सत्त विकास हेतु जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक: प्रो. तिवारी

नैनीताल। UGC अकादामिक कालेज दि हमिटेज में बीते दिन अभियान कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ललित तिवारी ने जैव विविधता पर व्यापक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि जैव विविधता सामाजिक तथा आर्थिक तंत्र का आधार है। जिसमें तीन प्रकार की विवधिता जैनेटिक, स्पेशीफ तथा इकोस्टिम डाइबर्सिटी पायी जाती है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति में इनका वितरण व्यवस्था के क्रम में सुनिश्चित होता है तथा आज पूरे विश्व में 17 लाख 50 हजार प्रजातियां अवलोकित की जा चुकी है। अभी 5 से 15 मिलयन प्रजातियां होने का आंकलन है। प्रकृति की प्रत्येक प्रजाति महत्वपूर्ण है तथा मानव प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होने के नाते इसके संरक्षण के लिए आगे आये।

उन्होंने कहा कि जैव विविधता को बचाने के लिए गांववासी सहित क्षेत्र विशेष के नागरिकों को जैव विविधता में हिस्सेदारी दी जानी चाहिए। जिससे प्राकृतिक संरक्षण में मदद मिल सकेगी। डा. तिवारी ने कहा कि आज पौधों की 19078 प्रजातियां संकटाग्रस्त है तथा पूरे विश्व की 11 प्रतिशत आर्थिकी इस जैव विविधता पर निर्भर करती है और 5-30 प्रतिशत जी.डी.पी. भी बायोडाइबर्सिटी से संचालित होती है।

वहीं उत्तराखण्ड में 65 प्रतिशत वनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण के लिए ग्रीन बोनस दिया जाना आवश्यक है। क्योंकि हिमकुण्ड़ पर्वतों की तलहटी से निकलने वाली नदियों में 3 विलियन लोग ऊर्जा तथा भोजन का स्रोत है। हिमालय की सभी पारिस्थितक तंत्र आज संकटाग्रस्त हो चुके है ऐसे में विश्व पर्यावरण को सतत विकास हेतु जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है। इस अवसर पर डा. सुनील पंत सहित कई शिक्षक भी शामिल रहे।

Sushil Kumar Josh

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