‘विविधता हमारी पहचान हमारी धरोहर’ थीम पर धारचूला में तीन दिवसीय ‘विविधता मेला’ का आयोजन शुरु

नैनीताल। पवित्र कैलास भू-क्षेत्र के संरक्षण एवं विकास पहल हेतु भारत एवं मित्र राष्ट्र नेपाल के मध्य धारचूला में तीन दिवसीय ‘विविधता मेला’ का आयोजन गोविन्द बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के समन्वयन से 19 से 21 दिसम्बर 2018 को आयोजित हुआ।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ‘‘विविधता हमारी पहचान हमारी धरोहर’’ के अन्तर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। कार्यक्रम के अन्र्तगत जिला पिथौरागढ़ के 10 विद्यालयों से आये हुए 52 विद्यार्थी एवं अध्यापक तथा नेपाल-धारचूला से प्रतिभाग कर रहे 21 विद्यार्थी एवं अध्यापकों को इस तीन दिवसीय मेले के अन्तर्गत जैव-विविधता संरक्षण पर विभिन्न वनस्पतियों एवं जीव-जन्तुओं विविधता पर स्थानीय गायों के भ्रमण एवं कई संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसके अलावा चैदास घाटी एवं धारचूला-नेपाल के लगभग 70 कृषकों को जड़ी-बूटी कृषिकरण एवं इनके विपणन पर एक कार्यशाला के माध्यम से विचार-विमर्श किया जा रहा है साथ ही इस मेले के अन्तर्गत चिया संस्था नैनीताल द्वारा क्रीड़ा जड़ी के वैज्ञानिक विदोहन की कार्यविधि को वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभागियों के समक्ष रखा जायेगा।

चिया नैनीताल द्वारा आयोजित एक अन्य कार्यशाला में कैलाश पवित्र भू-क्षेत्र के अन्तर्गत इको-पर्यटन के सफल माॅडलों पर चर्चा की जायेगी जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा 20 इको-पर्यटन से जुड़ने वाले स्थानीय नागरिकों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस मेले के दौरान वन्य जीव संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों द्वारा अस्कोट वन्य जीव बिहार एवं नेपाल के अपि नम्या वन्य जीव क्षेत्र में संरक्षण उपायों पर एक कार्यशाला आयोजन किया जायेगा।

Dharchula Fair

जिसमें मुख्यतः इन वन्य जीव क्षेत्रों के ग्रामीण, जन प्रतिनिधि एवं वन विभाग के कर्मचारी भाग ले रहे है। इस अवसर पर एक अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रम उत्तराखण्ड सूदूर संवेदन केन्द्र, देहरादून द्वारा पंचायती राज प्रतिनिधियों के सशक्तीकरण पर आधारित ग्राम प्रधानों, ब्लाॅक स्तर अधिकारियों के लगभग 600 प्रतिभागियों को प्राकृतिक संसाधनों के मानचित्रीकरण पर एक कार्यशाला आयोजित की गई है।

इस तीन दिवसीय विविधता मेले के संयोजक एवं पर्यावरण संस्थान, कोसी अल्मोड़ा के वैज्ञानिक डा. गिरीश नेगी ने बताया कि इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ग्रामीणों, वन एवं अन्य विभागों के प्रशिक्षणार्थियों एवं भारत व नेपाल की महत्वपूर्ण संस्थाओं जैसे वन्य जीव संस्थान देहरादून, उत्तराखण्उ सूदूर संवेदन केन्द्र देहरादून, मध्य हिमालय पर्यावरण संगठन चिया, नैनीताल, उत्तराखण्ड जैव विविधता बोर्ड देहरादून गढ़वाल, विश्वविद्यालय श्रीनगर, ह्यूमन इंडिया, श्रीनगर, औषधीय पादप केन्द्र, देहरादून, जड़ी-बूटी शोध संस्थान, गोपेश्वर, भरसार, विश्वविद्यालय रानीचोरी के विषय विशेषज्ञों में पर्यावरण संस्थान के निदेशक डा. रणवीर रावल, उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र के निदेशक डा. एम.पी. बिष्ट, वन्य जीव संस्थान देहरादून के डीन डा. गोपाल रावत, आईसीआई ग्रेड, काठमांडू के श्री स्वणनिल चैधरी, डा. जनिता गुरुंग, डा. आर.पी. काला, डा. भूपेन्द्र अधिकारी, डा. गजेन्द्र रावत, डा. आई.डी. भट्ट, धारचूला के खंड शिक्षा अधिकारी श्री आर्या, रामनगर के प्रकृति प्रेमी श्री बची बिष्ट व राजेश, डा. सुबोध ऐरी, सहायक वन्य जीव संरक्षक श्री राजू धिमेरे एवं 10 प्रतिभागियों

ललित तिवारी, नैनीताल

Sushil Kumar Josh

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