डोईवाला में संत निरंकारी मिशन भवन में मनाया गया ‘मानवता एकता दिवस’

नर में नाराण को देखना ही मानवता है: मोलूराम आर्य

डोईवाला। बाबा गुरुवचन सिंह जी की याद में संत निरंकारी भवन, चांदमारी डोईवाला, देहरादून के तत्त्वाधान में ‘मानवता एकता दिवस‘ के रूप में एक विशेष सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग कि अध्यक्षता करते हुए परम पूज्यनीय ज्ञान प्रचारक महात्मा मोलू राम आर्य ने कहा कि सत्गुरु दुनिया में मानवता की भलाई के लिए ही आता हैं, ‘नर में नाराण को देखना ही मानवता है’ और उनका संदेश पूरी मानवता की भलाई के लिए होता है।

उन्होंने कहा कि बाबा गुरबचन सिंह जी ने सन् 1984 को मानवता एकता की भलाई के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया था। उन्होंने आपसी भाईचारे और सहनशीलता को ही सब से उत्तम कर्म और धर्म माना। उन्होंने कहा कि ‘नर में नाराण को देखना ही मानवता है’। निरंकारी मिशन एक सर्वसांझा मंच है जहां हर धर्म के लोग एक साथ मिलकर एक निरंकार परमात्मा का यशोगान करते है जब मानव को यह प्रतीत हो जाता है कि जिस ईश्वर को अनेकों नामों से पूजा जा रहा है वह एक निरंकार पारब्रह्मम ही है तो मानव के मन से सारे भ्रम दूर हो जाते है। जब मानव परमात्मा से जुड़ता है तो उसे सारा संसार ही एक परिवार के रूप में दिखने लगता है और उसके मन में भाई चारा, मिलवर्तन की भावना खुद-ब-खुद ही पैदा हो जाती है। तब मानव जान जाता है कि सारा संसार एक ही नूर से उपजा है तो वैर विरोध की भावना खत्म हो जाती है।

सत्संग समाप्ति से पूर्व ब्रांच मुखी गोपाल सिंह गुरुंग ने कहा कि बाबा गुरबचन सिंह जी का जीवन सहजता और सरलता के साथ भरपूर था। हर किसी का दर्द बांटना, हर किसी का ध्यान रखते हुए सांझी एकता और भाईचारे को ही पहल देते थे। उन्होंने कहा कि बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने मानवता की भलाई के लिए वर्ष 1986 से निरंकारी श्रद्धालुओं को रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। हर साल अप्रैल महीने से रक्तदान कैंप की शुरूआत की जाती है। यह मुहिम तब से लेकर लगातार साल-दर-साल ‘खून नालियों में नहीं, नाड़ियों बहना चाहिए’ चलती आ रही है। इस अवसर पर सेवादल के भाई बहन एवं अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।

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