सर्वशक्तिमान परमात्मा से नाता जोड़कर ही स्थापित हो सकती है मानव एकता: ललित मोहन भट्ट

सभी के जीवन में एकता और मिलवर्तन आए

देहरादून। परमपिता-परमात्मा की जानकारी सद्गुरु की कृपा से होती है यह जानकारी ही परमज्ञान है। उक्त उद्गार संत निरंकारी सत्संग भवन, रेस्टकैम्प, देहरादून में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ज्ञान प्रचारक श्री ललित मोहन भट्ट ने सद्गुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज का पावन सन्देश को देते हुए व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि ‘गुरु का वचन ही ज्ञान है और निरंकार इस ज्ञान से प्राप्त होता है। जब तक ज्ञान नहीं होता। वस्तु अगर हमारे पास हो, तब भी हम उसका लाभ नहीं उठा सकते। हमारे घर में दबी हुई दौलत हमारी कंगाली दूर नहीं कर सकती। जब वह प्रकट होती है, हमें प्राप्त होती है, तभी हम माालामाल होते हैं। इसी तरह से यह परमात्मा रूपी दौलत हमारे अंग-संग है, पर सद्गुरु का वचन ही इसका ज्ञान कराता है और तभी हम इसका आनन्द ले पाते है। इसी तरह जब हम परमपिता-परमात्मा का जान लेते है तो हमारी आत्मा जिसको काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, जैसे ताकतवर दुश्मनों ने घेर रखा था, सब डर कर पीछे हट जाते हैं और एक प्रभु परमात्मा से नाता जुड़ता है।

एकता और मिलवर्तन के मर्म को समझते हुये उन्होंने आगे कहा कि सभी के जीवन में एकता और मिलवर्तन आए। इस धरती को अगर हमने स्वर्ग बनाना है तो वो हम सिर्फ अपने कर्मों द्वारा ही बना सकते हैं। इस धरती पर स्वर्ग लाना है तो मिल-जुलकर रहना होगा, गिरते को उठाना होगा। अगर कोई रो रहा है तो उसके आंसू पोंछकर उसे खुशी देने होगी। मिल-जुलकर हम तभी रह पाएंगे जब हम अपने दिल विशाल बनाएंगे। सद्गुरु की कृपा से ही इस सर्वशक्तिमान परमात्मा से नाता जुड़कर ही मनुष्य का हृदय विशाल बनता हैं। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों संतों, भक्तों ने अपनी-अपनी भाषा का सहारा लेकर सत्संग को निहाल किया। मंच संचालन बहन शशि बिष्ट जी ने किया।

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