अगर आप पहाड़ी है तो बताओ इस पौधे का नाम; क्किल करें और जानों इसके फायदे -जानिए खबर

  • पुदीनाः स्वाद में अब्बल ही नहीं अपितु औषधीय गुणों से परिपूर्ण बारामासी शाक ।
  • तेरा क्या जाता, पुदीना क्यूँ नहीं लगाता।
  • क्यूँ आपने भी लगाया है आसानी से लग जाने वाला पुदीना ?
  • खाली पुदीना खाता , पीता ही है कि कुछ पुदीना के बारे में जानता भी है।
  • क्यूँ आप भी जानते हैं पुदीना प्राकृतिक रूप से पानी को स्रोत से धारे तक पहूँचने के दौरान प्यूरीफाई करने वाला पादप भी है?
  • क्यूँ कोविड 19 के दृष्टिगत आप भी पीने लगे हैं पुदीना के पत्तों की हर्बल चाय?

आओ जाने क्यूँ लगायें और खायें पुदीना?

पहाडो़ में आसानी से उपलब्ध हो जाने वाला पुदीना अपने अनोखे स्वाद के लिए घर घर में जाना जाता है।

पुदीने की भीनी खुशबू और स्वाद से भला कौन परिचित नहीं होगा। चटनी हो या आम पना, रायता हो या पुलाव, हर किसी के साथ मिक्स होकर अनोखा स्वाद देने के साथ ही गर्मियों में श्वस्थ शरीर के लिए रामबाण है पुदीना।

मिनरल्स से भरपूर पुदीना विटामिन-सी तथा ए का भी अच्छा स्रोत है।

भारतीय किचन में पुदीने का इस्तेमाल कई रूपों में किया जाता है। बात ताजे दही के साथ रायता बनाने की हो या चटनी की। हर किसी को इसकी खुशबू अपनी ओर खींच लाती है।

ताजा या सूखा दोनों तरह के पुदीने से बहुत तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिसमें करी, गर्म या ठंडा सूप, चटनी, सलाद, जूस आदि मुख्य है। थाई व्यंजनों में भी पुुदीने का इस्तेमाल खूब होता है।

बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में तो सलाद का स्वाद बढ़ाने के लिए भी पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है। चावल या बिरयानी में भी पुदीने का इस्तेमाल किया जाता है।

पुदीने की चटनी न सिर्फ खाने का जायका बढ़ाती है बल्कि स्वास्थ्यवर्द्धक भी होती है।

आयुर्वेद में सदियों से पुदीने का इस्तेमाल औषधि के रुप में होता रहा है। सामान्य तौर पर पुदीने का उपयोग, दंत-मंजन, टूथपेस्ट, चुइंगगम्स, माउथ फ्रेशनर, कैंडीज, इन्हेलर आदि के घटक के रूप में किया जाता है।

इस पृथ्वी में पुदीना की कई प्रजातियां उपलब्ध हैं मगर वनस्पति जगत में मेंन्था स्पीकेटा के नाम से जाने जानें वाले पुदीना को ही औषधि और आहार के रूप में ज्यादा उपयोग किया जाता है। पुदीने की इसी प्रजाति को पहाड़ी पुदीना भी कहा जाता है; क्योंकि यह पहाड़ी इलाके में अधिक होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, पुदीना कफ और वात दोष को कम करता है, भूख बढ़ाता है।

पुदीना का प्रयोग मल-मूत्र संबंधित बीमारियां और शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए भी किया जाता है।

पुदीना दस्त, पेचिश, बुखार, पेट के रोग, लीवर आदि विकार को ठीक करने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है।

लेमियेसी परिवार के पुदीने को संस्कृत में पूतिहा, रोचिनी, पोदीनक; हिन्दी में पहाड़ी पुदीना, पुदीना; गुजराती में फूदीनो, तेलगू, तमिल एवं वैंगोली में पुदीना, नेपाली में बावरी, पंजाबी में पहाड़ी पोदीना मराठी में पुदिना, अंग्रेजी में गॉर्डेन मिंट, लैंब मिंट, स्पिअर मिंट, अरेबिक में फूजनज, नान्ना, फार्सियन में पूदनेह् , नागबो के नामों से जाना जाता है।

Pudeena Plant

पोदीना घर घर में लोकप्रिय होने के बाबजूद बहुत कम लोगों को ही पता है कि पुदीना ऐसी जड़ी बूटी है जो औषधि के रुप में भी काम करती है।

आओ जानकारों के अनुसार विस्तार से जानें पुदीना के औषधीय गुणों के बारे मेंः-

-पुदीना पानी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने तथा इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए रामबाण इलाज माना गया है।

-पुदीना में अलग-अलग तरह के एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो फ्री रेडिकल एक्टिविटी को रोकने में मदद करते हैं। फ्री रेडिकल एक्टिविटी आपकी इम्यूनिटी को टोल कर सकती है। पुदीने में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी भरपूर मात्रा में होते हैं और यह दर्द और बेचैनी से राहत दिलाने में भी मदद करता है। इसके साथ पुदीना ठंड और फ्लू से भी बचाता है।

