उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक, सजीव प्राणी के दायरे में नहीं गंगा-यमुना

गंगा-यमुना को सजीव का दर्जा देने के लिए उत्तराखण्ड हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के आदश पर गंगा और यमुना नदी को न्यायिक व्यक्तित्व का दर्जा देने के लिए रोक लगा दी है।

गौतरलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट की एक बेंच के जज जस्टिस राजीव शर्मा, और आलोक सिंह ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि पवित्र नदियों गंगा और यमुना को सजीव मानव का दर्जा देने की घोषणा की जाती है। अदालत ने तर्क दिया था कि इन नदियों को जीवित इंसान का दर्जा देने के बाद गंगा की सफाई के लिए बनी एजेंसी नमामि गंगे के डायरेक्टर, मुख्य सचिव और उत्तराखंड के महाधिवक्ता इन नदियों के कानूनी मां-बाप के तौर पर काम करेंगे

इस मामले में उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के फैसले को उत्तराखण्ड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बता दें कि 20 मार्च 2017 इन दोनों नदियों को उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने सजीव मानव का दर्जा दिया था। साथ ही इन नदियों के हितों की रक्षा के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने आदेश पारित किया था।

उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में पूछा था कि क्या अगर इन नदियों में आई बाढ़ के दौरान किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो क्या प्रभावित व्यक्ति मुआवजे के लिए राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ मुकदमा कर सकते हैं, इसके अलावा याचिका में पूछा गया था कि क्या राज्य सरकार ऐसे आर्थिक नुकसान को उठाने के लिए उत्तरदायी होगी।

बता दें कि गंगा और यमुना अब सजीव प्राणी के दायरे में नहीं आएंगे क्यों कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों नदियों को न्यायिक व्यक्ति का दर्जा देने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।

Sushil Kumar Josh

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