बीवी के 72 टुकड़े करने वाले पति राजेश गुलाटी को अदालत सुनायेगी सजा

देहरादून: बीवी के 72 टुकड़े करने के बाद उन्हें ठिकाने लगाने वाले हैवान पति पर अब फैसला शुक्रवार को होगा सात साल पहले अंजाम दिए गए अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में अदालत ने पति राजेश गुलाटी को दोषी करार दिया है हत्यारे राजेश गुलाटी को क्या सजा होगी इसका फैसला शुक्रवार को होगा। इस मामले में अपर जिला जज पंचम की अदालत में 18 अगस्त को अंतिम बहस पूरी हो गई थी। हत्या का आरोप अनुपमा के इंजीनियर पति राजेश गुलाटी पर है। कोर्ट ने राजेश गुलाटी को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया है।  11 दिसंबर 2010 में देहरादून में हुए अनुपमा गुलाटी हत्याकांड ने देश को झकझोर दिया था।

गौरतलब है कि राजेश ने अनुपमा से 10 फरवरी 1999 को लव मैरिज की थी। दोनों के बीच 1992 से अफेयर चल रहा था। शादी के बाद वर्ष 2000 में राजेश, अनुपमा को लेकर यूएस चला गया। वहां जून 2006 में उन्हें जुड़वा बच्चे सिद्धार्थ और सोनाक्षी हुए। वर्ष 2008 में दोनों दिल्ली आ गए। इसके बाद राजेश परिवार समेत देहरादून आ गया।

10 मार्च 2011 को कैंट पुलिस ने राजेश को हत्या का आरोपी बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोप पत्र में पुलिस ने बताया कि अक्सर अनुपमा और राजेश के बीच लड़ाई-झगड़ा और मारपीट होती थी। 17 अक्टूबर 2010 की रात भी दोनों में विवाद हुआ। मारपीट के दौरान अनुपमा के सिर बेड के कोने पर लग गया और बेहोश हो गई। राजेश ने मुंह पर तकिया रखकर अनुपमा की हत्या कर दी।

दूसरे दिन राजेश ने बाजार से डीप फ्रीजर खरीदा और लाश उसमें छुपा दी। जब खून जम गया तो राजेश ने बाजार से पत्थर काटने वाला ग्राइंडर व आरी खरीदी और उनसे लाश के टुकड़े किए। लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसने कुछ टुकड़े पॉलीथिन में रख कर मसूरी मार्ग में पहाड़ी से नीचे फेंके।

कोर्ट ने हत्या और सबूत मिटाने का दोषी करार दिया

दिल दहला देने वाली यह घटना कैंट कोतवाली क्षेत्र के प्रकाशनगर में 11 दिसंबर 2010 को सामने आई थी। सॉफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी पुत्र सतनाम गुलाटी मूल निवासी 141/1 फस्र्ट फ्लोर सत्य निकेतन नई दिल्ली यहां एक मकान में पत्नी अनुपमा और दो बच्चों के साथ रहता था। 17 अक्टूबर 2010 को अनुपमा अचानक लापता हो गई।

बच्चे जब भी राजेश से मां के बारे में पूछते तो वह कहता कि उनकी मां नाना-नानी के घर गई हुई है। करीब दो माह तक ऐसे ही चलता रहा। इस दरमियान मायके पक्ष के लोगों का अनुपमा से संपर्क नहीं हुआ तो 11 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई राजेश के प्रकाशनगर स्थित आवास पर पहुंचा, मगर उसे घर में नहीं घुसने दिया गया। यह सूचना उसने पुलिस को दी। पुलिस ने घर की तलाशी ली तो एक कमरे में रखे डीप फ्रीजर से अनुपमा गुलाटी के लाश के टुकड़े मिले।

चार माह की विवेचना के बाद 10 मार्च 2011 को कैंट पुलिस ने राजेश को हत्या का आरोपी बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोप पत्र में पुलिस ने बताया कि अनुपमा और राजेश में अक्सर झगड़ा होता था। 17 अक्टूबर 2010 की रात भी दोनों में मारपीट हुई। इस दौरान अनुपमा के सिर पर बेड का कोना लग गया और वह बेहोश हो गई। इसके बाद राजेश ने मुंह पर तकिया रखकर उसकी हत्या कर दी।

अगले दिन राजेश ने बाजार से 20 हजार रुपये में डीप फ्रीजर खरीदा और लाश उसमें छुपा दी। जब खून जम गया तो राजेश ने बाजार से पत्थर काटने वाला ग्राइंडर व आरी खरीदी और उनसे लाश के टुकड़े किए। लाश को ठिकाने लगाने के लिए उसने तीन बार में कुछ टुकड़े पॉलीथिन में करके मसूरी में पहाड़ी से नीचे फेंके। वह धीरे-धीरे यह कार्य कर रहा था ताकि किसी को शक न हो, मगर इसी बीच उसका भेद खुद गया।

Sushil Kumar Josh

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