पवित्र केवल स्त्री हो पुरुष क्यों नहीं? जिसने कभी सेक्स नहीं किया वह वर्जिन है कैसे – जानिए

मुम्बई। एक तरफ हम बात कर रहे हैं आसमान छूने की! कभी चाँद पर जाने की दूसरी और वर्जिनिटी पर सवाल उठाकर औरतों को सीलबंद कहकर अपनी कैसी सोच दिखा रहा है ये समाज। वर्जिनिटी क्या है? और आज आखिर वर्जिनिटी पर बार-बार सवाल क्यों उठाये जाते हैं। लड़कियों के वर्जिनिटी पर गंदे कमेंट करना कहां तक उचित है।

अगर वर्जिनिटी पर बात आती है तो फिर ये सवाल और जबाब केवल लड़कियों पर ही क्यों?..लड़कों पर क्यों नहीं खड़े होते। जबकि वर्जिनिटी केवल लड़कियों की नहीं लड़कों के भी खोते हैं। लड़कियों की वर्जिनिटी तो फिजिकल ऐक्टिविटी से खो जाती है पर लड़को की तो बेड पर ही खोती है। उन पर ये सवाल क्यों नहीं? पवित्र केवल स्त्री हो पुरुष क्यों नहीं।

वर्जिनिटी केवल मर्दो के लिए एक इंटरेस्टिंग विषय रहा है और गंदे कमेंट करना अपना शान बस। कभी ये सोचा है लड़कियों के दिमाग में भी ये बातें आती होगी पुरुषों के वर्जन को लेकर पर नहीं ये तो सोचने का हक केवल पुरुषों का है..है ..न..।

अभी कुछ दिन पहले एक प्रोफेसर ने लिखा था “एक लड़की जैविक तौर पर सीलबंद ही होती है एक वर्जिन लड़की का मतलब है कि वे अपने साथ मूल्यों, संस्कार और यौनिक स्वच्छता को परमसात किए हुए है”… ये सोच एक प्रोफेसर की सही थी क्या? बाद में उन्होंने काफी सफाई पेश की पर सोच मानसिकता तो वही थी।

वर्जिनिटी का मतलब कौमार्य से देखा जाता है। ज्यादातर लोगों का सोचना है जिसने कभी भी सेक्स नहीं किया है वह वर्जिन है। सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से देखें तो सेक्स और वर्जिनिटी दोनों अलग अलग है। वर्जिनिटी को स्त्री की पवित्रता को माना गया है।

इसे लेकर सवाल उठते रहें हैं टिप्पणी आती रही है पर क्यों?.. क्या ये सवाल उठना चाहिए। महिलाओं पर उठते हैं तो पुरुषों पर भी उठाए। अगर पवित्रता पर सवाल उठाना है तो पुरुषों पर भी सवाल उठाए। पुरुष अपनी पवित्रता क्यों नहीं साबित करते।

अक्सर लोग वर्जिनिटी को लेकर बहस करते हैं। लड़कियों का वर्जिन होना जरूरी है, ये प्रमाणपत्र होता है इसने कभी सेक्स नहीं किया है…। पर क्या ये सही है।वर्जिनिटी के बारे में आप कितना जानते हो सही या गलत। क्या आपको पता है नहीं पर अंगुली उठा देना आसान है और गंदे शब्दों से परिभाषित भी कर देते हैं।

लोगों की समझ है की वर्जिन का मतलब उसने कभी सेक्स संबंध बनाए ही नहीं होंगे… लेकिन इसका सम्बंध सेक्स से बिल्कुल भी नहीं है। खासकर आज के दौर में।सांइस की बात करते हैं पर समझो भी। साइंस में कहीं भी वर्जिनिटी जैसा नहीं है ये आम लोगों द्वारा बनाया गया शब्द है। जिसे पुरुषों ने युवतियों के चरित्र का प्रमाणपत्र बना दिया है या यूं कहें मान लिया है।

डॉक्टर की माने तो हायमन युवतियों में पायी जाती है उनका टूटना वर्जिन न होना के पहचान में देखा जाता है। हायमन का फटना सेक्स से ही केवल संबंध नहीं होता है हाँ ये सच है की सेक्स के समय ये डायमन डैमेज हो जाता है पर हमेशा ऐसा हो ये जरूरी नहीं।

आजकल महिलाओं में साइकिल, घुड़सवारी, कराटे, डांस और भी फिजिकल ऐक्टिविटी के कारण ये पहले ही नष्ट हो जाती है। फिर ऐसे में महिला की वर्जिनिटी पे सवाल करना कहां तक उचित है या उनपर तंज कसना कहां तक सही है। समाज बदलने की बात करते हो पहले खुद को और सोच को तो बदलो।

कुंवारी लड़कियों को सीलबंद पैकट समझना और अपनी भूख मिटाने के लिए खोलो और खा लो यही सोच रखने वाले महिलाओं की तरफ से बस इतना ही कहुंगी ”चाँद सूरज पर जाने की बात करते हो और हवस में फिर वहीं जा पहुंचते हो”गंदी सोच विचारधारा को बदलो अपनी मानसिकता को बदलो।

हाँ हमारी वर्जिनिटी खो चूकी है क्योंकि “हम अब उड़ने लगे हैं कयी ख्वाब बुनने लगे हैं साथ कदम से कदम मिलाकर हम चलने लगे हैं”

हम अब आसमान में तुम्हारी तरह फाइटर प्लेन और ट्रेन चला रहे हैं तुम्हारी तरह हर जगह साथ चल रहें हैं हमने तो प्रमाण नहीं मागा फिर आप क्यों मागते हैं। दूनिया के हर कोने में अपने काम से प्रमाण दे रहें हैं हम तुम्हारी पिछड़ी सोच से नहीं।

हम अब मुकाम खुद का बना रहें हैं उसमें हमें कयी चोटें, कयी धक्के खाने पड़ते हैं हमारी कोमल काया ये सब नहीं झेल पाती और जाने अनजाने में हमारी वर्जिन खो जाती है जो खुद हमें भी पता नहीं चल पाता। अब क्या प्रमाण दें कहां से लेकर आएं वो प्रमाण जो तुम्हारी नजर में वर्जिनिटी का सबुत है।

सच कहे तो अब हम महिलाओं को प्रमाण देना भी नहीं है। तुम अपनी कुठित मानसिकता से बाहर निकलो और शर्म करो अपनी सोच पर समाज तब बदलेगा जब सब बदलेंगे।सोच बदलेगी।

अगर वर्जिनिटी का प्रमाणपत्र स्त्री से चाहिए तो खुद का प्रमाण पत्र साबित करो। गंदी टिप्पणी से कुछ नहीं होता होता है तो बस आपके बारे में सबकी सोच खराब हो जाती है। महिलाओं को सम्मान दें सोच बदलेगी तभी हम बदलेंगे। न जरिया बदलिये तभी समाज बदलेगा।

निक्की शर्मा (रश्मि), मुम्बई

Sushil Kumar Josh

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