भक्ति भाव से युक्त उत्साहपूर्ण सेवाओं का अद्भुत नज़ारा; महाराष्ट्र के निरंकारी सन्त समागम की तैयारियाँ तेज -जानिए खबर

नासिक| महाराष्ट्र के मशहूर तीर्थ स्थलनासिक के म्हसरुल, बोरगड, मखमलाबाद, पेठ धरमपूर गुजरात हाईवे के इलाके में स्थित करीब २१२ एकड़ का विशाल ठक्कर गाउंड पर महाराष्ट्र के ५३वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम की तैयारियाँ तेज हो चुकी हैं | सेवा करते हुए निरंकारी भक्तों के चेहरों पर छलक रहा भक्ति भाव, उत्साह एवं लगन ईश्वर के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा एवं विश्वास का अद्भुत नज़ारा प्रस्तुत कर रहे हैं |

ज्ञात हो कि इन स्वेच्छा सेवाओं का विधिवत उद्घाटन २२ दिसंबर, २०१९ को हुआ था और उसके बाद निरंतर समागम के तैयारियाँ जारी है | नाशिक के अलावा आस पास के जिलें एवं मुंबई तथा महाराष्ट्र के अन्य इलाकों से हजारों की संख्या में निरंकारी श्रद्धालु भक्त अपनी निष्काम सेवायें अर्पन कर रहे हैं |

यह सन्त समागम २४, २५ एवं २६ जनवरी, २०२० कोनिरंकारीसद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन सान्निध्य में होने जा रहा है जिसमें सत्य, प्रेम, भाईचारा एवं एकत्व का सन्देश जनसाधारण तक पहुँचाया जायेगा | संत निरंकारी मिशन की स्थापना वर्ष १९२९ में पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुई थी | आध्यात्मिक जागरुकता द्वारा संसार में अमन, शान्ति, मानवता एवं विश्वबंधुत्व का संदेश फैलाने वाले इस मिशन को ९० वर्ष पूरे हो चुके है | अत: इस सन्त समागम का मुख्य विषय ‘सन्त निरंकारी मिशन के ९० वर्ष’ रखा गया है |

समागम के तैयारियों की गतिविधियाँ समागम के लिए बनाई गई समागम कमेटी के मार्गदर्शन एवं देखरेख में हो रही हैं | सेवा करने के लिए मैदान पर आने वालेनिरंकारी सेवादल के स्वयंसेवक एवं अन्य श्रद्धालु भक्तों को निश्चित रुप की सेवाओं मे लगाते हुए उनकी सेवाओं का सदुपयोग किया जाता है | इन सेवादारों में हर किस्म के लोग शामिल हैं |

कोई कडिया है तो कोई सुतार है, कोई पेन्टर है तो कोई वायरमन है | सब मिल जुल कर ताल मेल के साथ अपनी अपनी सेवाओं को अंजाम दे रहे हैं | इससे यह सीख मिलती है कि अगर इसी तरह से संसार के लोग एक दूसरे के गुणों की कदर करते हुए, एक दूसरे से प्रेम पूर्ण व्यवहार करते हुए इस धरती को सजाने, संवारने में लग जायें तो धरती स्वर्ग का रुप धारण करने में देर नहीं लगेगी |

मैदानों में चल रही इन सेवाओं द्वारा यहाँ टेन्टों एवं शामियाने का एक अस्थाई नगर बसता नज़र आ रहा है | इसमें समागम के मुख्य सत्संग पण्डाल का विशाल रुप बन रहा है जिसमें जहां भक्तों के बैठने के लिए स्थान की व्यवस्था है वहां सद्गुरु माता जी के लिए मुख्य मंच एवं अन्य वक्ताओं के लिए स्वतंत्र मंच बनाये जा रहे हैं |

बाहर से आने वाले भक्तों के निवास के लिए रिहाईश टैन्ट एवं स्वच्छता गृह, बिजली, पानीआदि की व्यवस्था की जा रही है | समागम में आने वाले हर व्यक्ती को मुफ्त भोजन (लंगर) एवं अत्यधिक रियायती दरों पर चाए एवं खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने वाले पाँच कैन्टीन बनाये जा रहे हैं | इन कैन्टिनों में अत्यधिक रियायती दरों पर मिनरल वॉटर भी उपलब्ध होगा |

मुख्य पण्डाल के आस पास समागम कमेटी, स्वागत कक्ष, अकाऊंटस, संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन, प्रेस एवं मीडिया, दूर देशों से आने वाले सन्त, कवि सभा, सीसीटीवी, रेल्वे रिज़र्वेशन, सामूहिक शादियाँ आदि कार्यालय बनाये जा रहे हैं जबकिमिशन का साहित्य वितरण करने वाले पाँच स्टॉल मैदान के अलग अलग हिस्सों में बन रहे हैं | इसके अलावा पत्रिका विभाग द्वारा भी उनकी सदस्यता हेतु अलग से स्टॉल लगाया जा रहा है |

निरंकारी प्रदर्शनी का विशाल शामियाना बन चुका है और उसमें प्रदर्शनी की सामग्री लगाना आरम्भ हो चुका है | इसके साथ ही बच्चों के लिए ‘बाल प्रदर्शनी’ का निर्माण भी प्रगति पथ पर है | इसके अलावा संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन एवं मुंबई डाक्युमेंटरी की अलग प्रदर्शनी लगाई जा रही हैं |

मिशन के कलाकार भक्तों द्वारा समागम का मुख्य द्वार एवं अन्य छ: प्रवेश द्वार बनाये जा रहे हैं | इन प्रवेश द्वारों से जहां सद्गुरु माता जी एवं भक्तों का आगमन होगा वहां समागम के मुख्य विषय ‘मिशन के ९० साल’ पर भी रोशनी डाली जायेगी | उल्लेखनीय है कि इन सारी तैयारियों का नियोजन, रचना, प्रबंधन एवं कार्यान्वयन मिशन के हर उस क्षेत्र के जानकार भक्तों के द्वारा किया जा रहा है |

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