प्रेमियों का महाकुम्भ आज से शुरुः वेलेंटाईन-डे की पवित्रता पर खड़े हुए सवाल

अश्लीलता की चादर में लिपटा हुआ कुरूप चेहरा

नवबर्ष के दूसरे माह यानी फरवरी के आने का युवा बड़ी बेसब्री से इन्तजार करते है। क्योंकि ये ही वो महीना है जिसमें युवा प्रेमी अपने प्यार का इजहार करने के लिए बहुत उत्सुक रहते हैं।

यूं तो प्यार का इजहार करने के लिए किसी भी खास दिन की जरूरत नहीं होती लेकिन इतिहास में घटित घटनायें ही उस दिन को खास बना देती हैं। ऐसे ही प्यार का प्रतीक बैलेन्टाईन है जो फरवरी माह की 7 तारीख से लेकर 14 तारीख तक मनाया जाता है।

इन सात दिनों में हर दिन खास होता है लेकिन सप्ताहंत यानि 14 फरवरी को प्यार का इजहार किया जाता है। दरअसल प्यार एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जो दिलों का ही नहीं जिन्दगियों का भी फैसला करता है। प्यार एक अनमोल खजाना है जिसकी कुछ बूंदे ही आप को धनवान बना देती हैं। 

प्यार वो चीज है जो इंसान की जिन्दगी सवांर देता है। प्यार दिल से निकलता है और खुशियों के आंसू बनकर आंखों से निकलता है। ऐसा ही वैलेन्टाईन है जो प्यार,स्नेह और रूमानियत का पर्व है।

प्यार और प्यार की भावना को दर्शाने की वजह से ही ये 7 दिन स्पेशल हो जाते है। सही मायनों में ये एक ग्लोबल पर्व बन गया है आखिर बने भी क्यों नहीं क्योंकि दुनिया के हर व्यक्ति को प्रेम की जरूरत है। लेकिन ये भी जरूरी नहीं है कि प्रेम केवल प्रेमी-प्रेमिका के दरम्यान ही हो प्रेम तो किसी से भी किया जा सकता है।

प्रेम पति-पत्नि के बीच, भाई-बहन के बीच, माता-पिता के बीच भी हो सकता है प्यार किसी एक में बंधे हुये रहने का नाम नहीं है। लेकिन आज इस वैलेन्टाईन का सहारा लेकर युवाओं ने जिस तरह से प्रेम को परिभाषित किया है उससे प्रेम की पवित्रता पर आंच आने लगी है।

प्रेम पवित्र न होकर अश्लीलता की चादर में लिपटा हुआ कुरूप चेहरा बन कर रह गया है, जिसने मर्यादाओं के सारे बन्धन ही तोड़ दिये हैं। क्या इस नई पीढ़ी ने प्रेम की परिभाषा को अपने जोशो-जुनून से बदल दिया है?।

अगर आप किसी से बेहद प्यार करते हैं तो उसका अहसास अल्फाजों में बयां नहीं किया जा सकता, बल्कि ये प्यार झलकता है उस शख्स के व्यवहार में, उसकी हर जरूरत को पूरा करने की हमारी ख्वाहिश ही प्यार के रिश्ते को और भी मजबूत बना देती है।

लेकिन आज प्रेम होटलों ,गार्डनों से चलकर मैट्रो और बसों तक पहुंच गया है जिसमें लाज शर्म के पर्दे तार-तार हो गये और अश्लीलता की चादर ढ़क गई । इसीलिए लोगों ने प्रेम की परिभाषा को अपने-अपने नजरिये से पेश किया है जो आज की युवा पीढ़ी को अखरता है अखरने की बात तो नहीं है लेकिन आज की युवा पीढ़ी ने प्रेम को उस दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है जिसमें अश्लीलता और सामाजिक मर्यादा का उल्लंघन दिखाई देता है।

पार्कों में प्रेमी युगल अश्लील हरकते

प्रेम का इजहार ये नहीं कहता कि आप ‘‘खुल्लम-खुल्ला प्यार करेंगें’’ या ‘‘जब प्यार किया तो डरना क्या’’ सरीखे फिल्मी गानों का अनुसरण करके अपने ही प्यार को सरे आम रूसवा करें। प्रेम शर्मीला होता है इसकी भी अपनी कुछ मर्यादायेओ सीमायें होती हैं लेकिन जिस तरह से सड़कों, पार्कों में प्रेमी युगल अश्लील हरकते करते देखे जाते हैं तो उसे देखकर लगता है कि युवाओं को प्रेम की मर्यादाओं का बिल्कुल ज्ञान नहीं है। आज प्रेम देह की वासना से ग्रसित हो गया है।

आज के दौर में प्यार की शिद्दत क्या होती है इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। अगर प्यार सच्चा है तो अच्छा है लेकिन जिस तरह का माहौल लेकर आज की युवा पीढ़ी सड़को पर उतरती है उसने बैलेन्टाईन की पवित्रता पर ही सवाल खड़े कर दिये है।

प्यार दिल से निकलता है लिहाजा इसे टाईम पास का जरिया नहीं बनाना चाहिए। वरना आपकी देह वासना के शिकार हुए लोगों को बैलेन्टाईन की पवित्रता पर से यकीन खत्म हो जायेगा और वो गुलाब जो प्यार का प्रतीक है मुरझा जायेगा।

– सलीम रजा

Sushil Kumar Josh

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