ब्रह्मानुभूति से ही भ्रम की समाप्ति: रसिदा बैगम

Rasida-Begum-from-Ingland-USAदेहरादून। इंसान अज्ञानता के कारण भ्रम-भ्रांतियों में फंसा हुआ है। इंसान इस परम शक्ति निरांकर का बोध हासिल करके भ्रम-भ्रांतियों से मुक्त हो जाता है। उक्त उदगार इस्टर, इंग्लैण्ड से पधारी बहन रसिदा बैगम जी ने निरंकारी सत्संग भवन, रेस्टकैम्प के तत्वाधान में सद्गुरू माता सविन्दर हरदेव जी महाराज का पावन सन्देश देते हुए व्यक्त किये।

भक्ति के मर्म पर प्रकाश डालते हुये उन्होंने कहा कि मानव अपनी आत्मा के निज स्वरूप परमात्मा को प्राप्त करके प्रेम, न्रमता, दया, करूणा एवं मिलवर्तन के गुणों को अपना कर सदा निरांकार परमात्मा को ही महत्व देता है और निराकार को मनोवृत्ति से जोड़कर हर पल भक्ति भरे विचारों का आनन्द लेता है। सद्गुरु, हमेशा ही भक्तजनों को भक्ति करने और समर्पण भाव से जीने की प्रेरणा देते है। भक्ति भक्त के जीवन में सदा पवित्रता प्रदान करती है और इस साश्वत परम सत्ता का कण-कण में एहसास करके आनन्द प्राप्त करता है।

उन्होंने कहा कि जिस मानव के जीवन में परमात्मा की भक्ति नही आई उसका जीवन निरस रहता है। भक्ति है तो जीवन के कुछ मायने है अन्यथा जीवन व्यर्थ है। दुनियावी सिलसिले और भौतिक प्राप्तियां भी मन को व आनन्द नही दे पाती है। आनन्द की खातिर इस आनन्द के स्रोत परमात्मा से नाता जोड़ना होगा। भक्त के जीवन से प्यार नर्मता, सब्र, सन्तोष, विशालता और सहनशीलता वाले गुण झलकने चाहिए। वह गुण भक्त की पहचान बनाते है। यही भावना उनके जीवन की शोभा बढाती है। यह भक्तों के जेवर है, जो जीवन को सुशोभित करते है। इंसान का वास्तविक विकास तभी माना जायेगा जब इंसान, इंसान के रूप में पैदा होकर इन्सानियत की राह पर चलेगा और इंसान की तरह जीवन जीने का सलीका सिखेगा। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों संतों, भक्तों ने अपनी-अपनी भाषा का सहारा लेकर सत्संग को निहाल किया। मंच संचालन विजय रावत ने किया।

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