परमात्मा का आधार लेकर विपरीत भावों को दूर करने से मन में आयेगी शांति – सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

नासिक। “परमात्मा का आधार लेकर विपरीत भावों को दूर करने से मन में शांति आयेगीI अगर विपरीत भाव हमारे मन में आ रहे हैं तो उन्हें अधिक समय अपने मन में ठहरने न दें बल्कि परमपिता परमात्मा का आधार लेकर उन्हे दूर करें।”

महाराष्ट्र के ५३वे वार्षिक निरंकारी संत समागम में दूसरे दिन उपस्थित विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने उक्त उद्गार व्यक्त किये।

Nirankari-Samagam-Nashik-n

सद्गुरु माता जी ने कहा कि यह मन कई तरह के रंग धारण करता हैं। कभी यह पत्थर की तरह कठोर हो जाता है, तो कभी मोम की तरह मुलायम बन जाता हैं। कभी इस मन में नफरत पैदा होती है तो कभी प्यार के भाव उमड आते हैं। कभी यह नीम की तरह कडवा होता है जिससे बेचैनी आ जाती हैंI इसलिए मन में जब विपरीत भाव आ जाते है तब हमे उन्हे तुरंत निकाल देना चाहिए।

सद्गुरु माता जी ने आगे फरमाया किहमें जो ज्ञान मिला है वह बहुत कीमती है इसको अपने जीवन में ढालकर उसका उपयोग करना चाहिए और इस कीमती वस्तु को औरों तक पहुंचाने का भी प्रयास करना चाहिए। अगर हम ईश्वर को जीवन का आधार बना लेते हैं तो हमारा वर्तमान भी सुधर जायेगा और भविष्य भी संवर जायेगाI जब मनुष्य दूसरों के अवगुण देखने के बजाय खुद का सुधार करने लग जाता है तो वह उन्नति की तरफ बढता है।

सद्गुरु माता जी ने प्रतिपादन किया कि ईश्वर से नाता जोडने से हमारा जीवन संतुलित हो जाता है। इसलिए हमें ज्ञान और कर्म दोनो तरफ ध्यान देना होगा। अगर हमने ज्ञान की प्राप्ती कर ली है तो वह हमारे व्यवहार में छलकना चाहिए। तभी हमारे जीवन में मधुरता आयेगी।

Nirankari-Samagam-Nashik-n

संत समागम में लगाई निरंकारी प्रदर्शनी एवं बाल प्रदर्शनी समागम के तीनों दिन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। उल्लेखनीय है कि समागम के इलाके में स्थित माध्यमिक आश्रम स्कुल, जैन चॅरिटेबल स्कुल और होली अँजेल स्कुल के बच्चों को प्रदर्शनी देखने के लिए उन स्कुलोंद्वारा भेजा गया। साथ ही साथ एक संस्था ने अपने संस्था के प्रांगण में नियमित रुप से बाल सत्संग शुरु करने का अनुरोध किया।

समागम स्थल पर लगाये गये कायरोप्रैटिक चिकित्सा शिविर में 13 देशों से आये 60 से अधिक चिकित्सक निष्काम भाव से प्रतिदिन करीब 3000 जरुरतमंद मरीजों का इलाज कर रहें है। इलाज की यह तकनीक पूर्णतया रीढ की हड्डी से जुडी है। इस तकनीक के जरिए आज कल यु.एस.ए., कॅनडा जैसे कई विकसित देशों में इलाज किया जाता है और भारत में भी कुछ डॉक्टर्स इस तकनीक के लिए पंजीकृत हुए है।

ukjosh

‘उत्तराखण्ड जोश’ एक वेब पोर्टल है जो देश-विदेश, सरकारी, अर्धसरकारी, सामाजिक गतिविधियां, स्वस्थ्य, मनोरजंन, स्पोर्टस, कहानी, कविता एवं व्यंग्य संबंधी समाचार एवं घटनाओं को सोशल मीडिया द्वारा अपने सुधीपाठकों एवं समाज तक पहुंचाता है। वहीं अपने सुधीपाठकों से यह आशा करता है कि खबरों को शेयर एवं लाइक जरूर करें। हमें आपके सहयोग की अतिआवश्यकता है। धन्यवाद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *