गांवों का अस्तित्व खतरे में, ग्रामीणों के प्रति त्रिवेंद्र सरकार का तानाशाही रवैया

देहरादून। भाजपा शासित उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने सकड़ों ग्रामीणों के विरोध के बावजूद तानाशाही रवैया अपनाकर राज्य के गांव को नगर निगम में सम्मलित कर लिया। बावजूद ग्रामीणों द्वारा कानून की सहायता से अपने गांव के अस्तिव्त को बचाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो इस मामले में आपप्तियां मांगी गई। जिसके लिए ग्रामवासियों ने अपने गांव के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए आपप्तियां दर्ज कराई।

बता दें कि ‘पंचायती राज दिवस’ के अवसर पर मंडला में माननीय प्रधानमंत्री जी को बोलते हुए सुना कि ग्रामीणों को यदि अपने खेत में यूरिया भी डालना हो तो उसके लिए बैठक की जानी चाहिए। सबकी सलाह से यह काम होना चाहिए। वहीं दूसरी और भाजपा शासित उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने सैकड़ो ग्रामीणों के विरोध के बावजूद तानाशाही रवैया अपनाकर राज्य के गांव को नगर निगम में सम्मलित कर लिया। ग्रामीणों द्वारा कानून की सहायता से अपने गांव के अस्तित्व को बचाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो इस मामले में आपप्तियाँ मांगी गई, जिसके लिए ग्रामवासियों ने अपने गांव के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए आपप्तियाँ दर्ज कराई।

मामले में डीएम के समक्ष सुनवाई भी हुई, चर्चा हुई परन्तु सब कुछ अभी तक शून्य नजर आता है। इसे देश की विडंबना ही कहा जाएगा कि आज सरकार की तानाशाही इतनी चरम पर हो गई है कि जिन गांव की संस्कृति से भारत की पहचान है उन्हीं गांव की अनदेखी की जा रही है, उनका अस्तित्व ही खत्म किया जा रहा है।

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