भक्ति के तहत ही प्राप्त होता है सेवा का जज्बा -विजय रावत

देहरादून(ब्यूरो)। समागम और सेवाओं के लिए साल भर इंतजार रहता है। भक्तजन सेवा के हर मौके का लाभ उठाने के लिए उत्साहित रहते है। यह जज्बा भक्ति के तहत प्राप्त होता है। उक्त आशय के उद्गार संत निरंकारी सत्संग भवन, हरिद्वार बाईपास रोड़, देहरादून में आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विजय रावत जी ने सद्गुरु माता सविन्दर हरदेव जी महाराज का पावन सन्देश को देते हुए व्यक्त किये।

आपने आगे 72वें निरंकारी समागम 16 से 18 नवम्बर, 2019 स्थान समालखा (हरियाणा) की तैयारियों के लिए चल रही सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए और मिशन की 90 वर्षो की यात्रा को स्मरण करते हुए कहा कि मिशन के उदेद्श्य एकत्व, शान्ति, समरसता विश्वबन्धुत्व है तथा मानवीय गुणों को घर-घर पहॅुचाना हमारी जिम्मेदारी है। हमें सेवा, सत्संग, सुमिरन के गहनों को सदैव धारण रखना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जब सत्गुरू ने हमें ज्ञान दिया, तभी हमारी वाणी बदल गयी। यह जो वाणी बदली है, जो आज शब्दों का प्रयोग हो रहा है, वह गुरू की देन एवं कृपा है। हमें गुरू के ही वचनों को सुनकर अपने जीवन में उपयोग करके संसार में जीना है। अगर गुरू के एक-एक वचन को अपने जीवन में अपना लिया जाये, तो जीवन का कल्याण हो जाता है।

जीवन में वो बदलाव आता है, जो एक सज्जन व्यक्ति का होता है। सत्संग समापन से पूर्व अनेकों संतों, भक्तों ने अपनी-अपनी भाषा का सहारा लेकर संगत को निहाल किया। मंच संचालन राजीव बिजल्वाण जी ने किया।

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