क्यों की जाती है सूर्य की पूजा- जानिए; “सूर्योपासना का पर्व छठ पूजा सभी के जीवन में लाएं सुख-समृद्धि”

देहरादून। सूर्योपासना का पर्व छठ पूजा सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लाएं, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व हमें प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है। सूर्य की आराधाना प्रकृति की आराधना है, प्राकृतिक संसाधनों की आराधना है। सूर्य इस विश्व के लिये जीवनदायी ऊर्जा का स्रोत है। इसलिए प्रदेशवासियों को छठ पूजा पर बधाई व शुभकामनाएं।

बता दें कि महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान रविवार को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ। सोमवार को पर्व के दूसरे दिन सुबह में व्रती गंगा सहित विभिन्न नदियों व तालाबों में स्नान कर पवित्र पात्र में जल भरकर घर आए तथा प्रसाद बनाया। इसके बाद देर शाम खरना की पूजा के बाद 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ हो गया। खरना का प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया। अब मंगलवार को अस्ताचलगामी और बुधवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। मंगलवार को ही अर्घ्य के लिए ठेकुआ का प्रसाद तैयार किया जाएगा। फिर उसे कलसूप में फल-फूल और पूजन सामग्रियों के साथ सजाया जाएगा।

क्यों की जाती है सूर्य की पूजा

छठ पर्व पर एक तरफ छठी मइया का गीत गाया जाता है तो दूसरी ओर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह पूजा की जाती है। षष्ठी तिथि शुक्र की तिथि मानी जाती है और शुक्र की अधिष्ठात्री स्वयं मां जगदंबिका हैं। इस वजह से छठ माता कहा जाता है और उनके मंगल गीत गाकर उनकी पूजा की जाती है। चूंकि यह पर्व संतान की मंगल कामना से जुड़ा हुआ है, इस वजह से यह सूर्य से भी संबंधित हो जाता है।

सूर्य कालपुरुष के पंचम भाव के स्वामी हैं। पंचम भाव संतान, विद्या, बुद्धि आदि भावों का कारक माना जाता है। इस कारण इस दिन सूर्य की पूजा करके संतान की प्राप्ति व संतान से संबंधित याचनाओं की पूर्ति के लिए सूर्य की आराधना की जाती है। इसमें समस्त ऋतु फल अर्पित किए जाते हैं और संकल्प के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।

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