28 चोटें व 22 गोलियां मारने पुलिसकर्मियों को हाई कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

देहरादून। जुलाई 2009 को फर्जी मुठभेड़ में एमबीए छात्र रणबीर सिंह की हत्या करने के आरोप में दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तराखंड के सात निलंबित पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक समाचार एजेंसी के अनुसार जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस आईएस मेहता की बेंच ने कहा कि कानून के शासन में मुठभेड़ जैसी गैर-न्यायिक हत्या के लिए कोई जगह नहीं है। हाई कोर्ट ने हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों से अन्य 11 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया।

 

फर्जी मुठभेड़ में एमबीए छात्र रणबीर सिंह की हत्या

गौरतलब है कि तीन जुलाई 2009 को उत्तराखंड पुलिस ने एक फर्जी मुठभेड़ में एमबीए छात्र रणबीर सिंह की देहरादून रायपुर के क्षेत्र में हत्या कर दी थी। इस मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने नौ जून 2014 को उत्तराखंड के 17 पुलिसकर्मियों को हत्या का दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने एक अन्य पुलिसकर्मी को हत्या के आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन सबूत मिटाने और गलत दस्तावेज तैयार करने का दोषी ठहराया था।

 

28 निशान चोटों व 22 गोलियां मारे

देहरादून फर्जी मुठभेड़ की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही थी। सीबीआई ने पुलिस की इस कहानी को खारिज कर दिया था कि रणबीर सिंह और उसके दो साथी देहरादून में हथियारबंद लूट की योजना बना रहे थे। सीबीआई ने अदालत को बताया था कि एमबीए छात्र रणबीर सिंह अपनी नई नौकरी शुरू करने देहरादून आया था। वह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का रहने वाला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रणबीर सिंह के शव पर चोटों के 28 निशानों के अलावा पुलिस द्वारा 22 गोलियां मारे जाने की बात सामने आई थी। -साभार

Sushil Kumar Josh

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