ब्रह्मज्ञान का दाता सद्गुरू: जसराम थपलियाल

Jasram Thapliyaदेहरादून। सद्गुरू ब्रह्म का दाता है वह जिस ब्रह्मज्ञानी भक्त को आज्ञा देता है वह भक्त की जिज्ञासु का कल्याण कर सकता है। अर्थात सद्गुरू का बख्शा हुआ इंसान दूसरे को बख्शने योग्य बन जाता है। जिस प्रकार जलते हुए दीपक से दूसरे दीपक को जलाया जा सकता है। उसी प्रकार ब्रह्मज्ञानी से ब्रह्मज्ञान फैलाया जा सकता है। जो इंसान को मुक्त अवस्था की तरफ ले जाती है जिससे जीवन में भक्ति का आनंद आता है। उक्त आशय के प्रवचन सन्त निरंकारी सत्संग भवन, रेस्ट कैम्प में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्थानीय ज्ञान प्रचारक जसराम थपलियाल जी ने सद्गुरू माता सुदीक्षा सविंदर हरदेव जी महाराज का पावन सन्देश देते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने आगे कहा कि यदि हृदय विशाल हो तो संकीर्णता खुद ब खुद समाप्त हो जाती है। देश, संस्कृति, भाषा, जाति पाति, खानपान पहनावे के भिन्न-भेद समाप्त हो जाते हैं। सारा संसार अपना लगने लगता है लेकिन यह विशालता केवल विशाल निरंकार प्रभु के साथ जुड़कर प्राप्त होती है। मन में ज्ञान भरपूर गुरमत के विचारों को उजागर करना व मनमत से बचना ही मन की सेवा है। उज्जवल व पाक मन ही नहीं दूसरे के मन के विचारों को कैसे पवित्र कर सकता हैं यही महान सेवा है। सेवा वही है जो मन से की जाये। जिन्होंने स्वयं को अर्पण किया हुआ है, मिशन जहां चाहे भेज दे, जो चाहे वह काम करा लें।

सद्गुरू की कृपा से संतों का संग मिलता है जिससे जीवन में भक्ति मार्ग पर चलने के लिए मनुष्य का जीवन सुखदायी होता है। सद्गुरू के दर पर आकर किसी चीज का भय नहीं रहता। सद्गुरू स्वयं गुरसिख के जीवन में अपनी कृपा से ज्ञान का चक्षु प्रदान करते हैं। जिससे आत्मा के स्वरूप परमात्मा का बोध होता है। आवागमन के चक्कर से मुक्ति मिल जाती है। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों सन्तों भक्तों ने गीतों, प्रवचनों, गढ़वाली, नेपाली, हिन्दी, पंजाबी, कुमाउंनी, भाषा का सहारा लेकर समस्त संन्तों को निहाल किया। सेवादल के भाई बहनों ने भी समस्त सेवाओं को सुन्दर रूप दिया। मंच का संचालन पूज्य विजय रावत जी ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *