दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं व बच्चों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के साथ ही उन्हें जागरूक करना अतिआवश्यक -जानिए खबर

भीमताल/नैनीताल। दूरदराज ग्रामीण इलाकों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती व आशा वहाॅ के लोगों की रहनुमा और हमदर्द के तौर पर जानी जाती है और ग्रामीण इलाकों की महिलाओं एवं बच्चों के लिए वे काफी मददगार साबित होती हैं। जहाॅ गाॅव में महिलाएं डीएम व सीएमओ जैसे अधिकारियों से अनभिज्ञ होती हैं, वहीं इन ग्रामीण स्तर की कार्यकर्तियों से बखूब परिचित होती हैं। यह बात जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों के एक दिवसीय सम्मेलन में व्यक्त की।

दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं व बच्चों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के साथ ही उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी की अभिनव पहल पर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा कन्ट्री इन भीमताल में आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों हेतु आयोजित एक दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का शुभारंभ जिलाधिकारी श्री सविन बंसल, सीडीओ विनीत कुमार ने दीप जलाकर किया। कार्यशाला में सम्बन्धित विभागों व विशेषज्ञों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना के तहत महिलाओं व किशोरियों के पोषण, लिंगानुपात, बालिकाओं की शिक्षा, टीकाकरण, पीसीपीएनडीटी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य, किशोरी बाल स्वास्थ्य, गर्भावस्था में शिशु की देखभाल आदि ज्वलन्तशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करते हुए जानकारियाॅ दी गई।

कार्यशाला में जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि विभागीय अधिकारियों व विषय विशेषज्ञों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना के तहत महिलाओं व किशोरियों के पोषण, लिंगानुपात, बालिकाओं की शिक्षा, टीकाकरण, पीसीपीएनडीटी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य, किशोरी बाल स्वास्थ्य, गर्भावस्था में शिशु की देखभाल आदि विषयों पर जो भी बताया है, उसे आंगनबाड़ी कार्यकर्तियाॅ आत्मसात करते हुए आशा, एएनएम के साथ मिलकर संवेदनशील होकर धरातलीय रूप देना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्तियाॅ हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, इन्हीं के माध्यम से हमारी स्वास्थ्य शिक्षा सेवाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुॅचती हैं। उन्होंने कार्यशाला को आंगनबाड़ी कार्निवाल बताते हुए कहा कि कार्यकर्तियाॅ कार्निवाल में संवेदनशील होकर जानकारियाॅ प्राप्त करें व प्राप्त जानकारियों से अपने-अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं, बालिकाओं एवं मातृ-शिशुओं को जागरूक कर लाभांवित करें। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्तियाॅ स्वास्थ्य जागरूकता के साथ ही पोषण व आंगनबाड़ी केन्द्रों में 0 से 6 साल तक के बच्चों को पोषण, टीकाकरण करा कर तीन स्तर पर कार्य करती हैं, जो अति आवश्यक है।

संवेदीकरण कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ डाॅ.रेणु मर्तोलिया ने बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनओं की विस्तृत जानकारी देते हुए, कन्या भ्रूण हत्या, गिरते लिंगानुपात पर चिन्ता व्यक्त करते हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं, प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना, ऊर्जा, निर्भया प्रकोष्ठ, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, सुकन्या समृद्धि योजना, जननी सुरक्षा योजना, वन स्टोप सेटर, महिला हैल्प लाईन, चाईल्ड हैल्प लाईन, पोक्सों एक्ट, बाल विवाह अधिनियम के बारे में विस्तार से बताया गया। इसी प्रकार अपर मुख्य चिकित्साधिकार डाॅ.रश्मि पन्त ने पीसीपीएनडीटी एक्ट, टीकाकरण, कुपोषण, मातृ-शिशु मृत्यु दर, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोरी स्वास्थ्य कार्यक्रम, जननी सुरक्षा आदि के बारे में विस्तार से जानकारियाॅ देते हुए कहा कि महिलाओं को शिक्षित कर, उन्हें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व भावनात्मक रूप से मजबूत करना है।

इसलिए सभी आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्तिया आपसी समन्वय स्थापित करते हुए धरातलीय स्तर पर कार्य कर लाभ पहुॅचायें। उप शिक्षा अधिकारी गीतिका जोशी ने बालिका शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बुराईयों को हटाने व अपने अधिकारों को जानने के लिए शिक्षा अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षित होगी तो परिवार के साथ ही आने वाली पीढ़ी भी शिक्षित होगी, शिक्षित नारी के पास ज्ञान के प्रकाश व अपने अधिकारों की भी आवाज होती है।

एपीडी संगीता आर्या ने महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक उनयन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनपद में एनआरएलएम के अन्तर्गत 2722 महिला समूहों का गठन किया गया है। जिनका कौशल विकास करते हुए आजीविका से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की आर्थिकीय मजबूत करने के लिए समूहों द्वारा उत्पादित सामाग्री का विपणन भी सरस मार्केट, ग्रामीण हाट बाजार के माध्यम की जा रहा है। कुमाऊॅ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर लता पाण्डे ने महिला एवं बाल पोषण पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि सही पोषण होगा तो देश मजबूत व सशक्त होगा। इसलिए महिलाओं व किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ महिला ही परिवार एवं बच्चों की सही से देखभाल कर सकती है। उन्होंने संतुलित भोजन के साथ मौसमी फल व सब्जियाॅ खाने पर बल देते हुए कहा कि कुपोषण एक ऐसा चक्र है जो कमजोर माॅ से प्रारंभ होकर उनके बच्चों तक पहुॅचता है, उस चक्र को हमें जागरूक कर ध्वस्त करना होगा। शांतिकुंज के आचार्य केपी दूबे ने कर्म एवं विचारों की शुद्धता पर बल देते हुए बाल संस्कार शाला संचालित करने को कहा, जिससे हम बच्चों को बचपन से ही अच्छा इंसान बना सकें। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक व आध्यात्मिक विकास में उत्कृष्ट पारिवारिक वातावरण, गुरूकुल शिक्षा, संस्कार व परम्परा, प्रगतिशील सामाजिक व्यवस्था के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डाॅ.अजीत तिवारी ने स्वस्थ व संतुष्ट माॅ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है। बच्चे का मानसिक व बौद्धिक विकास गर्भावस्था से ही शुरू हो जाता है, इसलिए गर्भ धारण करते ही महिला को अच्छे विचार, स्वस्थ वातारण, पोष्टि भोजन, आध्यात्मिक सतसंग, मधुर संगीत आदि का आनन्द लेना चाहिए ताकि बच्चा शारीरिक व मानसिक रूप के साथ ही बोद्धिक रूप से स्वस्थ हो।

कार्यक्रम में विगत 9 नवम्बर को सम्पन्न हुई राज्य स्थापना वर्षगाॅठ के अवसर पर जिलाधिकारी श्री सविन बंसल की पहल पर विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं का संदेश देने के लिए वाॅल पेंटिंग कर अपनी चित्रकारिता का हुनर प्रस्तुत करते हुए समूह प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले एसएसजे कैम्पस अल्मोड़ा के ग्रुप जिसमें लक्ष्य शाह, चाॅंदनी देव, तरूण कुमार, पंकज जायसवाल, दिव्या रूबाली, उत्तम सरदार को, द्वितीय पुरस्कार में कुमाऊॅ विश्वविद्यालय नैनीताल की कविता परिहार, अनिल बिष्ट, भावना आर्या, शिवानी कृष्णा तथा तृतीय स्थान पर ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ती नाजिया परवीन, शिवानी सिंह, हेमा को प्रमाणपत्र व नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया तथा 10 ग्रुपों को सात्वना पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।

व्यक्तिगत पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले एसएसजे कैम्पस अल्मोड़ा फाइन आर्ट फैसिलिटी के चन्दन आर्य, द्वितीय बागेश्व के भाष्कर भौर्याल, तृतीय बलविन्दर कौर नकद पुरस्कार व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। इसी प्रकार विद्यालयों की वाॅल पेंटिंग प्रतियोगिता में भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय नैनीताल प्रथम स्थान, मोहन लाल शाह बाल विद्या मन्दिर नैनीताल द्वितीय, जीजीआईसी नैनीताल ने तृतीय को नकद पुरस्कार व प्रमाण पत्र दिया गया। प्रथम पुरस्कार के लिए 5000 रूपये, द्वितीय स्थान के लिए 3000 रूपये, तृतीय पुरस्कार के लिए 2000 रूपये, सांत्वना पुरस्कार में 1000 रूपये की नकद धनराशि दी गयी। कार्यक्रम का संचालन एआरटीओ विमल पाण्डे द्वारा किया गया।

कार्यशाला में पुलिस अधीक्षक रचिता जुयाल, उप जिलाधिकारी विनोद कुमार, रजिस्ट्रार कुमाऊॅ विश्वविद्यालय डाॅ.महेश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ.भारती राणा, एसीएमओ डाॅ.टीके टम्टा, जिला विकास अधिकारी रमा गोस्वामी, जिला शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता, एचएल गौतम, गोपाल स्वरूप, मुख्य कृषि अधिकारी धनपत कुमार सहित अन्य अधिकारी व आंगनबाड़ी कार्यकर्तियाॅ मौजूद थी।

ukjosh

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