टूट गया गठबंधन, छूट गया साथ, बुझ गई लालटेन

व्यंग्य: ये गठबंधन तो…

ललित शौर्य, प्रदेश मंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद

टूट गया गठबंधन। छूट गया साथ। बुझ गई लालटेन। मलता रहा हाथ। बिहार की सियासत ने करवट ली महागठबंधन का धागा उलझ गया। सुलझाने में लगी ताकत, ऐसा झटका लगा की धागा टूट गया। कोई धोखेबाज निकला, कोई भ्रष्टाचारी। किसी को बेवफा कहा जा रहा है, किसी को बिना चारे के बेचारा। नेताजी ने बेटों का कैरियर आपने हाथों से ठोक-बजा के बनाया था पर गठबंधन के टूटते ही वो बेरोजगार हो चले। अब वो चिल्ला रहे हैं।

विधानसभा की गलियों से पटना के बाजारों तक। बेवफाई के किस्से सुना रहे हैं। सुशासन बाबु पर ईमानदारी का लांछन लगाया जा रहा हैं। जब आदत ही बेईमानी की हो तो भला ईमानदारी कहाँ पचने वाली थी। सुशासन बाबू कुशासनधारी के पूतों से बचने के लिए भगुवा ब्रिगेड में शामिल हो लिये। लालटेन के घर में हाहाकार है। तीर कमान और कमल के खेमे में बहार है। हाथ सिसक रहा और लाचार है। महागठबंन कि ऐसी हवा निकली की पश्चिम बंगाल से लेकर यू.पी केरल सब सकते में हैं।

संभावनाओं के बादल फट चुके हैं। बेवफाई की धार फूट पड़ी है। सत्ता की चासनी चाटने वाले अब भजिये तल रहे हैं। कल तक जो थके हारे थे, गठबंधन के हाथी से जो कुचले थे आज वो खिल गए हैं। तीर कमान का साथ पाकर उनके छाती का माप बड़ कर चार गुना हो गया है। टूटने से पीड़ा होता है। पर यहाँ टूटने पर ट्वीट होता है। बधाइयाँ मिलती हैं। दिल्ली से बधाई संदेश भिजवाए जाते हैं। लड्डू और पेड़ा बांटा जा रहा है। किसी को चिढ़ाया जा रहा है। किसी को रिझाया जा रहा है। राम नाम रटा जा रहा है। उधर गठबंधन टूटने पर कोई पिलपिलाया है, तमतमाया है। लोकतंत्र को बचाने की दुहाई दी जा रही है।

जिन्होंने लोकतंत्र की आड़ में चारा चाटा था। आज उसी चारे ने चांटा लगा डाला। अगले की लाइफ को खत्म कर डाला। बच्चों का कैरियर बर्बाद कर डाला। पुराने पाप के घड़े फूंट रहे हैं। साथी सारे छूट रहे हैं। गठबंधन को अपवित्र बताया गया। अब राम, गौ, गंगा, गायत्री वाले साथ हैं। गठबंधन हो चूका है। गाँठ कितनी मजबूत है समय बतायेगा। अब हर-हर गंगा बोलकर पुराने पापों को धो लिया जाएगा। पुराने पर अब जो नये हैं उन साथियों के साथ नए गठबंधन का मजा लिया जाएगा। रस्में कसमें खाई जा रही हैं। सगुन के गीत गाये जा रहे हैं। गुनगुनाया जा रहा है, ये गठबंधन तो…

Sushil Kumar Josh

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