‘एन ऑथर्स आफ्टरनून’ के आभासी सत्र में कविता काणे की कृतियों के जरिए मनाया नारीत्व का जश्न -जानिए खबर

देहरादून। सामाजिक-सांस्कृतिक कल्याण एवं लोकोपकारी कार्यों के लिए समर्पित संगठन प्रभा खेतान फाउंडेशन ने अपने प्रमुख उपक्रम एन ऑथर्स आफ्टरनून का एक आभासी सत्र आयोजित किया। यह सत्र प्रसिद्ध लेखिका कविता काणे और प्रतिष्ठित उद्यमी स्वाति गौतम के बीच हुई दिलकश बातचीत का साक्षी बना।

बता दें कि एन ऑथर्स आफ्टरनून कहानी साझा करने वाले लेखकों के साथ गंभीर बातचीत में डूबी जादुई दोपहरों की सफल श्रृंखला की मेजबानी करता आ रहा है। यह उपक्रम अपने आला दर्जे के जलसों के चलते बेहद लोकप्रिय हो चुका है। अपने पहले कार्यक्रम के साथ ही दर्शकों के बीच इसकी अवधारणा को स्वीकृति मिल गई थी तथा लेखकों के लिए यह अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व को साझा करने का एक मंच बन गया।

थिएटर, सिनेमा और कला के प्रति जुनून रखने वाली कविता एक बेस्टसेलिंग लेखिका, स्तंभकार, स्क्रीनप्ले लेखिका और मोटीवेशनल स्पीकर है, जिन्होंने देश भर के शैक्षिक एवं शोध संस्थानों, कॉर्पोरेट एवं प्रबंधन संगोष्ठियों तथा साहित्यिक समारोहों को कई बार संबोधित किया है।

साथ ही आभासी सत्र के बारे में बोलते हुए प्रभा खेतान फाउंडेशन की संचार एवं ब्रांडिंग प्रमुख सुश्री मनीषा जैन ने कहा, “प्रभा खेतान फाउंडेशन ज्ञान, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु समुदायों को साथ लाने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने उपक्रम एन ऑथर्स आफ्टरनून के माध्यम से हमने हमेशा दिलचस्प एवं मनोरंजक चर्चाओं के जरिए लेखकों और उनके साहित्यिक कार्यों के गुणगान का प्रयास किया है। भले ही हम ज्यादातर समय घरों में कैद रहते हैं, लेकिन साहित्य और किताबें ऐसी चीजें हैं जो इस मनहूस और कठिन समय के दौरान ढाढ़स व सांत्वना देती हैं। हम आशावान हैं कि अपने उपक्रम को एक आभासी मंच पर पहुंचाकर अपने दर्शकों को सारगर्भित विचार प्रदान करते हुए इन अपेक्षाकृत अंधेरे पलों को हम रोशन कर सकेंगे।”

कविता काणे छह उपन्यासों की बेस्टसेलिंग लेखिका हैं और आज उन्हें भारतीय लेखन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी शक्ति माना जाता है, इसकी मुख्य वजह यह है कि वह जहां सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहां नारीवाद लेकर आई हैंदृ और वह है पौराणिक गाथाओं का क्षेत्र। उनके सभी छह उपन्यास भारतीय पौराणिक कथाओं की अल्पज्ञात महिलाओं पर आधारित हैं –

कर्णाज वाइफ (2013), सीताज सिस्टर (2014), मेनकाज च्वाइस (2015), लंकाज प्रिंसेस (2016), द फिशरक्वीन्स डायनेस्टी (2017) और उनकी नवीनतम कृति अहल्याज अवेकनिंग। यह स्वीकार करने वाली शख्सियत कि लिखने के सिवा उन्हें और कोई कौशल नहीं आता, की शब्द-यात्रा अपेक्षित रूप से एक पत्रकार के तौर पर शुरू हुई। पत्रकारिता में दो दशकों से अधिक का समय बिताने के बाद उन्होंने पूर्णकालिक लेखन में अपना करियर बनाने के लिए नौकरी छोड़ दी थी।

