पुलिस अधीक्षक की पत्नी ने कोरोना चेन तोड़ने के लिए निभायी अहम भूमिका -जानिए खबर

  • पीलीभीत एसपी की पत्नी भावना दीक्षिजत ने महिलाओं के स्वरोजगार के लिए बढ़ाया कदम
  • पुलिस परिवारों की महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता के लिए महत्वाकांक्षी परियोजनाएं ला रहीं पीलीभीत एसपी की पत्नी भावना दीक्षित
  • महिलाओं के लिए कम लागत वाले सैनिटरी नैपकिन का निर्माण करेंगी पीलीभीत एसपी की पत्नी भावना दीक्षित

पीलीभीत। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये सरकार हर स्तर पर जुटी है। वहीं इन कोशिशों में पुलिस कर्मियों की पत्नियां भी बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में पीलीभीत रिजर्व पुलिस लाइन परिसर, पुलिस बल के लिए फेस मास्क के निर्माण के साथ-साथ पुलिस परिवारों की महिलाओं की आत्म निर्भरता का पहला मील का पत्थर साबित हो रहा है।

बता दें कि पीलीभीत पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित की पत्नी भावना दीक्षित द्वारा महिला सश्क्तिकरण व महिलाओं के स्वरोजगार के लिए आगे आई हैं। बॉलीवुड फिल्म पैडमैन से प्रेरित होकर, भावना ने पीलीभीत में पुलिस मुख्यालय में कम लागत वाले सैनिटरी नैपकिन के निर्माण के लिए एक कमर्शियल यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई है। वह पूरी तरह से इस कार्य के लिए संबंधित तकनीकी जानकारियों के साथ इसे महिला कल्याण के लिए उपयोग करने की इच्छा रखती हैं।

उन्होंने बताया कि हमारी योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है और हम व्यावहारिक रूप से बहुत जल्द ही प्रोजेक्ट ‘वामा सारथी’ के साथ इस कार्य की शुरुआत करेंगे। गौरतलब है कि वामा सारथी यूपी पुलिस फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन का एक मंच है, जिसकी अध्यक्षता राज्य की राजधानी में पुलिस महानिदेशक की पत्नि व राज्य भर के जिला मुख्यालयों में एसपी की पत्नियां करती हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार और गैर सरकारी संगठनों द्वारा समय-समय पर प्रायोजित कई प्रचार अभियानों के बावजूद भारत में उपयोग को देखते हुए बेहद कम दर पर सैनिटरी नैपकिन का निर्माण होता है। मेन्स्ट्रुअल हाइजीन एलायंस ऑफ इंडिया (एमएचएआई) के एक अनुमान का उल्लेख करते हुए, भावना ने बताया कि संबंधित रिपोर्ट महिलाओं की स्वच्छता एवं सैनिटरी नैपकिन की पहुंच के बारे में एक निराशाजनक तस्वीर पेश करती है जो विशेष रूप से गरीब और दलित वर्गों से संबंधित है।

यह एक विडंबना है कि भारत में कुल 336 मासिक धर्म वाली महिलाओं में सेनेटरी नैपकिन का उपयोग केवल 36ः महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह कुल 121 मिलियन महिलाओं के लिए है, जो सुरक्षित स्वच्छता अभ्यास को अपनाती हैं, जबकि बाकी अभी भी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर हैं”

वामा सारथी इस क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञ संस्थानों से परियोजना के लिए तकनीकी और वैज्ञानिक सहायता सुनिश्चित कर रहे हैं। उसके लिए तमिलनाडु के कोयम्बटूर में अरुणाचलम मुरुगनाथम से संपर्क किया गया है, जो कम लागत वाले सैनिटरी नैपकिन के निर्माण के लिए अग्रणी थे और ग्रामीण भारत में मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता पैदा करने के वाले व्यक्ति हैं।

इस परियोजना में पीलीभीत में 250 पुलिस परिवारों की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होगी, जिन्हें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और तैयार उत्पाद की सप्लाई के प्रबंधन का उचित प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनिट के लिए आंशिक धन पुलिस परिवारों और बाकी सरकारी वित्तीय संस्थानों द्वारा तैयार किया जाएगा। यह न केवल पुलिस परिवारों की महिलाओं को उनके स्थानांतरण के बाद भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र बना देगा, बल्कि महिला कल्याण के महान कार्य भी करेगा। एसपी अभिषेक दीक्षित ने बताया कि रिजर्व पुलिस लाइंस के इंस्पेक्टर को इस परियोजना के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया जाएगा।

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