मंत्री रहने का शौक नहीं, इस्तीफा दे दूंगाः जंगल की झुलसी आग से उत्तराखण्ड सरकार में उबाल -जानिए खबर

देहरादून। जंगल की आग से ‘झुलसी उत्तराखंड सरकार की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। वहीं वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा, मुझे मंत्री रहने का कोई शौक नहीं है। पद पर रहूंगा तो काम करुंगा। नहीं पसंद तो इस्तीफा दे देता हूं।

मीडिया खबरों के मुताबिक वन मंत्री ने कहा,‘ शासन तंत्र में मंत्री, सचिव और विभागध्यक्ष के कार्य और अधिकार तय हैं। चपरासी एचओडी, सचिव और मंत्री नहीं हो सकता। कार्मिक विभाग को विदेश यात्रा की पत्रावली विभागीय मंत्री होने के नाते मेरे पास भेजनी चाहिए थी, लेकिन मुझे बाइपास किया गया। मंत्री स्तर पर कोई काम होना है तो मंत्री स्तर पर ही होना चाहिए।

उन्होंने कहा,‘ मुझे मंत्री का पद मिला है। इसलिए पद पर हूं तो काम तो करुंगा ही। जिस दिन मुझसे इनका अनुपालन नहीं हो पाएगा तो इस्तीफा दे दूंगा। मैं अपने अधिकार और कर्तव्य समझता हूं कि मुख्यमंत्री के स्तर पर कौन सा काम होना चाहिए और मेरे स्तर पर कौन सा काम होना चाहिए।

बता दें कि वन विभाग के मुखिया जय राज को विदेश यात्रा की अनुमति का मुद्दा तूल पकड़ गया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने इस मामले में उन्हें बाईपास करने पर प्रमुख सचिव कार्मिक को सख्त लहजे में पत्र तो लिखा ही, साथ ही यह कहने से भी गुरेज नहीं किया कि उन्हें मंत्री पद का कोई मोह नहीं।

अगर इसी तरह का रवैया उनके साथ जारी रहा तो वह अपनी कुर्सी छोड़़ने में भी देरी नहीं करेंगे। वन विभाग के मुखिया जय राज समेत चार वनाधिकारियों को 26 मई तक लंदन व पोलैंड दौरे के लिए केंद्र व राज्य सरकार ने अनुमति दी है। वन मंत्री का कहना है कि निचले स्तर के अधिकारियों की फाइल तो अनुमोदन के लिए उनके पास आई, मगर विभाग के मुखिया को अनुमति देने से संबंधित फाइल उन तक नहीं पहुंची।

वर्तमान में जंगलों की आग को देखते हुए विभाग प्रमुख के विदेश दौरे की अनुमति से वन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत बेहद खफा हैं। डॉ. रावत ने इस सिलसिले में प्रमुख सचिव कार्मिक को पत्र लिखकर इस परिपाटी पर गहरी नाराजगी जताई है। साथ ही दो टूक कहा है कि उनसे संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों को विदेश दौरों के संबंध में अनिवार्य रूप से उनका अनुमोदन प्राप्त किया जाए।

मीडियाकर्मियों से बातचीत में डॉ. रावत ने कहा कि वनों की आग के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील वक्त है, ऐसे में विभाग प्रमुख को विदेश दौरे की अनुमति देना गलत है। डॉ. रावत ने कहा कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि पूर्व में उनके विभागों में कार्मिकों की तैनाती से लेकर विदेश दौरों पर भेजने के संबंध में उन्हें अंधेरे में रखा गया। यह परिपाटी ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि उन्हें खुद के और अधिकारियों के अधिकारों के बारे में जानकारी है। गुड गवर्नेंस के लिए रूल्स आफ बिजनेस का उल्लंघन करना ठीक नहीं है। खफा वन मंत्री यहीं नहीं रुके और कहा कि उन्हें पद का कोई लालच नहीं है। यदि सबकुछ ऐसा ही चलता रहा तो कुर्सी छोडने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

एक सवाल पर उन्होंने कहा कि नौकरशाही मंत्रियों व विधायकों को कुछ समझ ही नहीं रही। उस पर अंकुश जरूरी है।  एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से उनकी कोई दुश्मनी थोड़े ही है। मुख्यमंत्री के पास कई विभाग हैं। रुटीन में उनके पास फाइल आई होगी तो उनके द्वारा दस्तखत कर दिए गए होंगे।

ज्ञातव्य हो कि नौकरशाही के रवैये पर कैबिनेट मंत्री डॉ.रावत पूर्व में भी नाराजगी जता चुके हैं। कार्मिक विभाग द्वारा आयुष में रजिस्ट्रार का जिम्मा एडीएम को सौंपे जाने पर उन्होंने सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा लोस चुनाव की आचार संहिता से पांच दिन पहले वन विभाग में हुए तबादलों से संबंधित पत्रावली में अनुमोदन न लिए जाने पर भी डॉ.रावत नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं।

Sushil Kumar Josh

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