प्रकृति को मिठास का संदेश देता फलों का राजा आम -जानिए खबर

– डा0 ललित तिवारी

नैनीताल। ग्रीष्म ऋतु में फलों के राजा आम ही आम दिखायी पड़ते है। आम की दावत हो या फल का आनंद लेना हो आम का स्वाद आ ही जाता है वैसे तो मई के महिने में सफ¢दा तथा बम्बइया आम मिल जाता है किन्तु जून में कल्मी, दशहरी, लंगड़ा ओर फिर चैसा स्वाद का आनंद देते नजर आता है। फलों के राजा आम को भारत के राष्ट्रीय फल का दर्जा प्राप्त है।

हिमालय से दक्षिण कन्याकुमारी तथा गुजरात से असम तक 1200 मी0 से नीचे आम लगाया जाता है। वैसे तो आम के बाग होते है लक्खी बाग मलीहाबाद के आमों का स्वाद ही अलग है। भारत में आम का विश्व उत्पादन का 50 प्रतिशत तक होता है तथा निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत तक है। आन्ध्र प्रदेश, उत्तरप्रदेश तथा बिहार अग्रणी आम उत्पादक राज्य है। उत्तराखण्ड के तराई में भी आम के बाग है। संस्कृत में आम्र, आम्रफलाम तथा परम्परा में कलश पूजन तथा वट, पलाश, पीपल के साथ आम पूजनीय है। हवन की सम्पूर्णता इसकी लकड़ी से ही संभव होती है।

कालीदास ने आम की प्रशंसा लिखी। कालीदास ने अपनी रचना मेघदूत में इसे प्रतीक के रूप में तो आम के बौरो को मदन बाण तथा फल को प्रेम का प्रतीक कहा। चरक संहीता में इसके औषधीय गुण प्रसिद्व है।

मिर्जा गालिब का शेर ‘मिर्जा देखिये गधे भी आम नही खाते‘ गालिब ने आम खाते जवाब दिया ‘बरखुरदार गधे ही आम नही खाते‘। जुलाई माह के अन्त तक आम का फल मंदा पड़ जाता है किन्तु पहाड़ी किस्म का आम जो कम मात्रा में होता है अगस्त माह में बाजार में आता है। कोविड-19 प्रभाव ने मलिहाबादी आम के स्वाद को दूसरी जगह जाने से रोका है।

आम का वृक्ष 50 से 60 फीट ऊँचा होता है तथा इस धरती पर यह 5000 वर्ष से पाया जाता है। ह्वेनसांग ने भी इसका उल्लेख किया तथा अमेरिकी महाद्वीप में यह 18 वी शताब्दी में पहुँचा। भारत, पाकिस्तान, फिलीपिन्स, बाग्लादेश, अफ्रीका, ब्राजील, बरमूडा, वेस्टइंडीज, मैक्सिको में भी यह होता है। भारतीय उपमहाद्वीप के इस मीठे फल का आनंद ही कुछ ओर है इसकी हजारो वैराइटियाॅ बनायी गयी है किन्तु बम्बइया, तोतापरी, माल्दा, स्वर्ण रेखा, लगंड़ा, राजापुरी, अलफोन्सो, दशहरी, गुलाबीखास, आम्रपाली, चैसा, फजली, कल्मी तथा सफ¢दा सभी जानते है।

वैज्ञानिक भाषा में इसे मैगिंफैरा इण्डिका कहा जाता है तथा इसका कुल एनाकार्डेसी है। यह फल विभिन्न संस्कृतियों को एक साथ पिरोता है तथा उसकी सुगन्ध को फैलाता है। विटामीन ए, बी के साथ कब्ज, एसीडिटी कम करने वाला तथा आक्सीडेंट युक्त फल जो तुरन्त ऊर्जा एवं जायका देता है। कई बिमारियो से भी सुरक्षित रखता है। लू, पेट की बिमारी, रक्त संचार, प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाता है। आम की चटनी, फिरनी, आमरस, आमपापड़ जो बचपन को जीवतं बनाते है, आम उत्पादकता, प्रेम, खुशी, समृद्वि तथा सहजता का प्रतीक फल माना जाता है।

इसमें पुष्प फरवरी मार्च में तथा फल अप्रैल मई में आने लगते है। यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखता है तो माता लक्ष्मी का प्रिय भी माना जाता है। इसे भगवान बुद्व के साथ भी जोड़ा गया है। विटामीन ए, बी, सी, बीटा कैराटीन, जैन्थोफिल, ल्यूटिन, एल्फा कैरोटिन, पाॅली फिनोल, गैलिक एसिड, जैन्थेनाॅल पाया जाता है। इसलिए कहा गया है कि आम के आम गुठलियो के दाम। प्रकृति के इस पौधे में जीवन की मिठास मिलती है जो प्रेरित करता है कि प्रकृति को संरक्षित करने तथा सतत् विकास में हम योगदान करें।

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