सांप, छिपकली से कच्ची शराब बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है आयोडेक्स का भी इस्तेमाल

जानकार बताते हैं कि अवैध शराब को तैयार करने के लिए यूरिया, आयोडेक्स, ऑक्सिटॉसिन का इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं, शराब को ज्यादा नशीली बनाने के लिए इसमें सांप और छिपकली तक मिला दी जाती है। कई बार अवैध शराब बनाने के लिए डीजल, मोबिल ऑयल, रंग रोगन के खाली बैरल और पुरानी हांडियों (बर्तन) का इस्तेमाल किया जाता है।

आबकारी विभाग के सूत्रों के मुताबिक, कच्ची शराब बनाने के लिए पुराना गुड़ और शीरे के साथ महुआ दुर्गंध आने तक रखा जाता है। बताते हैं कि जितना पुराना और दुर्गंध वाला गुड़ या शीरा होगा उससे उतनी ही अधिक और नशीली शराब तैयार होगी।

अवैध शराब बनाने वाले कोल्हू या गुड़ मंडी से गुड़ और शीरा खरीदते हैं। इसके बाद अवैध शराब तस्कर घने जंगल में नदी-नाले और तालाब के किनारे भट्ठी लगाकर शराब बनाते हैं। कई घंटे भट्ठी में आग जलाकर शीरे और गुड़ से शराब को निचोड़ा जाता है।

इस दौरान वे नाले, तालाब या गड्ढों में भरे गंदे पानी का भी इस्तेमाल करने से परहेज नहीं करते हैं। जानकारों का कहना है कि शराब को अधिक नशीली बनाने के लिए भैंस का दूध निकालने के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑक्सिटॉसिन के इंजेक्शन, दर्द में इस्तेमाल की जाने वाली आयोडेक्स भी मिलाई जाती है।

बताते चले कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या बढ़ गई है। उत्तराखंड के रुड़की में मरने वालों की संख्या 31 तक पहुंच गई है. इसके अलावा सहारनपुर में 64 और कुशीनगर में करीब 8 लोगों की मौत की खबर है। यानि तीनों जगह मौत का आंकड़ा 100 के पार हो चुका है। मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि रुड़की में अभी भी कई लोगों की तबीयत बहुत गंभीर बनी हुई है. इस मामले उत्तर प्रदेश पुलिस ने 175 और उत्तराखंड पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

वहीं रुड़की में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों पर एसएसपी हरिद्वार जनमेजय खंडूरी ने शनिवार को कहा कि इस मामले में 5 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसी के साथ उन्होंने जानकारी दी कि इस मामले में पुलिस अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही है।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने हरिद्वार में हुए जहरीली शराब कांड में मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और गंभीर रुप से पीड़ितों को पंचास-पचास हजार रुपये देने की घोषणा की है। उत्तराखंड के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के मुताबिक गुरुवार शाम हरिद्वार के झबरेड़ा क्षेत्र में स्थित बल्लूपुर गांव में एक मृतक की तेरहवीं में कच्ची शराब परोसी गई, जिसके बाद लोगों की तबीयत खराब हो गई।

वहीं जिलाधिकारी दीपक रावत के मुताबिक जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों के परिजनों को दो-दो लाख तथा गंभीर रुप से घायलों के परिजनों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता मुख्यमंत्री के निर्देश पर दी जाएगी। मृतकों में लगभग सभी मजदूरी करने वाले हैं।

साथ ही इन मौतों के बाद योगी सरकार ने अवैध शराब के खिलाफ पूरे प्रदेश में अभियान शुरू हो गया है। सिद्धार्थनगर, मऊ, सहारनपुर, ललितपुर, कौशांबी, झांसी, आगरा, सीतापुर, बिजनौर, रायबरेली, जालौन, प्रतापगढ़, एटा, वाराणसी समेत कई जिलों में अभियान चलाकर करीब 9 हजार लीटर कच्ची शराब को बरामद करने के साथ करीब 175 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, उत्तराखंड में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

वही सपा ने जहरीली शराब से मौतों पर दुःख जताया है। सपा ने कहा कि शराब काण्ड बीजेपी सरकार की लापरवाही है। प्रशासन अवैध शराब के धंधे पर रोक लगाने में नाकाम साबित हुई है। इस मामले में डीएम, एसएसपी की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरकार ने अभी किसी बड़े अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

इस मामले में यूपी के आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि कुशीनगर, सहारनपुर की घटना चूक का नतीजा था। हमने पहले भी जहरीली शराब के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस मामले पर भी कई लोगों पर कार्रवाई हो रही है. जांच के बाद जो दोषी होंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा रविवार को भी आबकारी मंत्री जय प्रताप सिंह प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. अभी तक इस मामले में 10 अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका है।

माना जा रहा है कि कुछ और अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। सहारनपुर के डीएम ने बताया कि कि 56 लोगों का अब तक पोस्टमार्टम हुआ है, जिसमें 36 लोगों की मौत शराब की वजह से हुई है। बाकी लोगों का विसरा भेजा गया, जिसके रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मरने वालों का आंकड़ा क्या होगा।

जिला प्रशासन हर जगह जा रहा है। सभी गांवों के प्रधानों से हमारी बात हुई है, जिसमे ये बात साफ हुआ कि ये शराब एक ही भट्टी से बनी हुई है। कच्ची शराब को ज्यादा नशीला बनाने के लिए शराब माफिया ऑक्सिटॉसिन आदि का इस्तेमाल करते हैं। गुड़ और शीरे में ऑक्सिटॉसिन मिलाने से मिथाइल अल्कोहल बन जाता है।

मिथाइल अल्कोहल कच्ची शराब में ज्यादा होने पर शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है। ज्यादा मिथाइल अल्कोहल से शरीर के हिस्से काम करना बंद कर देते हैं और मौत हो जाती है। इस धंधे से जुड़े लोगों के करीबियों की बात पर यकीन करें तो कई बार शराब को अधिक नशीला बनाने के लिए मरे सांप और छिपकली तक मिलाने के परहेज नहीं करते हैं।

अधिक नशे के चक्कर में कई दूसरे केमिकल का भी इस्तेमाल करते हैं। अधिक मिथाइल अल्कोहल शराब के साथ शरीर में जाने से ब्रेन डेड हो जाता है। इसके बाद लगातार बेहोशी रहती है। सहारनुपर से मेरठ आने वाले ज्यादातर मरीज भी बेहोश थे और उनका ब्रेन डेड था।

Sushil Kumar Josh

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