ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले कार -जानिए खबर

नैनीताल। कुमाऊं विवि के वनस्पति विज्ञान के प्रो. ललित तिवारी बताते हैं कि ओजोन सूर्य से आऩे वाले खतरनाक पराबैगनी किरणों को लगभग 99 प्रतिशत शोक लेती हैं लेकिन मानव जनित कारण से इसको नुकसान पहुंच रहा है। इसमें कार्बन फ्लोटो कार्बन, आणविक विस्फोट, नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक का अधिक प्रयोग मुख्य तौर पर शामिल है।

वहीं सुपर सोनिक विमानों का संचालन के अलावा फ्रीज, कूलर व एयरकंडीशनर आदि का उपयोग भी ओजोन परत के लिए खतरा पैदा कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार 2006 तक 40 प्रतिशत ओजोन परत प्रभावित हुई थी लेकिन मोंट्रियल प्रोटोकॉल में जिसमें दुनिया के 196 देश शामिल हुए थे के तहत 2050 तक ओजोन के क्षऱण को रोकने में कामयाब रहने का संकल्प लिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने तय किया विश्व ओजोन दिवसः-संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में 23 जनवरी 1995 को पूरे विश्व के नागरिकों को जागरूक करने के लिए 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस मनाने का प्रस्ताव पास हुआ। हर बार इसके लिए एक थीम तय की जाती रही है। इस बार जीवन के लिए ओजोन रखी गई है। ओजोन दिवस पर ट्वीट व अन्य सोशल मीडिया के माध्मय से लोग अपने विचार शेयर कर रहे हैं। उनमें से एक तस्वीर आपकी नजर हैः-

विश्व ओजोन दिवस को 16 सितंबर को इसका आयोजन होता है। इस बार की थीम जीवन के लिए ओजोन ozone for life रखी गई है।

क्या है ओजोन

सूर्य जीवन का आधार है इससे निकलने वाली किरणे पृथ्वी के जीवमात्र के लिए ऊर्जा का माध्यम हैं लेकिन सूर्य से निकलने वाली किरण पराबैगनी यानि अल्ट्रावायलेट होती हैं जोकि जीव के साथ ही प्रकृति के लिए भी नुकसान देय होती हैं। लेकिन कुदरत का कमाल है कि पृथ्वी अपने सतह से निश्चित ऊंचाई पर इन सूर्य की किरणों के सीधे प्रवेश को रोक देती है।

पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किमी दूरी पर बना यही आवरण ओजोन परत कहा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार ओजोन पराबैगनी किरणों को अवशोषित करता है। एक मायने में फिल्टर का काम करता है। इसके बाद पृथ्वी तक पहुंचने वाली किरण जीवनदायनी होती हैं। दुनिया में वैज्ञानिक इस ओजोन परत पर नजर रख रहे हैं। इसकी शुरूआत करने वाले वैज्ञानिक के नाम से नेटवर्क केंद्रों का नाम डोबसन इकाई रखा गया है।

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