बितान चक्रवर्ती द्वारा रचित पुस्तक द मार्क को शाम्भवी इंप्रिंट ने किया लॉन्च -जानिए खबर

देहरादून। शाम्भवी इंप्रिंट ने ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर कोलकाता में बितान चक्रवर्ती द्वारा लिखित पुस्तक द मार्क को लॉन्च किया. ज्ञातव्य है कि बितान चक्रवर्ती की पहचान हवाकाल पब्लिशर्स के संस्थापक के रूप में है। वे प्रशंसित कथा लेखक, अनुवादक और बांगला भाषा में छपने वाली पत्रिका, अतिभुज के सम्पादक भी है। इस पुस्तक को शर्मीला रे, सुदीप सेन और इन्द्रजीत बोस ने विधिवत जारी किया और इस पर चर्चा की।

बता दें कि इस अवसर पर कोलकाता के सम्पादक, अनुवादक, प्रकाशक एवं सम्मानित कवि किरीटी सेनगुप्ता, अंग्रेजी साहित्य के अध्यापक, अनुवादक और द्विभाषी कवि उत्पल चक्रवर्ती मौजूद थे। अपराह्न में साहित्य के क्षेत्र लेखकों, प्रकाशकों और अनुवादकों की साहित्यिक कृतियों तथा अंतर्दृष्टिपूर्ण यात्रा पर वार्ता एवं जीवंत चर्चाएँ हुईं।

इसी सत्र में श्रोताओं के समक्ष हवाकाल ने सुदीप सेन : इंटरव्यूज के लोकार्पण के माध्यम से अपने प्रथम इंप्रिंट, क्लासिक्स को लॉन्च किया। क्लासिक्स, विश्व साहित्य में नयी पीढ़ी की महत्वपूर्ण आवाज और “अंतरराष्ट्रीय साहित्य जगत में अंग्रेजी भाषा के बेहतरीन युवा कवियों में से एक” के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित सुदीप सेन की चुनिन्दा वार्ताओं और साक्षात्कारों का संकलन है। प्रतिष्ठित शिक्षाविद, कवि, और साहित्यिक साक्षात्कारकर्ता। झीलम चट्टराज ने सुदीप सेन के साथ इस आयोजन के लिए वार्ता की।

‘द मार्क’ पुस्तक बितान चक्रवर्ती द्वारा रचित सात लघु कथाओं का संकलन है जिसे मूल बांग्ला भाषा से उत्पल चक्रवर्ती ने अनूदित किया है। इस संकलन से पाठकों को रोजमर्रे के जीवन के अक्सर उपेक्षित चिन्हों का ज्ञान प्राप्त होता है। साथ ही उनकी पुरानी यादें ताजा हो जातीं हैं जिसके फलस्वरूप वर्षो से हमारे दिलों में सुसुप्त कुछ अस्तित्वपरक जिज्ञासाएं जाग्रत हो जाती हैं।

कहानी का प्रारम्भ और अंत समान नोट और समान कष्ट के साथ होता है। फिर भी हम जब तक पात्रों के साथ कहानी में डूब नहीं जाते तब तक पूरी तस्वीर उभर कर सामने नहीं आती। हम क्रियाओं के विस्तार में कुछ घटनाओं के सहभागी बन जाते हैं या दर्शक बने रहते हैं। बितान चक्रवर्ती उत्तर आधुनिक दर्शन के विरुद्ध प्रतिक्रिया नहीं करते, बल्कि इसके बदले वे कथावाचक के गतिरोध को हल करने के लिए कहानी को खुद की जुबानी अपनी कथा कहने और पाठकों को आश्चर्यित करने देते हुए एक दूरदर्शी दृष्टिकोण का खुलासा कर रहे हैं। इन कहानियों की एक विशिष्ट रूप से रचित शैली भी है। वे सूक्ष्म जगत के भीतर सूक्ष्म जगत की रचना करते हैं – मानों कहानी का प्रत्येक मोड़ प्रारम्भ के समानांतर चलता हो – वैसे ही जैसे कि विभिन्न ग्रह गुरुत्वाकर्षण के नियम से बंधे सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं।

सुदीप सेन : इंटरव्यूज पूरी दुनिया के विभिन्न अखबारों, पत्रिकाओं और जर्नल्स में कोई 30 वर्षों में छपे लेखक के जीवन और कृतियों के साथ सर्वश्रेष्ठ वार्ताओं और साक्षात्कारों का संकलन है जो 350 पन्नों में पुस्तकाकार किया गया है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख विद्वानों, आलोचकों, लेखकों और पत्रकारों ने सेन के साथ उनके साहित्य-शिल्प, व्यस्तताओं, अभिरुचियों, और लगन की गूढ़ताओं के बारे में विस्तारपूर्वक बातचीत की है। सब मिला कर यह पुस्तक “भारत के सबसे अग्रणी कवियों में से एक” के रूप में उनके महत्वपूर्ण अंतर्मन और रचनात्मक तथा बौद्धिक परिदृश्य से पर्दा हटाती है।

सुदीप सेन विश्व साहित्य में नयी पीढ़ी की मुखर आवाज के रूप में सुविख्यात हैं। इस संकलन की भूमिका में सेन लिखते हैं, “एक ऐसे संसार में जहां जूनून से ज्यादा दौलत को, काव्य से अधिक कल्पित कथाओं का सम्मान किया जाता हो, वहाँ इतने दसकों तक कविता लिखना एक कठिन कार्य है। एक ऐसी विधा के साथ डेट रहने, जिसे जल्दी पाठक या प्रकाशक नहीं मिलते, के लिए पागलपन वाला “साहस” और “कला ख्के लिए, प्रेम’ का होना आवश्यक होता है। इसी चीज से मुझे काव्य साधना करने और काव्य से सम्बंधित हर चीज – इसका लेखन, अनुवाद, संपादन, प्रकाशन और युवा लेखकों की सहायता करने की शक्ति मिली है। इसके केंद्र में काव्य से मुझे अपने जीवन में सबसे बड़ा आनंद प्राप्त होता है।

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