डांस थिरेपी से किसी गंभीर बीमारी का भी इलाज संभव -जानिए खबर

नई दिल्ली। नृत्य-संगीत के जरिये किसी गंभीर बीमारी का भी इलाज संभव है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक आज के समय में डांस थिरेपी से गंभीर से गंभीर इलाज न केवल कारगर हो रहा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बना चुका है। बता दें कि डांस थिरेपी से दिल को सुकून देने वाला संगीत गंभीर से गंभीर बीमारी में इलाज का भी विकल्प हो सकता है, यह सुनने में अजीब जरूर लगे, लेकिन यह सच है। आम जन मानस में कई दशकों बाद भी यह धारणा अभी तक नहीं बन पाई है।

सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञों की मानें तो डांस थिरेपी के जरिये बिना किसी साइड इफेक्ट के न केवल किसी की बीमारी ठीक हो सकती है, बल्कि उसकी पूरी जिंदगी में 360 डिग्री तक बदलाव आ सकता है। डांस थिरेपी के जरिये इलाज की यह विधा भारत में तेजी से विस्तार पा रही है, खासकर अवसाद, तनाव, बीपी और शुगर में यह बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

अगर आप नियमित रूप से 20 मिनट डांस करें तो कई बीमारियों को अपने से दूर भगा सकते हैं। दरअसल, डांस थिरेपी इलाज की वह विधा है, जिसमें बीमार शख्स को मानसिक स्तर पर मजबूत करके उनकी भावना के जरिए पूरे व्यक्तित्व को मजबूत किया जाता है। कुछ ही समय के अभ्यास के बाद मरीज अपनी मानसिक शक्ति के जरिये शारीरिक बीमारियों पर नियंत्रण किया जाता है।

बता दें कि इस विधा में शरीर और मन पर संगीत की लय पर तालमेल बिठाया जाता है। इसमें योग भी अहम भूमिका निभाता है। डांस थिरेपी कोई नई विधा नहीं है, लेकिन इसका विधिवत प्रचार-प्रसार नहीं होने के चलते यह आम जनमानस से दूर है। इसमे कोई दो राय नहीं है कि आधुनिक अमेरिकी डांसर मेरियन चेस अपने उत्कृष्ठ उपलब्धियों के जरिये 1940 में इसे थेरेपी के रूप में मान्यता मिली।

विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान में साइलेंट किलर माना जाना वाला हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) डांस थिरेपी से कुछ ही दिन में काबू में लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए निरंतरता की जरूरत होती है। इस क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के मुताबिक, डांस थिरेपी मन और शरीर दोनों को अलग-अलग नहीं मानता है। यानी जब मन से डांस शुरू होकर शरीर में उतरता है तो वह पूरी तरह इलाज में तब्दील हो जाता है।

डांस थिरेपी से व्यक्ति का आतंरिक विकास होता है और तनाव से मुक्ति मिलती है। यही वजह है कि डांस थेरेपी मानसिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक विकास के लिए भी बहुत जरूरी है। इसे डीएमटी (डांस मूवमेंट थेरेपी) के रूप में मानसिक रोगियों के अस्पताल में 19वीं सदी में शुरू कर दिया गया था।

डांस थिरेपी का मन पर साीध प्रभाव

मन का शरीर पर सीधा प्रभाव होता है। यानी जब मन खुश है तो शरीर भी प्रसन्न रहेगा। कुल मिलाकर संगीत पहले मन को स्थिर बनाता है कि फिर वह शरीर के जरिये हर अंग पर अपना असर डालना शुरू कर देता है। यह सामान्य अवसाधारणा है कि डांस करने से शरीर में ऊर्जा का स्तर काफी बढ़ जाता है।

ऊर्जावान बनाता है डांस

डांसर अक्सर चुस्त-दुरुस्त रहते हैं, इसकी पीछे वजह यह है कि वह मन को शरीर से जोड़ता है। एक ही जगह कार्य करने और बैठने के चलते शरीर के ज्वाइंट में दर्द होने लगता है। डांस करने से शरीर में लचक आती है, जिससे शख्स ज्यादा बेहतर ढंग से अपने काम कर पाता है।

डांस थिरेपी डिपे्रशन का इलाज

डांस थिरेपी से डिप्रेशन का इलाज अन्य विधा की तुलना में ज्यादा कारगर रहता है। जो अकेले अकेलेपन अथवा किसी अन्य वजह से डिप्रेश में आए हों वे डांस थिरेपी की मदद से इस पर काबू पा सकते हैं। अवसाद के चलते परेशान लोग इसे अपनाएं तो तनाव तो कोसों दूर होगा ही, साथ ही खोया आत्मविश्वास में लौट आएगा।

मोटापे से भी मिल सकती है निजात

डांस थिरेपी से वर्तमान में लोगों की सबसे बड़ी समस्या बने मोटापे पर कारगर साबित हो रहा है। अमूमन मोटापे को दूर करने के लिए एक्सरसाइट, योग अथवा दौड़ शुरुआत में तो ठीक लगता है, लेकिन कुछ समय बाद ही इसमें बोझिलता आ जाती है और धीरे-धीरे लोग इससे पीछा छुड़ा लेते हैं। वहीं, वजन घटाने के लिए फ्रीस्टाइल डांस सबसे अच्छा विकल्प साबित हो रहा है। इस डांस से ना केवल मोटापा घटता है बल्कि शरीर में भी लचक आती है।

डांस थिरेपी के फायदे

  • मांसपेशियों मजबूत बनाता है।
  • सांस संबंध समस्याएं खत्म हो जाती हैं
  • तनाव दूर रहता है
  • उच्च रक्तचाप काबू में रहता है
  • शुगर भी ठीक रहता है
  • शरीर में वसा कम होती है और वजन नियंत्रण में सुधार

अफ्रीका की डांस थेरेपिस्ट अननगा मंजरी गोनजालिज के मुताबिक, मानसिक तनाव को कम करने का सबसे बेहतर उपाय डांस है। वह पिछले कई वर्षों से डांस के माध्यम से तनाव को दूर करने के लिए काम कर रही हैं। अननगा के मुताबिक, डांस थिरेपी तनाव को दूर करने की पुरानी पद्धति है। यह बहुत ही कारगर है। थिरेपी के द्वारा व्यक्तित्व में निखार आता है।

थकान दूर करने का जरिया

एक आईटी कंपनी कर्मी सौरभ व अपूर्वा के मुताबिक वे घंटों से लगातार किसी प्रोजेक्ट में लगे हुए थे अचानक सबकुछ समझ में आना बंद हो गया वे थक कर बैठ गए। समाधान नहीं मिला तो फिर से समस्या का हल ढूढने में लग गए लेकिन घंटों की जद्दोजहद के बाद भी उन्हें कुछ समझ में नहीं आया। अचानक एक घोषणा की आवाज सुनी जिसमें उस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले सभी लोगों को सेमिनार हॉल में इकट्ठा होने को कहा गया। यह दोनो भी पहुंचे और अचानक म्यूजिक चला दिया गया तथा सभी को उसपर थिरकने को कहा गया।

एक प्रशिक्षक ने उन्हें अपने इशारों पर नचाया तो करीब 20 मिनट बाद सभी के चेहरे खिले हुए थे। आशीष और सीमा फिर से अपनी समस्या का हल खोजने में जुट गए और अचानक उन्हें हल मिल गया। आश्चर्य की बात है लेकिन सच है। उनके मुताबिक उन्हें इस 15 से बीस मिनट के सत्र में दिन भर की थकान दूर हो जाती है।

Sushil Kumar Josh

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