वोटर कार्ड को आधार से लिंक करने की सरकार की बड़ी मंशा -जानिए खबर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार वोटर आईडी को आधार से लिंक करने को अनिवार्य करने जा रही है। कानून मंत्रालय ने इस बारे में चुनाव आयोग की ओर से मिले सुझाव को मान लिया है। मंत्रालय इस कानून के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर रहा है। इसे प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी के समक्ष पेश किया जाएगा। कानून मंत्रालय ने कहा कि इस प्रक्रिया में डेटा चोरी होने की संभावना को खत्‍म करने के लिए कोई रास्ता निकालना जाए।

बजट से पहले कानून के लिए नोट पेश होने की उम्मीद

अधिकारी ने कहा कि यह अभी तक कानून मंत्रालय द्वारा तय नहीं किया गया है कि वह कैबिनेट के सामने नोट कब पेश करेगा, लेकिन संकेत दिया कि इसे बजट सत्र से पहले या उसके दौरान रखा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक कानून मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ इसके लिए अनुमति दी है। कानून मंत्रालय की मंजूरी के बाद चुनाव आयोग को वोटर आईडी को आधार कार्ड से लिंक करने का कानूनी अधिकार मिल सकता है।

पिछले साल भेजा था प्रस्ताव

इस बारे में चुनाव आयोग ने पिछले साल अगस्त में सरकार के सामने प्रस्ताव रखा था। इसमें कहा गया था कि उसे लोगों से आधार लेने और वोटर आईडी में उसका इस्तेमाल करने का अधिकार देने के लिए रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपुल्स एक्ट 1950 में बदलाव किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा जाएगा, जहां पास होने पर कानून में बदलाव की तैयारी की जाएगी। संसद के दोनों सदनों से कानून पारित होने के बाद चुनाव आयोग प्रक्रिया शुरू करेगा। जिन लोगों के वोटर आईडी बने हुए हैं, उन्हें आधार से लिंक करने के लिए प्रक्रिया बताई जाएगी। नए नाम जोड़ने के लिए आधार मांगा जाएगा।

फर्जी वोटर्स पर लगेगी लगाम

चुनाव आयोग का कहना है कि इससे फर्जी मतदाताओं को आइडेंटिफाई करने में मदद मिलेगी। संशोधन में यह भी कहा गया है कि आधार नंबर नहीं देने की स्थिति में किसी का नाम न तो मतदाता सूची से हटाया जाएगा और न ही उन्हें इनरॉलमेंट देने से रोका जाएगा।

2019 के आंकड़ों के अनुसार देश में 90 करोड़ वोटर

लोकसभा चुनाव 2019 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 90 करोड़ वोटर हैं। देश में रहने वाले 125 करोड़ नागरिकों के आधार कार्ड बनाए गए हैं। देश में आधार प्रोजेक्ट को 2010 में लागू किया गया था।

पैन नंबर को आधार से लिंक कराना अनिवार्य नहीं है

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक आधार से लिंक न कराने पर भी पैन कार्ड रद्द (इनऑपरेटिव) नहीं किया जा सकेगा। आयकर विभाग ने पैन को आधार से जोड़ने की समय सीमा 31 मार्च 2020 तय की है। इस तारीख तक किसी व्यक्ति का पैन कार्ड आधार से लिंक नहीं किए जाने पर उसका पैन नंबर इनऑपरेटिव हो जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि आधार एक्ट की वैधता फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में पैन और आधार को लिंक करने पर कोई फैसला नहीं किया जा सकता है।

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