आधी लड़ाई जीती है, आधी अभी बाकी हैः गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान -जानिए खबर

गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान का निर्णय, गैरसैंण पूर्ण एवम् स्थाई राजधानी बनने तक जंग रहेगी जारी
’उत्तराखंड बजट 2020-2021 की करी गहन समीक्षा’

-मनोज ध्यानी

देहरादून। गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान का धरना ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बावजूद पूर्वज जारी रहा गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान के अभियान करीमी आज भी धरना पर बैठे रहे धरना के 536वें दिवस में गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने एक बयान जारी कर कहा है कि जब तक गैरसैंण प्रदेश की स्थाई व पूर्णकालिक राजधानी नहीं बनती है, तब तक आंदोलन को कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

बता दें कि गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने कहा है कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का घोषित किया जाना हमारे द्वारा प्रारंभ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है परंतु यह पूर्ण मंजिल की प्राप्ति नहीं है। हमने आधी लड़ाई अभी जीती है और आधी अभी बाकी हैद्य गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने इस बात पर जोर दिया है कि जो राजनीतिक शुरुआत ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने से प्रारंभ हुई है, यह स्थाई और पूर्णकालिक राजधानी बनने पर मुकाम पर जरूर पहुंचेगीद्य गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने राजधानी आंदोलन को तेज करने के लिए नई रणनीति विकसित करने के संकेत भी दिए हैं।

साथ में वर्तमान सरकार से कहा है कि वह यह सुनिश्चित करवाएं कि संपूर्ण ग्रीष्मकालीन सत्र में सभी मंत्री, विधायक, सचिव और सरकारी अमला केवल गैरसैंण राजधानी से कार्य संपादित करना प्रारम्भ करेय अन्यथा मुख्यमंत्री की घोषणा कोरी घोषणा और प्रदेश की जनता को भ्रमित कराने वाला करार दिया जाएगाद्य अपनी ओर से गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान, गैरसैंण से व्यवस्था संचालित करने के लिए आवश्यक जनदबाव बनाने के लिए कदम विकसित करेगा।

उत्तराखंड बजट 2020-2021 के प्रस्तावों पर रखा गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने अपना रुख-

गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने आज के जारी वक्तव्य के द्वारा उत्तराखंड में पेश किए गए बजट 2020-2021 पर भी अपनी टिप्पणियां प्रदान की हैद्य उत्तराखंड में पंजीकृत बेरोजगारों की 7.69 लाख की संख्या पहुंचने को एक भयावह स्वरूप प्रदान कर रही कहा है। इसके विपरीत रोजगार सृजन के नए तरीकों पर सरकार का कोई विजन-पत्र सामने नहीं आ रहा है, यह एक बड़ी चिंता का विषय बताया है। बजट पर विमर्श करते हुए गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने कहा है कि पर्यटन के विकास के बजाय सरकार का ध्यान तीर्थाटन पर ज्यादा केंद्रित हो रहा है जिससे पर्यटन क्षेत्र का विकास संकुचित हो रहा है, और भारी संभावना समेटे हुआ पर्यटन क्षेत्र उपेक्षित बना हुआ है।

गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने स्वामी विवेकानंद का जिक्र करते हुए कहा है कि सरकार को उनकी इस सीख से सबक लेना चाहिए कि बच्चों और युवाओं को खेल की ओर आकृष्ट किया जाना चाहिए एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि मानव संसाधन का चहुंमुखी विकास हो य परंतु खेल एवं युवा कल्याण के लिए मात्र ₹239 करोड रूपया आवंटित करना एक बड़ी भूल को प्रदर्शित कर रहा है। गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने सरकार के द्वारा प्रत्येक जिले में एक मॉडल पीजी कॉलेज खोलने का निर्णय को स्वागत जन्य बताया है, और कहा है कि स्कूली शिक्षा को बुनियादी रूप में विकसित करने के लिए सरकार को बड़े कदम उठाने चाहिए थे।

जोकि बजट 2020-2021 में कहीं भी दिख नहीं रहा है, एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रगति योजना बनाई जा रही है वह तब तक फलीभूत नहीं होगी जब तक बुनियादी शिक्षा का ढांचा मजबूत नहीं होगाद्य परंतु गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने उत्तराखंड में परिवहन के प्रति सरकार की चिंताओं पर संतोष प्रकट किया है, और उम्मीद की है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों एवं मैदानी क्षेत्रों में सरकारी परिवहन ढांचे को मजबूत बनाया जाएगा।

राज्य की घटती विकास दर पर सरकार से अविलंब समाधान निकालने की मांग भी गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने की है। गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान ने आंगनवाडी कार्यकत्रियों, भोजन माताओं व दाई माता आदि के हित में कोई योजना व घोषणा न होने को निराशाजनक बताया हैद्य गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान ने इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट करना बेहतर समझा है कि कोरोना वायरस जैसी किसी भयावह बीमारी से निपटने की तैयारी की योजना की घोषणा उत्तराखंड के बजट में नजर नहीं आई है।

आज ’536वाँ दिवस’ पर धरना देने वालों में लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, मनोज ध्यानी, रविंद्र कुमार प्रधान, विजय सिंह रावत, वीरेंद्र सिंह रावत, राजेंद्र सिंह, सोहन सिंह रावत, राकेश चंद्र सती, प्रवीण गुसाईं, सुशील विरमानी सुरेश कुमार, विपुल नौटियाल, यशवीर आर्य, चंडी थपलियाल, जय नारायण, भगवान जयकृत नेगी, जीतमणि पैन्यूली, शीशपाल सिंह बिष्ट, हरेंद्र सिंह नेगी, किरण किशोर आदि उपस्थित रहे।

ukjosh

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