बैंड न बाजा; दुल्हन ले गया दूल्हा राजा

लैंसडौन(जहरीखाल)। संत निरंकारी मिशन ब्रांच जहरीखाल जिला पौड़ी के तत्वाधान में एक जोडे ने सदा शादी कर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया। बताया जा रहा है कि यह शादी बड़े ही ठंग से सादगी पूर्ण एवम् इसमें किसी भी प्रकार का दिखावा इत्यादि देखने को नहीं मिला।

गौरतलब है कि बाबा गुरुवचन जी महाराज के आदेशानुसार सन 1965 से निरंकारी मिशन ने सादा शादी करने की शुरूवात की थी। जिसमें उनके अनुयाई स्वेच्छा से अपनी शादी मिशन के नियानुसार अर्थात किसी भी दिखावे को बढ़ावा न देकर करते है।

वहीं संत निरंकारी मिशन में प्रत्येक वर्ष ऐसी सैकड़ों शादियां होती है जो बहुत से सादगी पूर्ण बिना दहेज के लेन देन के संपन्न होती है। जहरिखाल के सत्संग भवन में एक जोड़े ने सत्संग में बड़े सादगी पूर्ण ब्याह रचाया।

निरंकारी मिशन के पारम्परिक तौर से ’जयमाला’ एवम ’सांझा हार’ हुआ। संगीत के बीच पवित्र मंत्र स्वरूप निरंकारी लांवा पढ़ा गया।

इस इस सुन्दर विवाह के साक्षी सैकड़ों लोगों बने और उन्होंने मिशन की इस कार्य की खूब सराहना भी की एवम् पुष्प बरसा कर जोड़े को आशीर्वाद दिया। नवदंपति जीवन में प्रवेश करने वाले दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद देते हुए एवम् सत्संग की अध्यक्षता करते हुए पौड़ी जिले के संयोजक महात्मा निरपेष तिवारी ने कहा कि दुल्हन बहु के रूप में नहीं बेटी के रूप में ससुराल जाए।

वहीं सास-ससुर की माता-पिता, ननद-देवर को भाई के रूप में सम्मान दे। सास-ससुर को नित्य प्रणाम करें और आशीर्वाद ले। दामाद भी ससुराल में बेटा बनकर जाए। दोनों समधी परिवार एक-दूसरे का आदर करें। बुजुर्गों का आशीर्वाद मिथ्या नहीं जाता।

संसार में अपना पालन पोषण मनुष्य और पशु-पक्षी भी करते हैं और संतान भी पैदा करते हैं। ईश्वर की प्राप्ति पशु-पक्षी नहीं कर सकते हैं, साधना-सिमरन नही कर सकते, ईश्वर की प्राप्ति सिर्फ मनुष्य ही कर सकता हैं। मानव जीवन का परम लक्ष्य सिर्फ ईश्वर प्राप्ति हैं।

उन्होंने कहा कि, संसार में सभी दृश्यमान जीव-जंतु, मानव, वस्तुएँ, आकाशीय पिण्ड, ग्रह, उपग्रह गतिशील हैं तथा परिवर्तनीय हैं। यही संसार का नियम हैं। ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने से ही मनुष्य का कल्याण होता हैं। आनंद प्राप्ति हेतु ईश्वर से जुड़ना आवश्यक हैं। सेवा, सत्संग, सुमिरन करने वाले को ही भक्ति का सुख प्राप्त होता हैं।

इस उपलक्ष में यहां ब्रांच मुखी जहरिखाल शुभाश जी, अजय, प्रिया, विनोद कोटला जी, संभू प्रसाद जी, ब्रांच मुखी हल्दूखाता सतेंद्र सिंह बिष्ट आदि मौजूद थे।

अंकित टम्टा, कोटद्वार

Sushil Kumar Josh

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