-पुदीना पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करने में मदद करता है, जो भोजन के पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में मदद करता है। इसकी वजह से वजन कंट्रोल में रहता है। पुदीना मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है और यह कैलोरी में भी कम है।

-पुदीना का पानी शरीर को डिटॉक्स करने के साथ ही त्वचा में चमक भी पैदा करता है।
पुदीने के पत्ते रात भर एक गिलास पानी में भिगो कर रखने तथा सुबह उठते ही नींबू रस मिलाकर पीने से काफी लाभ मिलता है।

-पुदीना अपने वातशामक गुण के कारण बालों के रूखेपन को कम करने में सहयोग देता है । ऐसा होने से बालों की रूसी एवं उनका बेजान होकर झड़ना या टूटना कम होता है, जिससे बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगते हैं।

-कान संबंधी समस्याओं जैसे कान दर्द आदि में पुदीना के इस्तेमाल से जल्दी आराम मिलता है। कभी-कभी ठंड लगने पर या कान में पानी चले जाने पर कान में दर्द होने लगता है। ऐसे में पुदीना का रस कान में डालने से आराम मिलता है। पुदीना के पत्ते का 1-2 बूंद रस कान में डालना फाइदा पहुँचाता है।

-अक्सर पाचन शक्ति ख़राब होने के कारण सर में दर्द होता है । पुदीने की चाय ऐसे में बहुत फायदेमंद सिद्ध हो सकती है, क्योंकि यह अपने दीपन – पाचन गुण के कारण खाने को अच्छी प्रकार से हजम करने में मदद करती है, जिससे आपका पाचन तंत्र मजबूत होता है।

-मुंह के छाले की परेशानी में पुदीने के पत्ते का काढ़ा बना कर गरारा करने से मुंह के छाले की समस्या ठीक होती है।

-पुदीने के पत्तों का चूर्ण बनाकर दांत को मांजने से दांतों का दर्द कम होता है। पुदीने के औषधीय गुण दाँत दर्द को कम करने में मदद करते हैं।

-ठंड लगने पर सांस की नली अक्सर सूज जाती है, जिस कारण गले में दर्द होने लगता है। इस दर्द से आराम पाने के लिए पुदीने के पत्तों का काढ़ा बनाकर सेवन करने से सांस की नली की सूजन से आराम मिलना बतलाया गया है।

-अक्सर पेट में गड़बड़ी होने पर अपच की समस्या होती है। इसमें नींबू, पुदीना तथा अदरक के 100-100 मिली रस तथा लें। 200 ग्राम खांड़ मिला कर चांदी के बर्तन में पका काढ़ा को 20 मिली मात्रा में सेवन करनें से अपच की समस्या ठीक होने में मदद मिलती है।

-कभी-कभी दवा के इस्तेमाल के कारण, या लंबे समय से बीमार रहने के कारण भूख कम लगने लगती है। इसके लिए 6-6 ग्राम वृक्षाम्ल, पुदीना, सोंठ तथा मरिच, 50 मिली अनार का रस के साथ ही, 3 ग्राम पिप्पली, 1 ग्राम लौंग, 3 ग्राम बड़ी इलायची, 18 ग्राम सेंधा नमक और 35 ग्राम जीरा में मिश्री मिला कर बना चूर्ण 1-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से भूख ना लगने की परेशानी ठीक होने में फाइदा मिलता है।

-उल्टी को रोकने के लिए पुदीना का सेवन करना लाभ पहुंचाता है। अक्सर एसिडिटी होने पर, या दवा के साइड इफेक्ट के कारण, या फिर अन्य कारणों से भी उल्टी होने लगती है। उल्टी की परेशानी में पुदीना के पत्तों का काढ़ा बना कर 10-20 मिली मात्रा में पीने से उल्टी बन्द हो जाती है।

-सामान्य तौर पर पेट की गड़बड़ी खान-पान में बदलाव की वजह से होता है। 10-15 मिली पुदीना के काढ़े में नमक तथा मरिच मिला कर पीने से पेट का रोग ठीक होता है। कभी-कभी जंक फूड खाने या मसालेदार खाना खाने से भी बदहजमी हो जाती है और पेट में दर्द होने लगता है। पुदीना का काढ़ा या पुदीना की चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।

-पुदीना के पंचांग का काढ़ा बना कर 10-20 मिली मात्रा में सेवन करनें से अपच और दस्त की समस्या ठीक होती है।

-पुदीना अपने वात -कफ शामक गुण के कारण अस्थमा में भी लाभदायक होता है । इसकी तासीर गर्म होने के कारण फेफड़ों में जमे बलगम को पिघला कर उसे बाहर निकालने में सहायता मिलती है।

और पढ़े: दमा में कमरख से लाभ

-पेशाब करते वक्त दर्द या जलन होने पर पुदीने का सेवन करने से लाभ मिलता है। 500 मिग्रा पुदीना के पत्ते में 500 मिग्रा काली मिर्च को पीसकर मिश्री मिलाकर पुदीना की चाय की तरह पीने से मूत्र विकार ठीक होते हैं।

