सस्ती शिक्षा सभी के लिए उपलब्ध कराकर स्कूल-काॅलेजों में कुल नामांकन अनुपात में सुधार करना -जानिए खबर

देश के अगले केंद्रीय बजट से उम्मीदें – अशिम सचदेव

देहरादून। भारत में शिक्षा क्षेत्र को वैसी असंख्य चुनौतियां का सामना करना पड़ रहा है जो सर्वज्ञात है और जिनका समाधान करने की जरूरत है। उनमें से मुख्य हैं- सभी के लिए सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराकर स्कूल- काॅलेजों में कुल नामांकन अनुपात में सुधार करना, विश्व स्तर के शिक्षण और अनुसंधान विश्वविद्यालयों का निर्माण करना, उद्योग की आवश्यकता के साथ मेल नहीं खाने वाले पुराने पाठ्यक्रम में परिवर्तन करना, बेहतर रोजगार के लिए छात्रों के परिणामों और गुणवत्ता में सुधार करना, स्कूल छोड़ने की दरों को कम करना, स्कूली शिक्षा सुविधाओं में सुधार करना और स्कूल में लड़कियों के नामांकन दर में सुधार करना, सीखने के लक्ष्यों को फिर से परिभाषित करना और छात्र-छात्राओं को रटकर पढ़ाई करने से निजात दिलाना और विश्लेषणात्मक तर्क और महत्वपूर्ण सोच जैसे सफलता-उन्मुख कौशल का विकास करना, जिज्ञासा-आधारित और अनुभव आधारित शिक्षा और तकनीकी समाधान आदि को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहल को लागू करना आदि।

आर्थिक मंदी और विकास की गति बढ़ाने के लिए बुनियादी ढाँचे और कृषि क्षेत्रों में खर्च को प्राथमिकता देने के लिए फंड की उपलब्धता संबंधी बाधाओं के मद्देनजर हम शिक्षा के लिए धन के वार्षिक आवंटन में बहुत थोड़ी वृद्धि की ही उम्मीद कर सकते हैं।

इसलिए, आज वक्त की जरूरत यह है कि हम एक ऐसा सक्षम नीतिगत ढांचा की घोशणा करें जो संस्थानों को उपलब्ध धनराशि के उपयोग के संबंध में प्राथमिकता और दक्षता के साथ उपयोग को प्रोत्साहित करे। उपलब्ध धन राशि का निम्न प्रकार से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है:-

  1. सतत शिक्षण सुविधाओं की उपलब्धता के आकलन तथा सभी स्तरों पर छात्रों के लिए परिणामों में सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षा तंत्र को अपनाने के लिए फंड की उपयोगिता को प्रोत्साहित करना और उसे अनिवार्य बनाना।
  2. ‘‘शिक्षा की प्रणालियों तथा ढांचे के पुनरोद्धार (राइज) कार्यक्रम’’ के तहत वार्शिक आधार पर उपलब्ध कराए जाने वाले फंड की व्यापक दृष्यता प्रदान करना तथा पारदर्षी एवं निश्पक्ष आबंटन मानदंड बनाना।
  3. केन्द्रीयध्क्षेत्रीय खरीद समितियों के जरिए समान्य खरीद को आवश्यक बनाए जाने के बजाए राइज कार्यक्रम के तहत खरीद के लिए संभावित समाधानों के प्रति संस्थानों को लचीलेपन एवं स्वंतत्रता की अनुमति प्रदान करना।
  4. शिक्षा प्रौद्योगिकी साफ्टवेयर अनुप्रयोगों एवं समाधानों को जीएसटी से पूरी तरह से छूट प्रदान करना अथवा इन पर लगने वाली जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत करना।

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