मकर संक्रांति पर हरकी पैड़ी में दो दिन लगाएंगे श्रद्धालु गंगा में डुबकी,

देहरादून। इस बार मकर संक्रांति पर श्रद्धालु गंगा में दो दिन 14 व 15 जनवरी को डुबकी लगाएंगे। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य धनु राशि छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी के साथ उसकी उत्तरायण होने की गति शुरू होती है, जो शुभ काल माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी दूर करने के लिए उनके घर गए थे। इस दिन से ही वसंत ऋतु की शुरुआत भी हो जाती है।

बता दें कि ज्योतिषाचार्य के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी को शाम 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू हो रही है। इसलिए अगले दिन यह पर्व मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तिल का उबटन लगाकर स्नान करें। चावल और काली दाल की खिचड़ी, घी, गुड़, तिल, गजक का सेवन करें और अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार दान करने से पुण्य मिलता है।

वहीं आज हरिद्वार में भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर मकर सक्रांति स्नान को लेकर हरकी पैड़ी पर आस्था का रेला उमड़ पड़ा। हर की पैड़ी तथा अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्‍था की डुबकी लगाई। कुशावर्त घाट पर यज्ञोपवीत सहित कई संस्कार कराए गए। कड़ाके की ठंड और मकर संक्रांति का मंगलवार को भी होने के चलते श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।

मकर सक्रांति का पर्व मनाने के लिए देश के पर्वतीय अंचलों से खासी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के साथ-साथ राजस्थान, यूपी, पंजाब और दिल्ली से भी श्रद्धालु गंगा स्‍नान के लिए पहुंचे। हरकी पैड़ी पर सवेरे के समय चल रही शीतलहर के कारण स्नान सूर्योदय के बाद प्रारंभ हुआ।

अलबत्ता ब्रह्म मुहूर्त में भी श्रद्धालु स्नान करते हुए दिखाई दिए। पैदल यातायात प्रबंधों के चलते यात्रियों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। बाजारों में भी सामान्य भीड़ बनी रही। श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट जाकर कर्णभेदन संस्कार, मुंडन संस्कार, श्राद्ध तर्पण एवं यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराए।

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल से काफी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कर्मकांड कराने के लिए पहुंचे। यज्ञोपवीत संस्कार के समय महिलाओं ने परंरागत वेशभूषा धारण की। उत्तरायणी का पर्व मनाते हुए श्रद्धालुओं ने चावल, उड़द की दाल, मूंगफली, गूड़, तिल, तिल के लड्डू तथा मकई से बने पदार्थों का दान किया गया।

श्रद्धालुओं ने हर की पैड़ी पर भगवान सूर्य नारायण को अर्घ्य प्रदान कर उत्तरायण यात्रा यथावत संपन्न होने की कामना की। सूर्य को शिशिर ऋतु में प्रवेश करने पर ताप बढ़ाने के निमित्त कई जगह अग्नि प्रज्ज्वलित कर यज्ञों का आयोजन किया गया।

मकर सक्रांति के पर्व पर पंचपुरी में महिलाओं ने बहनों, बेटियों और पंडितों के नाम खिचड़ी भोज भेजे। इसके साथ ही अनेक प्रकार के मांगलिक पर्व धर्मनगरी में मनाए गए। सूर्यदेव की उत्तरायण यात्रा के प्रतीक रूप में गंगा के तटों पर सूर्य नमस्कार करने वालों की भीड़ सुभाषघाट, रोड़ीबेलवाला आदि पर लगी रही।

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