यह बातचीत कर्णाज वाइफ से लेकर अहल्याज अवेकनिंग तक – कविता काणे के पूरे कृतित्व पर केंद्रित रही। कविता इन सदियों पुरानी कथाओं और चरित्रों में नई जान फूंकती हैं तथा उन्हें एक नया परिप्रेक्ष्य दे देती हैं। लेखिका ने दोहराया कि इन पात्रों की रचना करने के लिए उन्हें किस चीज ने प्रेरित किया और इन कहानियों के पीछे कौन-से विचार छिपे हैं। उन्होंने अपनी सभी पुस्तकों की एक संक्षिप्त किंतु दिलचस्प यात्रा कराई और अपनी हर कहानी पर बात की। सीताज सिस्टर उपन्यास में उर्मिला की परिपक्वता दिखाने से लेकर कर्णाज वाइफ में एक हतकीर्ति नायक को सर्वश्रेष्ठ परिप्रेक्ष्य देने के लिए काल्पनिक पात्र उरुवी की रचना करने तक और मेनकाज च्वाइस में पथभ्रष्ट करने के विज्ञान से लेकर लंकाज प्रिंसेस में सूर्पणखा की असुरक्षाओं का बखान करने तक-चर्चा का पूरा वक्त इन अमर पात्रों और महाकाव्यों को एक नए दृष्टिकोण से देखने के विचारोत्तेजक मनोभावों से परिपूर्ण था।

सत्र के दौरान कविता काणे ने जोर देकर कहा- “हमारे महाकाव्यों की विभिन्न व्याख्याएं उनके गतिवाद की परिचायक हैं। इस गतिवाद ने ही उन्हें हजारों सालों का जीवन दिया है। इससे हमें अपने विचार बदलने और अलग तरीके से सोचने की स्वतंत्रता मिलती है। यद्यपि हमारी पुराण कथाओं में इन स्त्रियों को प्रायः उनका उचित दाय प्रदान नहीं किया गया, लेकिन कथा को आगे बढ़ाने में उनके महत्व से कोई इनकार नहीं कर सकता। ये पात्र अपने समय से काफी आगे थे और आज की महिलाओं के साथ भी इन चरित्रों का गहरा संबंध जुड़ता है। हालांकि अपनी पौराणिक कथाओं को सर्वोत्तम तरीके से जानने के लिए मूल कृतियों को पढ़ना ही सबसे उपयुक्त तरीका है।”

कविता काणे की रचनाओं और ‘एन ऑथर्स आफ्टरनून’ के बारे में बात करते हुए सुश्री स्वाति गौतम ने कहा, “कविता की रचनाओं में नारीत्व की धमक हमेशा उपस्थित रही है और यह चीज सभी के लिए पूर्णतया प्रेरणादायक है। उनकी औपन्यासिक कृतियों ने हमारी पुराणविद्या को बेहतर ढंग से समझने में हमारी मदद की है। एक अनूठी अवधारणा को निर्बाध रूप में भौतिक से आभासी मंच तक ले आने के लिए मैं प्रभा खेतान फाउंडेशन को भी बधाई देना चाहती हूं। ‘एन ऑथर्स आफ्टरनून’ वाकई एक सराहनीय पहल है।”

प्रभा खेतान फाउन्डेशन की जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को पहचानने और उन्हें बढ़ावा देने की परिकल्पना ने उनको देश के 30 शहरों में निष्कलुष ढंग से रचे गए साहित्यिक सत्र आयोजित करने हेतु प्रेरित किया। भारत में मिले प्रतिसाद से उत्साहित इस फाउंडेशन ने ऐसे कई सत्रों का गुलदस्ता लेकर वैश्विक रंगभूमि में भी कदम रखा है। आकांक्षी लेखन प्रतिभाओं के लिए एक मंच तैयार करने पर अपना ध्यान केंद्रित करने के बावजूद उन्होंने शब्दों की दुनिया के कुछ महान दिग्गजों की मेजबानी की है। एन ऑथर्स आफ्टरनून की साहित्यिक यात्रा 2012 की गर्मियों में शुरू हुई थी, जिसने लोगों और उनकी प्रिय साहित्यिक शैलियों का आनंद उठाते हुए अब एक लंबा सफर तय कर लिया है। साहित्य प्रेमियों द्वारा संचालित साहित्य प्रेम का उपक्रम एन ऑथर्स आफ्टरनून एक बेशकीमती तोहफा बन गया है। एन ऑथर्स आफ्टरनून के माध्यम से प्रभा खेतान फाउंडेशन जेफरी आर्चर, जोशुआ पोलक, अमीश त्रिपाठी, जावेद अख्तर, अनुजा चैहान, अश्विन सांघी, अरुणव सिन्हा जैसे अनेक प्रतिष्ठित लेखकों की मेजबानी कर चुका है।

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