“फिसलती रेत हाथों से हमें संकेत देती है, वक़्त है नहीं इतना, बहुत कुछ करना है जितना” -जानिए खबर

नई दिल्ली। फिसलती रेत हाथों से हमें संकेत देती है, वक़्त है नहीं इतना, बहुत कुछ करना है जितना” कविता में कवि ने बड़े ही सहज ढंग से आम जिंदगी की बात की है। ‘कवि-आयरी – रहमत उसकी, ज़रिया अजय गोस्वामी’ एक प्रेरक अस्तित्वी कविताओं का मुहावरेदार संग्रह है जो युवा लेखक अजय गोस्वा मी द्वारा लिखी गई हैं। यह लेखक अजय गोस्वाामी की पहली पुस्तक है। इस पुस्तक में मुख्यतः जिंदगी जीने के कई आयामों को दर्शाया गया है।

इस पुस्तक की कविताओं को पढ़ने के बाद आपको लगेगा कि वो आपकी जिंदगी से ही जुड़ी हुई हैं। लेखक ने अपनी मां की याद में पुस्तक की कविताओं की शुरुआत की है। कवि ने इन कविताओं के माध्यम से अपने मन की उन भावनाओं को कहने की कोशिश की है, जिससे हर युवा अपने संघर्ष के दिनों में रू-ब-रू होता है।

“फिसलती रेत हाथों से हमें संकेत देती है, वक़्त है नहीं इतना, बहुत कुछ करना है जितना” कविता में कवि ने बड़े ही सहज ढंग से आम जिंदगी की बात की है।

एक कविता “ख़गालों खुद को तू भी एक इंसान है तराशो हुनर को वही तेरी पहचान है” कवि की भाषा अपनी सी लगती है क्योंकि वह रोजमर्रा की जिंदगी से आए हैं और समस्याएं भी आम जिंदगी की ही हैं। कई बार कविताओं में छिपा व्यंग्य गहराई तक उतर जाता है।

कवि ने हर प्रकार से युवाओं के संघर्ष की वर्तमान स्थिति का वर्णन किया है। वैसे, किताब नए युवा की नई जुबान में आपके सामने है और आप भारत के किसी भी स्था न से हो आपको कविता आपकी खुद की जिंदगी को साहस देती ही लगेगी।

किताब- Ajjay’s “कवि-आयरी” रहमत उसकी, ज़रिया Ajjay Gosswami
लेखक- अजय गोस्वामी
प्रकाशक- सेल्फ पब्लिश
मूल्य- 899 रुपये

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