-पुदीना के पत्तों का काढ़ा बना कर 10-20 मिली की मात्रा रोज पीने से गठिया का दर्द कम होता है।

-श्लीपद या हाथीपांव होने पर पैर हाथी की तरह फूल जाता है, और दर्द के कारण चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। हाथीपांव के दर्द से राहत पाने के लिए ,भी पुदीना का काढ़ा बना कर 15-20 मिली की मात्रा में रोज सेवन करनें से फाइदा मिलना बतलाया गया है।

-पुदीना के पत्तों को पीसकर लेप लगाने से ना सिर्फ घाव से आने वाली दुर्गंध कम होता है, बल्कि घाव भी जल्दी भरता है। इसके अलावा पुदीना के पंचांग का काढ़ा से घाव को धोने से भी घाव जल्दी भरता है।

-रैशेज, मुंहासे या घाव होने पर त्वचा पर काले-धब्बे पड़ जाते हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए पुदीना के पत्तों को पीस कर दाग वाले जगह पर लगाने से काले धब्बे मिट जाते हैं। त्वचा संबंधी किसी भी समस्या में पुदीना का इस्तेमाल असरदार तरीके से काम करता है।

-मासिक धर्म में दर्द और ऐंठन यानि क्रैम्प का कारण बढ़ा हुआ वात दोष होता है। पुदीना में वातशामक और उष्ण गुण होने के कारण इसका सेवन है दर्द और ऐंठन में राहत पहुँचाता है।

-मौसम के बदलाव के कारण होने वाले बुखार में पुदीना के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीनें से बुखार ठीक हो जाता है। इसके अलावा पुदीने की चटनी बनाकर खिलाने से भी बुखार, और बुखार के कारण होने वाली भूख की कमी ठीक होती है। पुदीना के औषधीय गुण बुखार से जल्दी आराम दिलाने में मदद करते हैं।

-शरीर की जलन से छुटकारा पाने के लिए भी पुदीने के पत्तों का काढ़ा 15 मिली प्रति दिन पीने से जलन कम होने में लाभ मिलता है।

-अगर शरीर के किसी अंग में सूजन के कारण दर्द हो रहा है तो पुदीने का प्रयोग करने से आराम मिलता है। सूजन होने पर सूखा पुदीना के पत्ते का सिरके में पीसा लेप करने से कफ दोष के कारण होने वाली सूजन ठीक होती है।

-बिच्छु के काटने पर जो दर्द और जलन होता है, उससे राहत दिलाने में भी पुदीना मदद करता है। इसके लिए सूखा पुदीना के पत्तों को पीस कर बिच्छु के काटने वाली जगह पर लगाने से दर्द और जलन दोनों कम होती है।

आयुर्वेद में पुदीना का पत्ता और पंचांग का प्रयोग होता है। किसी भी जडी़ बूटी के अधिक सेवन से साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं, जैसे किडनी विकार, आंत विकार, सेक्स करने की इच्छा में कमी आदि।

यदि आप बतलायी गयी बातों से सहमत हैं तो श्वस्थ शरीर के लिये अवश्य करें पुदीने का सेवन।

राज की बात, पुदीना भारत में प्रायः निम्न से उच्च हिमालय तक सभी स्थानों पर प्राकृतिक रूप पर मिलने के साथ ही बाग-बगीचों तथा घरों के आसपास लगाया जाता है।

पुदीना शरीर से टॉक्सिन और फ्री रैडिकल को निकालने में भी मदद करता है। अगर आप इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं, तो यह जीवाणु और कवक को शरीर से पूरी तरह दूर करने में सहायक है।

पुदीने की हरी पत्तियों को पेपर में लपेटकर फ्रिज में कुछ दिन के लिए रखें। जब यह पूरी तरह सूख जाए, तो अलग डिब्बे में रख कर पैक करें। जब चाहे इसका इस्तेमाल चटनी या सब्जियों को गार्निश करने के लिए करें।

*साथ* *ही*
आप भी पुदीना लगायें, जूस, पुदीना पानी, इत्यादि बनाकर, श्वास्थ्य एवं आर्थिक लाभ कमायें।

हमारा प्रयास
“स्वस्थ भारत, सुन्दर भारत”

डा0 विजय कान्त पुरोहित
हैप्रेक, हे0न0ब0ग0वि0वि0

ukjosh

‘उत्तराखण्ड जोश’ एक वेब पोर्टल है जो देश-विदेश, सरकारी, अर्धसरकारी, सामाजिक गतिविधियां, स्वस्थ्य, मनोरजंन, स्पोर्टस, कहानी, कविता एवं व्यंग्य संबंधी समाचार एवं घटनाओं को सोशल मीडिया द्वारा अपने सुधीपाठकों एवं समाज तक पहुंचाता है। वहीं अपने सुधीपाठकों से यह आशा करता है कि खबरों को शेयर एवं लाइक जरूर करें। हमें आपके सहयोग की अतिआवश्यकता है। धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *