आत्मा! जब आनंद के श्रोता से जुड़ी होती है तब आनंद महसूस होता है: प्यारेलाल टम्टा

परमात्मा को जानने के लिए मिला है मनुष्य जीवन

हल्दुखाता। परमात्मा निराकार है और मनुष्य जन्म उसका प्रचार करने के लिए ही हुआ है, लेकिन व्यक्ति अपने सांसारिक सुखों को पाने में लग गया। जिसके चलते भगवान से दूरी बनती चली जा रही है। ये प्रवचन रविवार को संत निरंकारी सत्संग भवन हल्दूखाता में संगत को संबोधित करते हुए प्रचारक महात्मा प्यारेलाल टम्टा ने व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि हमें मनुष्य चोला प्रभु परमात्मा को जानने के लिए मिला है। मनुष्य भौतिकता के पीछे भागते हुए परमात्मा से दूर हो गया है। सत्संग परमात्मा को पाने का एक मार्ग है। हमें व्यस्त समय में से कुछ समय ईश्वर के गुणगान एवं जानने-पहचानने लिए निकालना चाहिए। सत्संग सुनने से मन का भटकाव नहीं होता।

उन्होंने यह भी कहा कि तन-मन धन परमात्मा का है और हमें इसे परमात्मा का समझकर ही प्रयोग करना चाहिए। भक्त ही मन को आनंदित करते हैं, माया नही। आत्मा जब आनंद के श्रोता से जुड़ी होती है तब आनंद महसूस होता है। अलौकिक खुशी करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं मिलती है।

– अंकित टम्टा

Sushil Kumar Josh

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