आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देकर कोरोना वायरस के संक्रमण व अन्य व्याधियों से किया जा सकता है बचाव -जानिए खबर

देहरादून। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देकर कोरोना वायरस के संक्रमण व अन्य व्याधियों से बचाव किया जा सकता है। छात्रों की ऑनलाइन क्लासेज चल रही है, वहीं उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ नंदकिशोर दाधीच ने एक राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया।

बता दें कि डॉक्टर दाधीच ने बताया कि आयुर्वेदिक क्रिया शरीर के सिद्धांतों की उपयोगिता विषय पर जो वेबीनार आयोजित किया गया है उसमें बताया कि आज कोरोना वायरस के कहर से पूरे विश्व में संकट उपस्थित हो गया है आयुर्वेद के विशेषज्ञों की परीक्षा की घड़ी है ,आयुर्वेद के माध्यम से रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली औषधियों तथा स्वस्थ जीवन शैली के माध्यम से कोरोना जैसी महामारी से लड़ने की उपायों की आवश्यकता है।

आयुर्वेदिक क्रिया शरीर के मूलभूत सिद्धांत दोष धातु मल अग्नि को जानना आवश्यक है शरीर का संपूर्ण ज्ञान के बिना शरीर की चिकित्सा के सिद्धांतों को जानने के लिए शरीर की क्रिया को जानना आवश्यक है शरीर की क्रिया को जाने बिना चिकित्सा असंभव है चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन भी मूलतः सृष्टि क्रियात्मक प्रकृति को पुनः स्थापित करना है आयुर्वेद का सिद्धांत यह है भी कि निरंतर अभ्यास किए जाना यदि हम आयुर्वेदिक क्रिया शरीर के सिद्धांतों का निरंतर अभ्यास करते रहेंगे तो चिकित्सा करना भी सुगम होगा रोग उत्पन्न नहीं होंगे स्वस्थ बने रहेंगे और एक सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक बनने का मार्ग प्रशस्त होगा।

इस कार्यक्रम में आयुष दर्पण के फेसबुक पेज के संयोजक डॉक्टर नवीन जोशी ने मंच उपलब्ध करवाया तथा डॉक्टर नवीन जोशी अब तक ऐसे सैकड़ों कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं उनके फेसबुक पेज से अब तक भारत, नेपाल कनाडा, अमेरिका ऑस्ट्रेलिया देशों में सीधा प्रसारण किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन गुरुकुल कांगड़ी आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रोफेसर बालकृष्ण पवार ने किया।

उन्होंने बताया कि कोरोना अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बना है। कोई प्रभावी औसत नहीं है। डिस्टेंस मेंटेन करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर के और आयुर्वेद में बताए गए सिद्धांतों को अपनाकर इस गंभीर बीमारी से बच सकते हैं। स्वस्थ व्यक्ति के लिए आयुर्वेद के सिद्धांत दोष, धातु, मल, अग्नि को जानना आवश्यक है।

क्योंकि संपूर्ण शरीर के ज्ञान के लिए और चिकित्सा के सिद्धांतों को जानने के लिए शरीर की क्रिया को जानना आवश्यक है। बिना इसकी चिकित्सा असंभव है चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन भी मूलतः शरीर की क्रियात्मक प्रकृति को पुनर्स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि आज हमें हमारी क्षमताओं को समझने ,परखने की आवश्यकता है। और शरीर क्रिया के सिद्धांत किस प्रकार उपयोगी हो सकते हैं।

डॉ नंदकिशोर दाधीच ने बताया कि विभिन्न प्रतिभाओं का उपयोग करके एक मंच पर लाकर के आयुर्वेद के सिद्धांतों का लाभ सभी को मिले तथा सिद्धांतों का लाभ किस प्रकार से चिकित्सकों, अनुसंधान करने वाले तथा छात्रों के लिए उपयोगी सिद्ध हो सके उसके लिए यह छोटा सा प्रयास किया किया गया ।आयुर्वेद शास्त्र शताब्दियों के अनुभव ,अनुसंधान तथा परंपरा का एक विकसित विज्ञान है। विश्व की प्राचीन चिकित्सा पद्धति हैं। आज हमें आधुनिक तकनीकी के माध्यम से इसके सिद्धांतों को विश्व पटल पर स्वीकार करने की आवश्यकता है। जिससे विश्व में केवल कोरोना जैसी व्याधि से अपितु आयुर्वेद के हित आयु सुखायु ज्ञान से स्वस्थ जीवन शैली पाकर उपकृत होगा।

सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय से आयुर्वेद विश्व चिकित्सा विज्ञान में योग के बाद विश्व गुरु होने का मार्ग प्रशस्त होगा। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर अरुण राठी जो कि अकोला महाराष्ट्र से ,राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सी आर यादव, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर संगीता गहलोत प्रोफेसर कविता इंदापुर कर भारती विद्यापीठ पुणे से एसबीएस आयुर्वेदिक कॉलेज हड़पसर पुणे की डॉक्टर कल्पना सांठे जी जे पटेल आयुर्वेदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट आनंद, गुजरात की प्रोफेसर सरिता भूतड़ा, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के डॉक्टर महेंद्र प्रसाद, आयुर्वेद विश्वविद्यालय से डॉक्टर बालकृष्ण पवार, ने भी अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए।

उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे ।वैदिक काल में वनैषधिय, बौद्ध काल में रस औषधि और आधुनिक काल में औषधियों के सत्व के रूप में कितनी ही आयुर्वेदिक दवाइयों का समावेश हुआ है। चाहे सिनकोना से बना कुनैन हो या अफीम से बना हुआ मार्फिन हो। आयुर्वेद के सिद्धांत स्वस्थ वृत्त में विहित भोजन, पान, आसन नियम, आसन प्राणायाम, योग आदि अनेक कार्य हैं जो बिना किसी बाधा के समय पर किए जा सकते हैं। संयमित एवं नियमित रूप से नियमानुसार एवं व्यवस्थित रूप से आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार बताई गई जीवनशैली को अपना करके हम स्वस्थ बने रह सकते हैं।

आयुर्वेद में कहा है कि शरीर की रक्षा कीजिए क्योंकि शरीर है तो सब कुछ है संकट की इस घड़ी में सरकार के हर निर्णय का समर्थन करते हुए जो भी सरकार के द्वारा बताएंगे कठोर निर्णय लिए जाते हैं वह जनता के प्राणों की हित में हैं। सकारात्मक रहते हुए धैर्य एवं संयम से कार्य करते हुए आयुर्वेद का नियमों का पालन करेंगे तो निश्चित रूप से रोगों से हम बच सकते हैं। अंत में डॉ नंदकिशोर दाधीच ने जो इस कार्यक्रम के संयोजक भी थे सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और आयुष दर्पण फाउंडेशन में जो मंच उपलब्ध करवाया डॉक्टर नवीन जोशी ने जो कार्य किया उसके लिए भी धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

ukjosh

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