अंग्रेजों के पसीने छूट गए इस ठाकुर के सामने; नाम है मधुकर शाह- बुंदेलखण्डल का नायक

पुस्तक समीक्षाः लेखक – गोविन्दण नामदेव, प्रकाशक – राजकमल प्रकाशन, कीमत – 295 रूपए, पेज – 128

‘मधुकर शाह – बुन्देसलखण्डा का नायक’ कोई ऐतिहासिक दस्ताधवेज नहीं है, बल्कि इतिहास में उपलब्धा अल्प सूचनाओं और तथ्यों को आधार बनाकर बुन्देेला-विद्रोह के अमर नायक मधुकर शाह बुन्देयला की जवन यात्रा को इस पुस्तक के जरिए बयान किया गया है।

1857 के स्वातंत्रतता संग्राम से पहले 1842 में बुन्देबलखण्ड की त्रस्तस जनता को अंग्रेजों के चंगुल से छुडाने के लिए मधुकर शाह ने बहादुर बुन्देला ठाकुरों को संगठित करके बुन्देरलखण्ड की आजादी का बिगुल फूंक दिया था।

मधुकर शाह बुन्देेला की ललकार से अंग्रेजों के पसीने छूट गए थे। बाद में बेहद चालाकी से मधुकर शाह को उनके अपने ही लोगों से कब्जे में लेकर अंग्रेजों ने सागर की जनता के सामने उन्हें फांसी दे दी थी। अंग्रेजों ने इसे बुन्देेला विद्रोह का नाम दिया।

बुन्देथलखण्ड की प्रतिष्ठाल और सम्मा न के लिए अपने प्राणों का महात्याीग करने वाले इस महान नायक का नाम बुन्दे लखण्डल के सच्चेय वीर सपूत को मधुकर शाह बुन्दे ला के नाम से जाना जाता है। जिन्हें निर्दयी अंग्रेजों ने जाल फेंककर अपने कब्जेल में ले लिया और सारे नियम कायदे ताक पर रखकर खतरनाक देशद्रोही घोषित करके, तीन दिन के अंदर फांसी के तख्तेब पर लटका दिया था।

लिखित इतिहास में इस विषय पर विस्तातर से कहीं कुछ भी उपलब्ध, नहीं है, लेकिन कुछ सूचनाओं के आधार पर लेखक गोविन्द नामदेव ने इस नाटक की रचना की और इसे किताब की शक्ल् दी है।

इस ऐतिहासिक प्रकरण का इतनी सम्पू र्णता से लेखक ने एक नाटक में ढाला है कि इस पुस्तयक ‘मधुकर शाह दृ बुन्देेलखण्ड का नायक’ को पढना भी इसे देखने जैसा अनुभव कराता है।

Sushil Kumar Josh

"उत्तराखण्ड जोश" एक न्यूज पोर्टल है जो अपने पाठकों को देश-विदेश, सरकारी, अर्धसरकारी, सामाजिक गतिविधियां, स्वस्थ्य, मनोरजंन, स्पोर्टस, फिल्मी, कहानी, कविता, व्यंग्य इत्यादि समाचार सोशल मीडिया के जरिये आप तक पहुंचाने का कार्य करता है। वहीं अन्य लोगों तक पहुंचाने या शेयर करने लिए आपका सहयोग चाहता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *