मनुष्य के चरित्र की पहचान उसके कर्म से होती है व्यख्यान से नहीं: सतेंदर सिंह बिष्ट

हल्दूखत्ता (कोटद्वार)। संत निरंकारी मिशन तत्त्वाधान में आयोजित साप्ताहिक संगत में सत्संग की अध्यक्षता करते हुए ब्रांच मुखी सतेंदर सिंह बिष्ट ने कहा कि – मनुष्य की पहचान उसके चरित्र व कर्म से होती है ना कि उसके व्याख्यानों से। आध्यात्मिकता एक अनुभूति है जो सत्य का संग अर्थात सत्संग करके प्राप्त की जा सकती है।‘

‘संसार, भाषण देकर नहीं बदला जा सकता है संसार की तस्वीर हमारे कर्मों से ही बदलेगी उन्होंने कहा कि भक्ति बोलने का विषय नही है यह एक कर्म है जिसे प्रत्येक सन्त को चाहिए कि निरंकार परमात्मा के हाजिर नाजिर देखकर, परमात्मा का शुकराना करता जाए। महत्ता कर्म की है बोलों की नहीं।

इसलिये सर्वप्रथम हम स्वयं मूल्यांकन करें कि हम अपने सद्गुणों से बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं या केवल बातें करके,व्याख्यान देकर दूसरों को प्रभावित करने का प्रयत्न मात्र कर रहे हैं। दुनिया के ज्ञान इंसान को ना तो भवसागर से पार लगा सकते हैं और ना ही आत्मिक सुख की प्राप्ति करा सकते हैं इनसे क्षणिक सुख तो मिल सकता है लेकिन परम आनंद केवल सतगुरु सच्चिदानंद द्वारा ही मिलता है। इस भव्य सत्संग में सैकड़ो संगत सहित, हरि सिंह,सी पी कोटनाला,ताजवार सिंह,अनुसूया,मोहन सिंह,गीता बिष्ट,राम सिंह,जयरत्न पाल, विनोद गौड़ एवम सेवादल के भाई बहिन मौजूद थे।

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