सुखों का स्रोत है संत निरंकारी सत्संगः मंशाराम खण्डूरी

देहरादून (सुशील)। मनुष्य शरीर सुखों के लिए मिला है। जीवन के समस्त सुख, संतों के संग बैठकर प्रभु परमात्मा की सत्संग से मिलते है और ये समस्त सुख सद्गुरु के वचनों में होते है। उक्त आशय के उद्गार सन्त निरंकारी सत्संग भवन रैस्ट कैम्प के तत्वावधान में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं सद्गुरु माता सुदीक्षा सविन्दर हरदेव सिंह जी महाराज के पावन सन्देश देते हुए ज्ञान प्रचारक परम पूज्य श्री मंशाराम खण्डूरी जी ने व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि शरीर परमात्मा की अमानत है इसे बनाने वाला और चलाने वाला दोनों ही परमात्मा ही है। यानी परमात्मा की अंश आत्मा है और आत्मा की खुशी के लिए परमात्मा की चर्चा सुननी अति आवश्यक है। सत्संग में आत्मा की खुराक होती है सभी पीर-पैगम्बरों ने एक ही संदेश दिया कि परमात्मा एक है और शरीर के दो रूप है नर और नारी। दोनों ही परमात्मा के रूप है। सृष्टि की संरचना निरकार से हुई है और सबसे पहले नारी शक्ति का सृजन हुआ और फिर उसी से सब प्रकट होते गये। ब्रह्मा, बिष्णु, महेश सब इसी से प्रकट हुए है जो समय समय पर रूप बदलकर प्रकट होते रहते हैं।

गुरु ब्रह्मा, गुरु बिष्णु, गुरु देवो महेश्वर
गुर साक्षात पार ब्रह्म, तस्मेय श्री गुरुवेः नमः

जीवन में गुरु का होना नितान्त आवश्यक है क्योंकि गुरु से ही सद्मार्ग मिलता है। गुरु से ही जीवन का कल्याण होता है। जिसका सत्गुरु पर विश्वास हो जाता है। तो सद्गुरु पर उसका विश्वास जीवन में आ जाता है तो फिर जीवन सुखों से भर जाता है और उसका रोम रोम परमात्मामय हो जाता है। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों भक्तों ने विभिन्न भाषाओं का सहारा लेकर गीतो, भजनों और विचारों द्वारा सत्गुरु और परमात्मा, ईश्वर का गुणगान किया। संगत का संचालक पूज्य सचिन पंवार जी ने किया।

Sushil Kumar Josh

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