दुख की लम्बी रात: अब नयना करते रहते आँसू की बरसात

काटे से भी नहीं कटे यह,  दुख की लम्बी रात ।

ना जाने कब हो पाएगी , प्रियतम तुमसे बात ।

इक-इक पल युग -युग से बीते , जब आते तुम याद,

अविरल नयना करते रहते , आँसू की बरसात ।

Reena Yogal Hariyana

सुख-दुख आते धूप-छाँव सम , सदा न रहता कोय।

छाया माया दोनों लगते , कहाँ ठिकाना होय ।

दुखी पुकारे कातर स्वर में , सुख।में हर्ष अपार,

सुख-दुख के पिंजरे में पंछी , सिर धुन धुन कर रोय ।

रीना गोयल ( हरियाणा)

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