अपने ही खेतों में लाखों रूपये के सेब उगता देख; हैरान हो रहे है पहाड़ के किसान -जानिए खबर

पहाड़ के किसानों के लिए मिशाल बन रहे पुरोला के लाखों रूपये के सेब उगाने वाले किसान
पुरोला किसानों के लिए सोना उगाने के गुर सीखा रहे हैं सुधीर चढ्ढा

राकेश रतुड़ी, पुरोला

पुरोला। जनपद उतरकाशी के पुरोला विकास खंड के डैरिका गोव में डेढ़ साल में लाखों का सेब पैदा किया जा रहा। जो किसान अपनी खेती से मुख मोड़ रहे थे। आज वे अपने ही खेतों में लाखों के सेब का बागीचा देखकर हैरान हैं। इन बागों को तैयार करने वाली संस्था इंडो डच हल्टीक्लचर टेक्नोलॉजी है जो किसानों की खेती में सेब के बाग लगवाकर अच्छी आमदानी के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इस संस्था के प्रेणा स्रोत सुधीर चढ्ढा बताते हैं कि 12 साल से जगह जगह जैसे काश्मीर, हिमाचल में काम किया है। अब उत्तराखंड में चार प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं। एक केंद्र डैरिका में भी खोला गया है। जिसमें किसानों को बाग लगवाने के गुर सिखाए जाते हैं। अब तक 3400 किसानों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। 170 सेब के बागीचे किसान लगा चुके हैं। इस साल 10,000 किसानों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें 1000 किसानों के बागीचे तैयार होने थे, लेकिन कोरोना के कारण इस समय किसानों को दिक्कत आ रही है।

वहीं सुधीर चढ्ढा ने बताया कि विदेशी तकनीकी से सेब की पौध तैयार की गई है जिसमें किसानों की 5 नली जमीन पर ढाई सौ सेब के पौधे लगाये जाते हैं। किसानों का इस तरह पौधे लगाने पर एक लाख का खर्चा आता है यदि पौधे की सुरक्षा के लिए लोहे के ऐंगल व जाली भी लगे तो लगभग ढाई लाख खर्चा आता। 18 महीने के बाद पौधे फल देने शुरू कर देते हैं। पहले ही साल किसान को एक लाख की आमदानी हो जाती है। तीन साल बाद आय दुगुनी बढ़ जाती है। किसानों को सेब की पौध संस्था निःशुल्क देती हैं।

सेब की नयी किस्म जैसे एस्कारलेटस्पेर, गाला सींगों, गाला मीमा, किगरोह, ज्यारामाइन जैसी प्रजाति के सेब की पैदावार भी अधिक होती है। बाजार मूल्य भी अच्छा है। इस संस्था को कोका कोला कम्पनी भी मदद करती है। आज यह कम्पनी सेब से जूस निकाल कर बाजार में आ रहा है।

बता दें कि उत्तराखंड से सेब की पौधे की मांग हिमाचल प्रदेश सबसे ज्यादा करता है। इस संस्था को अब तक जम्मू कश्मीर सरकार 1000 करोड़, हिमाचल प्रदेश की सरकार ने 1400 करोड़ का पैकेज दे चुके हैं।

यह कहना है कि उत्तराखंड में सेब बागीचे के अपार संभावनाएं है यदि किसान अपनी खेती पर सेब के बाग लगाए तो पांच साल में यह प्रदेश हिमाचल प्रदेश से आगे निकल जायेगा। जहां सरकार किसानों से कई तरह के लुभावने वादे करती है वह सब झूठे साबित हो रही है। सुधीर चढ्ढा का कहना है कि आछ तक सरकार ने कुछ भी मदद नही की है। अब तक किसानों ने अपने बलबूते पर ही सारा काम किया है।

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