है,ये मेरा स्वरूप है, Baba Hardev Singh जी महाराज ने अपने बचनों में संगतों का आह्वान किया कि ” Be in your True Self” अपने स्वरूप में स्थित हो जाओ।

महापुरुषो, इस चेतना के इस स्वरूप की सभी महात्माओं को जानकारी होनी है, इसको शास्त्रों में “Higher stage of consciousness” कहा गया है। ये अवस्था direct मन बुद्धि से परे की अवस्था है। मिशन की एक किताब छपी है शीर्षक है, “मन के पार” अवश्य पढ़ें।

ये बिना कर्म किये प्रभु प्राप्ति हो गई, इसलिए कहा गया है कि ब्रह्म प्राप्ति “क्रिया साध्य नहीं है बल्कि कृपा साध्य है” ये सदगुरु महाराज की कृपा दृष्टि से ही संभव हो सका है जी।

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