भारतीय रिजर्व बैंक देहरादून कार्यालय द्वारा वित्तीय साक्षरता सप्ताह का उद्घाटन -जानिए खबर

देहरादून। वित्तीय साक्षरता सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक की एक पहल है जिसका उद्देश्य संकेंद्रित अभियान के माध्यम से प्रत्येक वर्ष मुख्य विषयों के जरिए जागरूकता बढ़ाया जाना है।

बता दें कि इस वर्ष वित्तीय साक्षरता सप्ताह 3 से 7 जून 2019 तक मनाया जा रहा है जिसका विषय है-किसान और वे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा बनकर कैसे लाभ उठा सकते हैं। वित्तीय साक्षरता सप्ताह का उद्घाटन कार्यक्रम 3 जून 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक, देहरादून में आयोजित किया गया।

वहीं कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीमती मनीषा पंवार, प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास और एमएसएमई, उत्तराखंड द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक श्री राजेश कुमार तथा भारतीय रिजर्व बैंक, नाबार्ड, कृषि विकास, उत्तराखंड सरकार और प्रमुख बैंकों के नियंत्रक प्रधानों की उपस्थिति में किया गया। श्री राजेश कुमार, क्षेत्रीय निदेशक, देहरादून ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए बनाए रखे जा सकने वाले वित्तीय समावेशन के लिए वित्तीय साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने मंच को अवगत कराया कि अर्थव्यवस्था की समग्र आर्थिक वृद्धि में कृषि क्षेत्र के महत्व को ध्यान में रखते हुए, इस वर्ष वित्तीय साक्षरता सप्ताह के लिए “किसान” विषय चुना गया है। सप्ताह के दौरान प्रस्तावित गतिविधियों को रेखांकित करते हुए, उन्होंने अवगत कराया कि राज्य के सभी जिलों में बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किसानों के लिए विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे।

वित्तीय साक्षरता सप्ताह के दौरान प्रसारित संदेश में कृषि वित्त प्राप्त करने तथा जिम्मेदारीपूर्ण उधार के लाभ अर्थात समय पर ऋण चुकाने के लाभ, क्रेडिट स्कोर में सुधार करने आदि पर ध्यानकेंद्रित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि जनता के पास पहुंचने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक जून माह के दौरान दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर केंद्रीकृत व्यापक मीडिया अभियान भी शुरू करेगा।

उन्होंने बैंकों के नियंत्रक प्रधानों से आग्रह किया कि वे अपनी शाखाओं के माध्यम से इस सप्ताह के दौरान राज्य के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में जनता के पास पहुंचने का प्रयास करें। श्रीमती मनीषा पंवार ने अपने संबोधन में बैंकों से अपील की कि वे जिम्मेदारीपूर्ण उधार का संदेश फैलाने पर ध्यानकेंद्रित करें जिससे न केवल क्रेडिट संवर्धन हो सकेगा बल्कि उत्पादक प्रयोजनों हेतु आस्तियों का सृजन भी होगा।

उन्होंने बैंकों और सरकारी विभागों सहित सभी स्टेकधारकों को यह सलाह भी दी कि वे वित्तीय साक्षरता फैलाने के लिए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संधारणीय वृद्धि के लिए पारिस्थितिकी तंत्र सृजित करने में सहायता करने हेतु समन्वय रूप में कार्य करें।

Sushil Kumar Josh

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