“दलितों को पहले इंसान तो समझो” सबसे बड़ा सवाल आज भी वहीं खड़ा है जहां डॉ अम्बेड़कर छोड़कर चले गए थे . . .

…… जो इन आँखों ने देखा वही लिख दिया

आप, दलित और पिछड़े समाज को बनाने वाला ईश्वर तो आज भी शर्मसार हो रहा है

मुझे इस बात से ज्यादा मतलब नही कि दलित समाज को लेकर पूरे देश की क्या सोच है? और पूरे देश में उनपर किस तरहा का जुल्म हो रहा है। उनको किस निगाह से देखा जा रहा है। मैं तो अपने कस्बे और अपने गॉव की ही बात करूँगा। जो मैने पिछले बीस सालो से देखा। हमारे कस्बे में आज भी दलित और पिछड़े समाज के लोग विशेष स्थान पर अपना जीवन यापन करते है। विशेष इसलिए क्योकि वहॉ दलित और पिछड़े समाज के अलावा और कोई नही रहता है। या यूँ कहे कि रहना नही चाहता है।

आज भी उस इलाके में दलित समाज के अलावा और कोई नही जाना चाहता। हॉ चुनाव के वक्त उस समाज की सबको बहुत जरूरत होती है। यह बात बिलकुल सही है कि उस समाज ने पिछले बीस सालो में काफी तरक्की कर ली। अच्छे अच्छे घर बन गए है कुछ परिवार कस्बे से निकलकर शहर में जा बसे है। लेकिन एक दूसरा सच यह भी है कि उस समाज का अगर कोई हमारे घरों में आ जाए और चाय या पानी पी ले तो वह बर्तन या तो टूटेगा या फिर अलग रख दिया जाएगा।

हमारे यहॉ उस समाज के लोगों को आम तौर पर किसी भी खुशी या गम के मौके पर याद नही किया जाता है। लेकिन हॉ सफाई के लिए हम सब उनका इंतजार करते है। पहले मुझे लगता था कि दलित समाज के लोग हमारे कस्बे में कहीं बाहर से आए हुए है। इसलिए हम उनको बराबरी का दर्जा नही देते है। लेकिन मैंने दलित और पिछड़े समाज की कम से कम एक पीढ़ी तो देखी है। जिसको हम किस निगाह से देखते है इसको मैं बहुत बेहतर से समझता हूँ।

‘‘हम बराबरी की बड़ी-बड़ी बातें करते है लेकिन क्या उस पर खुद कभी अमल भी करते है। कभी अपने इमान से अपने दिल से सवाल करें कि आपने कभी दलित और पिछड़े समाज को वोट के अलावा कभी कुछ और भी समझा है। आप जिस हीन भावना से उनकी तरफ देखते है। उसको देखकर कोई शर्मसार हो या ना हो लेकिन आपका और दलित और पिछड़े समाज को बनाने वाला ईश्वर तो शर्मसार जरूर होता। कुल मिलाकर तमाम सवाल अपनी जगह है।

लेकिन ‘‘सबसे बड़ा सवाल आज भी वहीं खड़ा है जहां डॉ अम्बेड़कर छोड़कर चले गए थे कि दलित और पिछड़े समाज को हम इंसानी निगाह से आखिर कब तक पिछडा और अपने से अलग समझते रहेंगे। उनको समाज में कब वह इज्जत मिलेगी जिसके काबिल उनको खुद ईश्वर ने बनाया है।

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