राहत की सांस; मंत्री मंडल ने कर्मचारियों के भत्तों में कैंची चलाने का फैसला बदला, एक दिन का ही वेतन कटेगा -जानिए खबर

देहरादून। कोविट-19 संकट काल में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड सरकार भी कर्मचारियों के कुछ भत्तों में कैंची चलाने की तैयारी में थी। लेकिन ऐन वक्त पर मंत्री मंडल ने अपना फैसला बदल दिया है। बता दें कि मुख्य सचिव से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक का एक दिन का वेतन हर महीने एक साल तक काटने का फैसला कियां। वहीं भत्तों में कटौती का फैसला बदलने से कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।

ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अगुवाई में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 18 प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। इस दौरान कोरोना की रोकथाम को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में कोरोना से निपटने के लिए जहां टेस्टिंग को तेज करने का निर्णय लिया है, वहीं कर्मचारियों के भत्ते के बजाय उनका एक दिन वेतन मार्च तक हर महीने काटने का निर्णय लिया है।

शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि कोरोना महामारी (कोविड-19) से लड़ने के लिए सरकार को धन की आवश्यकता है। इसके लिए पहले भत्तों की कटौती करने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन मंत्रिमंडल ने जब यह देखा कि भत्तों के रूप में कर्मचारियों को अधिक आर्थिक नुकसान हो रहा है तो निर्णय लिया गया कि मुख्य सचिव से नीचे सभी कर्मचारियों को आगामी मार्च 2021 तक हर महीने एक दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में देना होगा।

कैबिनेट ने इस फैसले से पेंशनरों को अलग रखा है। यानि इस अवधि में जो कर्मचारी रिटायर होगा, उसको रिटायरमेंट के बाद कटौती नहीं करानी होगी। सरकार ने निर्णय लिया कि दायित्वधारियों से प्रतिमाह पांच दिन का वेतन सीएम राहत कोष में जमा किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पहले ही विधायकों को एक साल तक हर महीने वेतन भत्तों का 30 फीसद कोविड से निपटने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में देने का निर्णय लिया है।

कैबिनेट में आज लिए गए फैसले

• कोविड सैंपलिंग, टैस्टिंग की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। प्राइवेट लैब को टैंडर प्रक्रिया से लेने के लिए 4 दिन का अवधि निर्धारित किया गया।

• किसी भी कार्मिक के किसी भी रूप में भत्ते में कटौती नहीं की जाएगी, मुख्य सचिव से लेकर नीचे के सभी कार्मिकों का मार्च 2021 तक प्रत्येक माह में, एक दिन का वेतन में मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जायेगा। पेंशनरों से किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। दायित्वधारियों का प्रत्येक माह में 5 दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा, मार्च 2021 तक।

• अब उत्तराखंड के अंदर कोई भी व्यक्ति राज्य के किसी भी क्षेत्र में आने जाने के लिए स्वतंत्र होगा। कैबिनेट ने इस पर मुहर लगाई है। इस फैसले के बाद ऑनलाइन पास अप्लाई करने पर राज्य के अंदर कहीं भी आम जनता जा सकेगी। जाने वाले शख्स को क्वारन्टीन नहीं होना होगा।

• मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना में राहत प्रदान की गयी है। बागवानी मिशन में सब्जी, बीज, पुष्प पर दिया जाने वाला 50 प्रतिशत का अनुदान शेष सभी कृषकों को दिया जाएगा। बागवानी मिशन से अलग फल, बीज, आलू, अदरक 50 प्रतिशत राज्य सहायता अनुदान के रूप में दिया जायेगा तथा कोल्ड स्टोर और ए.सी. वैन पर भी अनुदान दिया जायेगा। 15 लाख रुपये लागत के कोल्ड स्टोरेज पर 50 प्रतिशत अनुदान तथा 26 लाख रुपये एसी वैन की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

• श्रम विभाग के श्रम अधिनियम के अंतर्गत दुकान, प्रतिष्ठान के नियोजकों को संदिग्ध कोविड कर्मचारियों को 28 दिन के क्वॉरंटीन अवधि का वेतन भुगतान करना होगा।

• सभी दुकानों, कारखानों जहां 10 से अधिक कर्मचारी हैं, कोविड को रोकथाम के लिए सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाएगी।

• उत्तरकाशी में 1000 मि.टन क्षमता के कोल्ड स्टोर को बनाने के लिए मंडी परिषद को 13 करोड़ 46 लाख में बनाने की अनुमति।

• उत्तराखंड उपखनिज 2016 चुगान नीति में परिवर्तन करते हुए निगम के पट्टे की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। यदि अन्य क्षेत्र में टेंडर के बाद कोई फर्म नहीं मिलता है तो इसका संचालन निगम करेगा।

• कोविड स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत उपकरण क्रय का अधिकार 03 माह से बढ़ाकर 28 फरवरी तक कर दिया गया है। अग्रिम धनराशि को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया। निदेशक के 03 करोड़ के अधिकार को अब प्राचार्य भी उपयोग कर सकेंगे।

• श्रम सुधार अधिनियम में यूनियन बनाने के लिए कर्मचारियों के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत की संख्या कर दी गयी।

• रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्री की डिजिटल नकल दो रुपये प्रति पृष्ठ और न्यूनतम 100 रुपये की गयी।

• आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में भर्ती के लिए तीन माह की निर्धारित अवधि बढ़ाकर 20 फरवरी 2021 किया गया।

• मेगा इंडस्ट्री एवं इंवेस्टमेंट पालिसी में संसोधन करते हुए वैधता अवधि 31 मार्च 2020 से 30 जून 2020 किया गया।

• जिला योजना समिति के चुनाव के संबंध में अध्यादेश लाते हुए जिलाधिकारी प्रभारी मंत्री की स्वीकृति से कार्य करा सकते है।

• पंचायती राज अध्यादेश लाते हुए जहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया है एवं अन्य पदों का चुनाव हो गया है वहां जिलाधिकारी के माध्यम से शेष पदों पर मनोनीत किया जा सकता है।

• प्रदेश के भीतर वाहनों की आवाजाही होगी, लेकिन संबंधित जिले में जिलाधिकारी कार्यालय में करना होगा ऑनलाइन आवेदन, सिर्फ आवेदन ही पर्याप्त, उसके बाद पास लेने की आवश्यकता नहीं।

ukjosh

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