अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाले की बू; UPCL घोटाले की हो सीबीआई जांच -जानिए खबर

देहरादून। उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन लि0 द्वारा वर्ष 2016-17 से अब तक बेची गई अतिरिक्त बिजली के लगभग 80 करोड़ कम भुगतान की सी.बी.आई. जांच को लेकर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लालचन्द शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेसजनों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) से उनके बसन्त विहार, देहरादून स्थित कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) को सौंपे ज्ञापन में महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कहा कि उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन लि0 द्वारा मै0 क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 से हुए अनुबन्ध के माध्यम से वर्ष 2017 से अब तक अतिरिक्त बिजली बेची गई है। उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन एवं मै0 क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 के बीच एक वर्ष के लिए हुए अनुबन्ध के अनुसार बेची गई अतिरिक्त बिजली की धनराशि का भुगतान मिलने के उपरान्त भी कम्पनी द्वारा उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन लि0 के पास धनराशि जमा नहीं की गई।

एक वर्ष का अनुबन्ध समाप्त होने के उपरान्त भी क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 से लगातार अनुबन्ध किया गया तथा क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 द्वारा निरंतर अतिरिक्त बिजली बेची जा रही है। परन्तु विभाग को बेची गई बिजली का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जबकि अनुबन्ध की शर्तों में स्पष्ट है कि कम्पनी द्वारा बिजली बेचने के तीन दिन के भीतर उत्तराखण्ड पाॅवर काॅरपोरेशन को धनराशि का भुगतान करना होगा।

महोदय, क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 के साथ लगातार 4 वर्ष तक हुए अनुबन्ध के उपरान्त उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन की लगभग 80 करोड़ का बकाया भुगतान अवशेष है। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे अनुबन्ध के इस खेल में भारी घोटाले बू आ रही है जिसकी जांच कराया जाना नितांत आवश्यक है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन लि0 के उच्चधिकारियांे एवं शासन में बैठे उच्चधिकारियों की क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 से सांठ-गांठ का खामियाजा उत्तराखण्ड प्रदेश की जनता को अपने घरेलू बिजली के बिलों को चुका कर भुगतना पड रहा है।

यह भी अवगत कराना है कि विगत लगभग 7 माह से वैश्विक महामारी कोरोना के कारण बिद्युत की खपत मे ंकाफी गिरावट आई है तथा कम्पनी द्वारा अधिक बिजली बेची गई है। कम्पनी द्वारा बेची गई बिजली का भुगतान यदि समय पर विभाग को होता तो निश्चित रूप से राज्य के उपभोक्ताओं को राहत मिलती तथा उन्हें कम दरों पर बिद्युत बिलों का भुगतान करना पड़ता।

अतः आपसे निवेदन है कि उत्तराखण्ड पाॅवर कारपोरेशन एवं मै0 क्रिएट एनर्जी प्राइवेट लि0 के बीच हुए अनुबन्ध की सी.बी.आई. से जांच करवाई जाय तथा कम्पनी द्वारा दी जाने वाली बकाया धनराशि को विभाग में जमा कराने के साथ ही मिलीभगत करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाय।
ज्ञापन देने वालों में लालचन्द शर्मा के अलावा मीना रावत,आशीष अग्रवाल, दिनेश कुमार, संजय शर्मा, संतोष सैनी, हरेन्द्र चैधरी, आजाद वर्मा, आकाश शर्मा आदि शामिल थे।

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