विश्व के जैव संसाधन तथा वैश्विक जैव विविधता का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है -जानिए खबर

सतत् विकास का आधार जैव विविधता का संरक्षण

– प्रोफेसर ललित तिवारी, नैनीताल

नैनीताल। 22 मई का दिन महत्वपूर्ण है चूँकि इसी दिन अंतराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है जैव विविधता जीवन का आधार है सन् 2000 में इसे पहली बार मनाया गया तथा वर्तमान में ज्वलंत समस्या जैव विविधता एवं सतत् विकास की है। विश्व के जैव संसाधन तथा वैश्विक जैव विविधता का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है।

Lalit Tiwariज्ञातव्य हो कि पौधें, जीव जन्तु एवं सूक्ष्मजीव हमारे आवरण है। आनुवांशिक विविधता को बचाना जैविक क्रम को समझने के लिए आवश्यक है। लगभग 66 प्रतिशत समुद्री जीव मानव की कार्यप्रणाली से विचलित हुए है। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट कहती है कि 3 बिलियन लोग समुद्री तटो तथा तटीय व्यवस्था के अन्र्तगत जैव विविधता पर निर्भर है। इसी तरह हिन्दु कुश पर्वत तथा गंगा नदी के किनारे तीन बिलियन लोगों का जीवन आधारित है। सबको जीने का अधिकार है।

विश्व में जैव विविधता के अन्र्तगत लगभग 17 लाख 50 हजार प्रजातियाँ ज्ञात है। किन्तु यह जैव विविधता विश्व के देशो की 11 प्रतिशत आर्थिकी का निर्माण करती है तथा 5-30 प्रतिशत जी0डी0पी0 भी जैव विविधता पर आधारित होता है।

आज जब पूरा विश्व कोरोना से प्रभावित है तो मानव को पुनः विचार करना होगा कि इस तरह के रोगों से बचाव हेतु प्रकृति तथा जैव विविधता को बचाना होगा। हमारा पर्यावरण, स्वास्थ्य, क्रियात्मकता तथा विभिन्न प्रजातियाँ एवं पारिस्थितिक तंत्र एक दूसरे पर निर्भर करते है।

जैव विविधता के लिए आवासीय क्षरण तथा जलवायु परिवर्तन बड़ा खतरा है। पोलर बीयर की जनसंख्या इन तीस वर्षों में 22 प्रतिशत कम हो गयी है। 74 मेढकों की प्रजाति विलुप्ति की कगार पर हैं वही पेग्विन की संख्या की तेजी से घटी है। हमार समाधान प्रकृति ही है और उसकी जैव विविधता।

वर्गीकरण शास्त्री डा0 जी0सी0 जोशी बताते है कि हिमालयी क्षेत्र में अतीस, अतिबिसा, कुटकी, जटामासी, सालमपंजा, सामल मिश्री, काकोली, शीर काकोली, मैदा, महा मैदा, ऋषभक, जीवक, विलुप्ति की ओर अग्रसित है। थियोफ्रेस्टस ने पादप जगत की शुरूआत की तो अरस्तु ने जीव जन्तुओं की तथा उनकी विविधता को पहचाना। 1753 में काॅल वान लिनियस ने वर्गीकरण तथा नामकरण की पद्वति विकसित कर पूरे विश्व का तोहफा दिया कि जैव विविधता महत्वपूर्ण है।

वर्तमान में जैव विविधता कृषि, मरूस्थल, मृदा क्षरण, जल, स्वच्छता, स्वास्थ्य, सतत् विकास, ज्ञान बाटना तथा अपनी हिस्सेदारी जैसे विषयों के साथ प्रमुखता से सम्बद्व है। जलवायु परिवर्तन का कारण आपदा न्यूनीकरण में मदद्, समुद्र, एवं जंगल भी जैव विविधता से सम्बन्धित है। भविष्य हेत सतत् विकास का होना तथा जीवन के आधार के लिए सबको जीने का अधिकार देना होगा।

हिमालयी क्षेत्रों के स्वर्गीय प्रोफेसर यशपाल सिंह पागंती, प्रोफेसर आर0 डी0 गौड़, प्रोफेसर गोपाल सिंह रावत, डा0 शेर सिंह सामंत, डा0 रनबीर सिंह रावल, डा0 गिरीश चन्द्र जोशी, प्रोफेसर पी0सी0 पाण्डे, प्रोफेसर एन0 के0 पुनेठा, डा, के0 चन्द्रशेखर, डा0 जीवन सिंह जलाल सहित बी0एस0आई0 एवं एन0बी0आर0आई के वैज्ञानिकों द्वारा पादप जैव विविधता के संकलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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