दैनिक जीवन में प्रयोज्य शिलाजीत के गुण एवं उनसे लाभ -जानिए खबर

शिलाजीत – भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में शिलाजीत को सबसे महत्वपूर्ण पदार्थों में से एक माना जाता है। शिलाजीत एक मोटा, काले-भूरे रंग का खनिज तारकोल है जोकि लंबी उम्र और कई अन्य बीमारियों के लिए हजारों वर्षों से उपयोग किया जा रहा है।

शिलाजीत हिमालय पर्वतों में दरारें से गर्मियों में तापमान बढ़ने पर बाहर निकल जाता है। शिलाजीत सदियों पुराने, विघटित पौधों से बना है जो कि विटामिन, खनिज और अन्य पोषक तत्वों का शक्तिशाली स्रोत हैं। यह एक शक्तिशाली अनुकूलन है, जो सभी प्रकार के मानसिक और शारीरिक तनाव से बचाव में मदद करता है।

शिलाजीत कटु, तिक्त, उष्ण, पाक में कटु, योगवाही है और कफविकार, मेदोविकार, अश्मरी, शर्करा, मूत्रकृच्छू, क्षय, श्वास, वातार्श, पाण्डुरोग, अपस्मार, उन्माद, शोथ, कुष्ठ, उदररोग एवं कृमिका को नष्ट करता है।

बता दें कि सुवर्णमयी शिलाओं से उत्पन्न शिलाजीत अड़हुल के फूल जैसा लाल रस में मधुर, कटु, तिक्त, शीत एवं पाक में कटु होता है।

वहीं रजतमयी शिलाओं का श्वेत, कटु, पाक में कटु, नीला, तीक्ष्य एवं उष्ण होता है और लोहमयी शिलाओं का शिलाजीत गिद्ध के पंख के सदृश वर्णवाला, काला, तिक्त लवणरसयुक्त, पाक में कटु एवं शीत होता है, रसायन है। जो बल, वीर्य, प्रमेह तथा सप्तधातु को पुष्ट करने वाला तथा शक्तिवर्द्धक है।

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