जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों की पुनः शुरुआत के लिए भारत के MSMEs सबसे महत्वपूर्ण -जानिए खबर

– एनआरआई कन्सल्टिंग रिपोर्ट

– एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय स्थिरता, एमएसएमई संगठनों में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता, और बाजार में उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धा सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं

– विश्व स्तर पर बदलते परिदृश्य के अनुरूप एमएसएमई को पहले से बेहतर बनाने में मदद करने के लिए उन्हें समूहबद्ध करना बेहद जरूरी है

देहरादून। कोविड-19 महामारी के बड़े पैमाने पर फैलने की वजह से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में काफी बदलाव आया है। विश्व व्यापार संगठन का अनुमान है कि, कोविड-19 महामारी की वजह से वर्ष 2020 के दौरान पूरी दुनिया में व्यापारिक वस्तुओं के कारोबार में 13 प्रतिशत से 32 प्रतिशत की कमी आएगी। यह वैश्विक घटना दुनिया के सभी देशों को अपनी-अपनी स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के बारे में सोचने पर विवश कर देगी।

मौजूदा पृष्ठभूमि में, भारत पहले ही श्आत्मनिर्भर भारतश् के अपने दृष्टिकोण की घोषणा कर चुका है – जो अपने आप पर भरोसा करने वाला भारत होगा और इस दृष्टिकोण में स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाने तथा उन्हें विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए प्रोत्साहित करने पर अधिक बल दिया जाएगा।

नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमएसएमई ) कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट में इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए कहा गया है कि, इस लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, अभी भी एमएसएमई के लिए बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है ताकि यह क्षेत्र भारत के विकास का वाहक बन सके। एमएसएमई की सफलता के तीन प्रमुख मापदंड हैं- वित्तीय स्थिरता, एमएसएमई संगठनों में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता, और बाजार में उनके उत्पादों की प्रतिस्पर्धा, क्योंकि इसके बाद ही एमएसएमई के उत्पाद आयातित वस्तुओं का स्थान ले पाएंगे तथा निर्यात के लक्ष्य को हासिल करने में सफल होंगे।

इस रिपोर्ट में कुछ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है

1) आपूर्ति की क्षमता दृ उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की आपूर्ति के लिए भारतीय एमएसएमई की क्षमता को बेहतर बनाना बेहद जरूरी है, और कोविड-19 की वजह से कारोबार के संचालन के नए मानदंडों को देखते हुए यह विशेष रूप से आवश्यक है। सामाजिक दूरी के नियम का पालन करने, कम कर्मचारियों के साथ काम करने, और इसी तरह के अन्य नियमों की वजह से एमएसएमई के लिए स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी जो पहले ही नकदी की कमी का सामना कर रहे हैं। लिहाजा, उनकी आपूर्ति क्षमता को पहले की तरह बरकरार रखने के लिए उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है।

2) मांग की क्षमता – भारतीय एमएसएमई को बाजार की बदलती प्रवृत्तियों के अनुरूप बनाने की जरूरत है। हाल के दिनों की वैश्विक गतिविधियों ने पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखलाओं में योजना निर्माण भी काफी हद तक सीमित हो गया है, जिससे इस क्षेत्र के लिए खुद को मांग की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बनाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

3) क्षमता – हाल के दिनों में अपनी कार्यक्षमता तथा कच्चे माल की उपलब्धता को सुनिश्चित करना भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। विश्व स्तर पर सामानों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसने कुछ प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ दिया है।

4) लागत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा दृ कोविड-19 के व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रभाव को देखते हुए, सभी व्यवसायों को अपनी लागत में कमी लाने के लिए नए-नए तरीकों को अपनाना होगा। एमएसएमई द्वारा कम लागत वाली ऑटोमेशन तकनीकों की शुरुआत की जा सकती है, जो मानव श्रमबल के साथ मिलकर काम करते हैं तथा सामाजिक दूरी के नियम के पालन एवं गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी पूरी तरह उपयुक्त हैं।

5) ग्राहक का दृष्टिकोणदृ कुछ भारतीय उत्पादों से जुड़ी सकारात्मक धारणाओं का लाभ उठाने और नकारात्मक धारणाओं को हटाने के उद्देश्य से उनका मूल्यांकन करने के लिए ब्रांडिंग एवं पक्षसमर्थन की भी आवश्यकता होगी।

मौके पर श्री आशिम शर्मा, प्रिंसिपल एंड डिवीजन हेड- बिजनेस परफॉरमेंस इम्प्रूवमेंट (ऑटो, इंजीनियरिंग एंड लॉजिस्टिक्स), एनआरआई (नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट) कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस, ने कहा, “परंपरागत तौर पर भारतीय एमएसएमई या तो उपभोक्ताओं को सीधे बिक्री के माध्यम (बी2सी) या फिर संगठित क्षेत्र की बड़ी-बड़ी निजी कंपनियों (बी2बी) द्वारा संचालित मूल्य श्रृंखला में शामिल होकर घरेलू बाजार में ग्राहकों को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराते रहे हैं। लगातार बढ़ती खपत और बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसे कारकों की वजह से एमएसएमई के लिए अपने उत्पादों के डिजाइन में ग्राहकों की राय को शामिल करना प्रसांगिक बनता जा रहा है, ताकि वे खुद को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बना सकें।

लिहाजा, एमएसएमई के लिए ग्राहकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों को डिजाइन करना, निर्माण करना और बिक्री करना बेहद जरूरी हो जाता है। उन्हें लगातार बढ़ती मांग के माहौल से जुड़ा होना चाहिए, जहाँ बाजार उन्मुख रणनीति के माध्यम से उनकी व्यावसायिक रणनीति और प्रक्रियाएँ बाजार के बदलते हालात से जुड़े होते हैं।”

दुनिया भर में उपभोक्ताओं के व्यवहार में परिवर्तन तथा और तकनीकी बदलावों के इर्द-गिर्द विभिन्न प्रवृत्तियों की वजह से विनिर्माण क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार विकसित हो रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए एनआरआई कंसल्टिंग एंड सॉल्यूशंस ने अपने सुझावों को प्रस्तुत किया है।

निष्कर्ष के तौर पर श्री शर्मा ने कहा, “क्लस्टर दृष्टिकोण का लाभ उठाकर एमएसएमई को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। आर्थिक रूप से, किसी एक एमएसएमई के लिए सभी क्षमताओं को विकसित करना संभव नहीं है, लेकिन क्लस्टर स्तर पर संसाधनों को साझा करके और आपसी तालमेल के जरिए इसे प्राप्त किया जा सकता है। जालंधर में खेल के सामानों के लिए एमएसएमई का क्लस्टर इसका सबसे बेहतर उदाहरण होगा। निर्धारित लक्ष्य की दिशा में प्रयासों के जरिए, यह क्लस्टर नवीनतम प्रवृत्तियों और दुनिया भर में मांग की आवश्यकताओं पर नजर रखने के लिए संसाधनों को संयोजित कर सकता है, साथ ही उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव को देखते हुए बाजार उन्मुख उत्पादों का विनिर्माण कर सकता है।”

ukjosh

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